मारुति सुजुकी जून 2026 से बढ़ाएगी कारों के दाम, ₹30,000 तक महंगे होंगे सभी मॉडल
सारांश
मुख्य बातें
मारुति सुजुकी इंडिया ने 21 मई 2026 को स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के ज़रिए घोषणा की कि वह जून 2026 से अपने सभी मॉडलों की कीमतों में ₹30,000 तक की बढ़ोतरी करेगी। देश की सबसे बड़ी यात्री वाहन निर्माता कंपनी ने इस फैसले के पीछे इनपुट लागत में लगातार वृद्धि को प्रमुख कारण बताया है।
कंपनी ने क्या कहा
नियामकीय फाइलिंग में मारुति सुजुकी ने स्पष्ट किया, 'इनपुट लागत में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए कंपनी ने जून 2026 से अपने सभी मॉडलों की कीमतों में ₹30,000 तक की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है।' कंपनी ने यह भी कहा कि कीमतों में वृद्धि अलग-अलग मॉडलों के अनुसार भिन्न होगी — अर्थात सभी गाड़ियाँ समान रूप से महंगी नहीं होंगी।
लागत दबाव की पृष्ठभूमि
कंपनी के अनुसार, कच्चे माल, परिचालन लागत और लॉजिस्टिक्स खर्च में लगातार वृद्धि ने ऑटोमोबाइल उद्योग पर व्यापक दबाव बनाया है। मारुति ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में उसने आंतरिक लागत-कटौती के कई उपाय अपनाए, ताकि ग्राहकों पर बोझ न पड़े। हालाँकि, कंपनी के अनुसार, 'महंगाई का दबाव काफी बढ़ गया है और प्रतिकूल लागत का माहौल बना हुआ है, जिसके चलते बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा बाज़ार पर डालना ज़रूरी हो गया है।'
उद्योग का व्यापक रुझान
यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब भारतीय ऑटोमोबाइल क्षेत्र में कीमत बढ़ोतरी एक व्यापक प्रवृत्ति बन चुकी है। इससे पहले महिंद्रा एंड महिंद्रा ने 6 अप्रैल 2026 से अपने एसयूवी और कमर्शियल व्हीकल पोर्टफोलियो की कीमतों में औसतन 1.6 प्रतिशत — और अधिकतम 2.5 प्रतिशत तक — की बढ़ोतरी की घोषणा की थी। सप्लाई चेन में बढ़ते दबाव और वैश्विक कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव ने पूरे उद्योग को प्रभावित किया है।
ग्राहकों पर असर
मारुति सुजुकी भारत में सबसे अधिक बिकने वाली कार कंपनी है और उसके पोर्टफोलियो में ऑल्टो, वैगन-आर, स्विफ्ट, बलेनो, ब्रेज़ा और एर्टिगा जैसे लोकप्रिय मॉडल शामिल हैं। कीमतों में बढ़ोतरी से मध्यम वर्ग और पहली बार कार खरीदने वाले ग्राहकों पर सबसे अधिक असर पड़ने की संभावना है। कंपनी ने कहा है कि वह ग्राहकों पर असर न्यूनतम रखने की कोशिश जारी रखेगी।
आगे क्या
जून 2026 से लागू होने वाली नई कीमतें मॉडल-वार अलग होंगी। खरीदारी की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए मई 2026 का अंत तक पुराने दाम पर गाड़ी बुक करने का अवसर हो सकता है। विश्लेषकों के अनुसार, यदि कमोडिटी लागत में राहत नहीं मिली तो साल की दूसरी छमाही में भी कीमत संशोधन की संभावना बनी रहेगी।