UCC पर मौलाना साजिद रशीदी का बयान: 'कुरान और शरीयत पर अमल जारी रहेगा, चाहे देशभर में UCC लागू हो'
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने 2 अक्टूबर 2026 को समान नागरिक संहिता (UCC) पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि चाहे पूरे देश में UCC लागू कर दिया जाए, मुस्लिम समुदाय कुरान और शरीयत पर अमल करना नहीं छोड़ेगा। इसी बातचीत में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैप्टन स्मित मच्छार के साथ की गई मुलाकात की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए उन्हें 'दिल बड़ा रखने वाला इंसान' बताया।
कैप्टन स्मित मच्छार और PM मोदी की बातचीत पर प्रतिक्रिया
मौलाना रशीदी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की कैप्टन स्मित मच्छार के साथ हुई बातचीत उन्होंने पूरी सुनी और वे भावुक हो गए। उन्होंने कहा, 'उनका दिल बहुत बड़ा है, वे बहुत अच्छे इंसान हैं। यह बातचीत दिल छू लेने वाली थी।' मौलाना ने सरकार से अपील की कि कैप्टन स्मित मच्छार को उनकी सेवाओं के लिए अशोक चक्र से सम्मानित किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जब जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कुछ युवाओं को हिरासत में लिया गया था, तब उनकी एक अपील पर प्रधानमंत्री ने सभी को माफ कर दिया था। मौलाना के अनुसार, 'प्रधानमंत्री के बारे में लोग चाहे जो कुछ भी कहें, लेकिन उनके अंदर एक अच्छा इंसान भी है।'
UCC पर मौलाना रशीदी का कड़ा रुख
गुजरात में UCC विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के प्रश्न पर मौलाना रशीदी ने उत्तराखंड का उदाहरण देते हुए BJP सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में UCC लागू होने के बाद क्या वहाँ बेरोज़गारी खत्म हुई, महंगाई कम हुई या शिक्षा व्यवस्था सुधरी? उनके अनुसार, UCC को जानबूझकर हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण और वोट बैंक की राजनीति के लिए लाया जा रहा है।
मौलाना रशीदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'हम अपने कुरान और अपनी शरीयत पर अमल करेंगे, चाहे यह देशभर में ही UCC लागू कर दें।' उन्होंने यह भी कहा कि संविधान ने धार्मिक आधार पर मुसलमानों को जो अधिकार दिए हैं, उनमें छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए। उनके इस बयान को आलोचकों ने UCC के संवैधानिक प्रश्न से अलग, एक सामुदायिक प्रतिरोध की घोषणा के रूप में देखा है।
CJP प्रदर्शन और मुंबई हिरासत पर टिप्पणी
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर मुंबई में CJP (Citizens for Justice and Peace) के प्रदर्शन और उसमें हुई हिरासत पर मौलाना ने कहा कि जब प्रशासन ने अनुमति नहीं दी थी, तब प्रदर्शन को टाल देना चाहिए था। उन्होंने कहा कि जानबूझकर हिरासत में जाकर मीडिया का ध्यान खींचना राजनीतिक आदत बन गई है। उनके अनुसार, मुद्दे अपनी जगह सही हो सकते हैं, लेकिन उन्हें सही समय और सही जगह पर उठाया जाना चाहिए।
विश्व हिंदू परिषद के बयान पर प्रतिक्रिया
गरबा आयोजनों को लेकर विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार के बयान पर मौलाना रशीदी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब, पाकिस्तान या बांग्लादेश का संदर्भ देकर मुसलमानों को नीचा दिखाने की कोशिश की जाती है। मौलाना ने चुनौती दी कि आलोक कुमार उन्हें बताएं कि वे किस पंडाल में गरबा खेलने जाएंगे — वे भी वहाँ आएंगे। उन्होंने कहा, 'ये लोग सिर्फ हिंदू-मुसलमान करना जानते हैं, खुद किसी कार्यक्रम में शामिल नहीं होते।'
क्या होगा आगे
गुजरात UCC विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक केंद्रीय बनने की संभावना है। मौलाना रशीदी जैसे प्रमुख धार्मिक नेताओं का खुला विरोध यह संकेत देता है कि UCC के क्रियान्वयन की राह में सामाजिक और कानूनी चुनौतियाँ आ सकती हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्तर पर UCC की दिशा में आगे क्या कदम उठाती है।