₹1 करोड़ के इनामी माओवादी मिसिर बेसरा गिरफ्तार, गिरिडीह में संयुक्त अभियान में दो सहयोगी भी दबोचे
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के गिरिडीह-धनबाद सीमावर्ती इलाके में 29 जुलाई 2026 की देर रात चलाए गए संयुक्त सुरक्षा अभियान में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य और ₹1 करोड़ के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा को उसके दो प्रमुख सहयोगियों समेत गिरफ्तार कर लिया गया। सुरक्षा एजेंसियाँ इस कार्रवाई को राज्य में माओवादियों के विरुद्ध चल रहे अभियान की इस वर्ष की सबसे बड़ी उपलब्धि बता रही हैं।
अभियान का घटनाक्रम
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, झारखंड पुलिस, केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) और कोबरा बटालियन ने खुफिया सूचना के आधार पर मंगलवार देर रात संयुक्त घेराबंदी अभियान चलाया। इसी कार्रवाई में मिसिर बेसरा को दबोचा गया।
उसके साथ ₹15 लाख के इनामी माओवादी संगठन के रीजनल कमेटी सदस्य मेहनत उर्फ मोछू उर्फ विभीषण मुर्मू और गौरव उर्फ सौरभ को भी गिरफ्तार किया गया। अभियान के दौरान दो अन्य संदिग्धों को भी हिरासत में लिया गया है, जिनसे पूछताछ जारी है।
गिरफ्तारी की कड़ी कैसे जुड़ी
मिसिर बेसरा की धरपकड़ से ठीक एक दिन पहले, मंगलवार को रांची में 16 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था। इन्हीं में मिसिर बेसरा का करीबी अंगरक्षक देवान मुर्मू उर्फ शनिचरवा भी शामिल था। सुरक्षा एजेंसियों को उससे मिसिर बेसरा की गतिविधियों और संभावित ठिकाने की अहम जानकारी मिली, जिसके आधार पर घेराबंदी की गई।
मिसिर बेसरा: चार दशक का माओवादी इतिहास
मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर, उर्फ सुनिर्मल, उर्फ सागर, गिरिडीह जिले के पीरटांड़ क्षेत्र का मूल निवासी है। वह करीब चार दशक पहले माओवादी संगठन से जुड़ा और कालांतर में संगठन के सर्वोच्च निर्णय-निर्माण निकाय पोलित ब्यूरो का सदस्य बना।
झारखंड, बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में उसके विरुद्ध हत्या, सुरक्षाबलों पर हमले, आईईडी विस्फोट, लेवी वसूली और रंगदारी सहित 150 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं।
वह पहले वर्ष 2007 में खूंटी पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया था, किंतु 2009 में बिहार के लखीसराय कोर्ट परिसर पर माओवादियों के हमले के दौरान पुलिस हिरासत से फरार हो गया था। उसके बाद से करीब दो दशकों तक वह सुरक्षा एजेंसियों की मोस्ट वांटेड सूची में बना रहा।
माओवादी संगठन पर असर
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, हाल के महीनों में लगातार मुठभेड़ों, गिरफ्तारियों और आत्मसमर्पण की घटनाओं से माओवादी संगठन पहले ही कमज़ोर पड़ चुका था। शीर्ष नेतृत्व के गिरफ्त में आने से संगठन के शेष सक्रिय नेटवर्क पर भी दबाव बढ़ने की उम्मीद है।
आगे की जाँच
केंद्रीय और राज्य की सुरक्षा एजेंसियाँ फिलहाल मिसिर बेसरा तथा उसके सहयोगियों से एक गुप्त स्थान पर पूछताछ कर रही हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि पूछताछ से माओवादी संगठन के सक्रिय नेटवर्क, हथियारों के जखीरे, वित्तीय स्रोतों और अन्य सहयोगियों के बारे में महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं। गिरफ्तारी को लेकर पुलिस का विस्तृत आधिकारिक बयान अभी जारी किया जाना बाकी है।