29 जुलाई 2026
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₹1 करोड़ के इनामी माओवादी मिसिर बेसरा गिरफ्तार, गिरिडीह में संयुक्त अभियान में दो सहयोगी भी दबोचे

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₹1 करोड़ के इनामी माओवादी मिसिर बेसरा गिरफ्तार, गिरिडीह में संयुक्त अभियान में दो सहयोगी भी दबोचे

सारांश

करीब दो दशकों से फरार ₹1 करोड़ के इनामी माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा को झारखंड के गिरिडीह-धनबाद सीमावर्ती क्षेत्र में CRPF और कोबरा बटालियन के संयुक्त अभियान में दबोचा गया। उसके अंगरक्षक के आत्मसमर्पण से मिली सूचना इस गिरफ्तारी की निर्णायक कड़ी बनी।

मुख्य बातें

मिसिर बेसरा , भाकपा (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य और ₹1 करोड़ के इनामी नक्सली, को 29 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तारी गिरिडीह-धनबाद सीमावर्ती क्षेत्र में झारखंड पुलिस, CRPF और कोबरा बटालियन के संयुक्त अभियान में हुई।
उसके साथ ₹15 लाख के इनामी मेहनत उर्फ विभीषण मुर्मू और गौरव उर्फ सौरभ भी गिरफ्तार किए गए।
मिसिर बेसरा 2009 में लखीसराय कोर्ट परिसर पर हमले के दौरान हिरासत से फरार हुआ था और करीब दो दशकों से मोस्ट वांटेड था।
चार राज्यों में उसके खिलाफ 150 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं।
गिरफ्तारी से एक दिन पहले रांची में 16 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था; उसके अंगरक्षक की सूचना गिरफ्तारी में निर्णायक रही।

झारखंड के गिरिडीह-धनबाद सीमावर्ती इलाके में 29 जुलाई 2026 की देर रात चलाए गए संयुक्त सुरक्षा अभियान में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य और ₹1 करोड़ के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा को उसके दो प्रमुख सहयोगियों समेत गिरफ्तार कर लिया गया। सुरक्षा एजेंसियाँ इस कार्रवाई को राज्य में माओवादियों के विरुद्ध चल रहे अभियान की इस वर्ष की सबसे बड़ी उपलब्धि बता रही हैं।

अभियान का घटनाक्रम

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, झारखंड पुलिस, केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) और कोबरा बटालियन ने खुफिया सूचना के आधार पर मंगलवार देर रात संयुक्त घेराबंदी अभियान चलाया। इसी कार्रवाई में मिसिर बेसरा को दबोचा गया।

उसके साथ ₹15 लाख के इनामी माओवादी संगठन के रीजनल कमेटी सदस्य मेहनत उर्फ मोछू उर्फ विभीषण मुर्मू और गौरव उर्फ सौरभ को भी गिरफ्तार किया गया। अभियान के दौरान दो अन्य संदिग्धों को भी हिरासत में लिया गया है, जिनसे पूछताछ जारी है।

गिरफ्तारी की कड़ी कैसे जुड़ी

मिसिर बेसरा की धरपकड़ से ठीक एक दिन पहले, मंगलवार को रांची में 16 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था। इन्हीं में मिसिर बेसरा का करीबी अंगरक्षक देवान मुर्मू उर्फ शनिचरवा भी शामिल था। सुरक्षा एजेंसियों को उससे मिसिर बेसरा की गतिविधियों और संभावित ठिकाने की अहम जानकारी मिली, जिसके आधार पर घेराबंदी की गई।

मिसिर बेसरा: चार दशक का माओवादी इतिहास

मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर, उर्फ सुनिर्मल, उर्फ सागर, गिरिडीह जिले के पीरटांड़ क्षेत्र का मूल निवासी है। वह करीब चार दशक पहले माओवादी संगठन से जुड़ा और कालांतर में संगठन के सर्वोच्च निर्णय-निर्माण निकाय पोलित ब्यूरो का सदस्य बना।

झारखंड, बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में उसके विरुद्ध हत्या, सुरक्षाबलों पर हमले, आईईडी विस्फोट, लेवी वसूली और रंगदारी सहित 150 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं।

