वक्फ संपत्ति घोटाले पर मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने बरेली DM को सौंपे सबूत, सपा पर धमकी का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
अखिल भारतीय मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने 31 जुलाई 2026 को बरेली के जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में वक्फ बोर्ड की संपत्तियों के कथित दुरुपयोग से जुड़े दस्तावेज़ी सबूत प्रस्तुत किए और समाजवादी पार्टी (सपा) से जुड़े लोगों पर उन्हें डराने-धमकाने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि बहेड़ी तहसील की 1,400 बीघा वक्फ भूमि की अवैध बिक्री और चांदपुर बिचपुरी की एक वक्फ संपत्ति — जिसका वर्तमान बाज़ार मूल्य कथित तौर पर ₹100 करोड़ है — के हस्तांतरण से जुड़े साक्ष्य उन्होंने अधिकारियों को सौंपे हैं।
धमकियों का आरोप और मौलाना का जवाब
मौलाना रजवी ने कहा, 'समाजवादी पार्टी के लोग मुझे डराने-धमकाने और दबाव डालने की कोशिश कर रहे हैं। मैं एक मुसलमान हूँ जो अल्लाह में पूरी आस्था रखता है। इसलिए मैं इन खोखली धमकियों से नहीं डरूँगा।' उन्होंने स्पष्ट किया कि सपा नेताओं द्वारा सबूत माँगे जाने के बाद ही उन्होंने DM कार्यालय में औपचारिक रूप से दस्तावेज़ दाखिल करने का निर्णय लिया।
वक्फ संपत्तियों में कथित अनियमितताएँ
मौलाना रजवी के अनुसार, पहला मामला बहेड़ी तहसील में 1,400 बीघा वक्फ भूमि की बिक्री से जुड़ा है, जिसके दस्तावेज़ उन्होंने प्रस्तुत किए। दूसरा मामला बरेली के चांदपुर बिचपुरी क्षेत्र की एक वक्फ संपत्ति का है, जिसकी कीमत शहरीकरण के बाद बढ़कर कथित तौर पर ₹100 करोड़ हो गई है और जिसे कथित तौर पर बेचा जा चुका है। उन्होंने कहा कि वक्फ की राशि गरीब, अनाथ और विधवा मुसलमानों की सहायता के लिए निर्धारित होती है, परंतु 'केवल भ्रष्टाचार हुआ है और लोगों ने अपने स्वार्थ के लिए पैसे का इस्तेमाल किया है।'
सपा और अखिलेश यादव पर निशाना
मौलाना रजवी ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर भी सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जहाँ अखिलेश यादव राम मंदिर के दान में कथित चोरी — जो उनके अनुसार ₹2.5 से ₹3 करोड़ की बताई जाती है — का मुद्दा उठाते हैं, वहीं वक्फ बोर्ड की भूमि से जुड़ा कथित घोटाला अरबों रुपये का है। यह बयान राजनीतिक रूप से संवेदनशील है और सपा ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
मुख्यमंत्री योगी से जाँच की माँग
इससे पहले मौलाना रजवी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर वक्फ संपत्तियों की जाँच की माँग कर चुके हैं। 31 जुलाई को DM कार्यालय में सबूत सौंपने के बाद उन्होंने दोहराया, 'मैं मुख्यमंत्री और जिला मजिस्ट्रेट से अपील करता हूँ कि वे इन सभी संपत्तियों की जाँच कराएँ ताकि सच्चाई सामने आए और पैसा गरीब मुसलमानों तक पहुँचे।' गौरतलब है कि वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर भी बहस तेज़ हो रही है और संसद में वक्फ (संशोधन) अधिनियम पर विवाद जारी है।
आगे क्या
अब देखना होगा कि बरेली के जिला मजिस्ट्रेट प्रस्तुत दस्तावेज़ों पर क्या कार्रवाई करते हैं और उत्तर प्रदेश सरकार मौलाना रजवी की जाँच माँग को स्वीकार करती है या नहीं। सपा की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया आने पर यह विवाद और गहरा सकता है।