वह पहले वर्ष 2007 में खूंटी पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया था, किंतु 2009 में बिहार के लखीसराय कोर्ट परिसर पर माओवादियों के हमले के दौरान पुलिस हिरासत से फरार हो गया था। उसके बाद से करीब दो दशकों तक वह सुरक्षा एजेंसियों की मोस्ट वांटेड सूची में बना रहा।

माओवादी संगठन पर असर

सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, हाल के महीनों में लगातार मुठभेड़ों, गिरफ्तारियों और आत्मसमर्पण की घटनाओं से माओवादी संगठन पहले ही कमज़ोर पड़ चुका था। शीर्ष नेतृत्व के गिरफ्त में आने से संगठन के शेष सक्रिय नेटवर्क पर भी दबाव बढ़ने की उम्मीद है।

आगे की जाँच

केंद्रीय और राज्य की सुरक्षा एजेंसियाँ फिलहाल मिसिर बेसरा तथा उसके सहयोगियों से एक गुप्त स्थान पर पूछताछ कर रही हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि पूछताछ से माओवादी संगठन के सक्रिय नेटवर्क, हथियारों के जखीरे, वित्तीय स्रोतों और अन्य सहयोगियों के बारे में महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं। गिरफ्तारी को लेकर पुलिस का विस्तृत आधिकारिक बयान अभी जारी किया जाना बाकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह भी ध्यान देने योग्य है कि मिसिर बेसरा 2007 में भी गिरफ्तार हुआ था और 2009 में फरार हो गया था — इसलिए इस बार न्यायिक हिरासत और सुरक्षा प्रबंधन की मज़बूती उतनी ही अहम होगी जितनी गिरफ्तारी खुद।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मिसिर बेसरा कौन है और उसे क्यों पकड़ा गया?
मिसिर बेसरा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के पोलित ब्यूरो का सदस्य है और झारखंड, बिहार, ओडिशा व छत्तीसगढ़ में 150 से अधिक आपराधिक मामलों में वांछित था। उस पर ₹1 करोड़ का इनाम घोषित था और वह 2009 से फरार था।
मिसिर बेसरा को कहाँ और कैसे गिरफ्तार किया गया?
उसे 29 जुलाई 2026 की देर रात गिरिडीह-धनबाद सीमावर्ती इलाके में झारखंड पुलिस, CRPF और कोबरा बटालियन के संयुक्त अभियान में गिरफ्तार किया गया। उसके अंगरक्षक देवान मुर्मू उर्फ शनिचरवा के आत्मसमर्पण से मिली खुफिया जानकारी इस अभियान की आधारशिला बनी।
मिसिर बेसरा पहले कब गिरफ्तार हुआ था और कैसे फरार हुआ?
मिसिर बेसरा को 2007 में खूंटी पुलिस ने गिरफ्तार किया था। 2009 में बिहार के लखीसराय कोर्ट परिसर पर माओवादियों के हमले के दौरान वह पुलिस हिरासत से फरार हो गया और उसके बाद करीब दो दशकों तक मोस्ट वांटेड सूची में रहा।
इस गिरफ्तारी से माओवादी संगठन पर क्या असर पड़ेगा?
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, पोलित ब्यूरो स्तर के नेता की गिरफ्तारी से माओवादी संगठन के शीर्ष नेतृत्व को बड़ा झटका लगा है। हाल के महीनों में लगातार मुठभेड़ों और आत्मसमर्पण से पहले से कमज़ोर पड़े संगठन के शेष नेटवर्क पर भी दबाव बढ़ने की उम्मीद है।
गिरफ्तारी के बाद आगे क्या होगा?
केंद्रीय और राज्य सुरक्षा एजेंसियाँ मिसिर बेसरा व उसके सहयोगियों से गुप्त स्थान पर पूछताछ कर रही हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि इससे माओवादी नेटवर्क, हथियारों के जखीरे और वित्तीय स्रोतों की जानकारी मिलेगी। पुलिस का विस्तृत आधिकारिक बयान अभी जारी होना बाकी है।
राष्ट्र प्रेस
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