1 अगस्त 2026
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वक्फ संपत्ति घोटाले पर मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने बरेली DM को सौंपे सबूत, सपा पर धमकी का आरोप

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वक्फ संपत्ति घोटाले पर मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने बरेली DM को सौंपे सबूत, सपा पर धमकी का आरोप

सारांश

बरेली में अखिल भारतीय मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने DM कार्यालय में वक्फ संपत्ति घोटाले के दस्तावेज़ सौंपे — 1,400 बीघा भूमि और ₹100 करोड़ की संपत्ति की कथित अवैध बिक्री के सबूत। साथ ही सपा से जुड़े लोगों पर धमकी का आरोप लगाया और मुख्यमंत्री योगी से जाँच की माँग की।

मुख्य बातें

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने 31 जुलाई 2026 को बरेली के जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में वक्फ संपत्ति अनियमितताओं के दस्तावेज़ी सबूत प्रस्तुत किए।
बहेड़ी तहसील में 1,400 बीघा वक्फ भूमि की कथित अवैध बिक्री और चांदपुर बिचपुरी की ₹100 करोड़ मूल्य की वक्फ संपत्ति के हस्तांतरण पर सवाल उठाए।
मौलाना रजवी ने समाजवादी पार्टी (सपा) से जुड़े लोगों पर धमकी और दबाव डालने का आरोप लगाया।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि वक्फ घोटाला राम मंदिर दान विवाद ( ₹2.5–₹3 करोड़ ) से कहीं बड़ा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर और DM को सबूत सौंपकर जाँच की औपचारिक माँग की गई।

अखिल भारतीय मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने 31 जुलाई 2026 को बरेली के जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में वक्फ बोर्ड की संपत्तियों के कथित दुरुपयोग से जुड़े दस्तावेज़ी सबूत प्रस्तुत किए और समाजवादी पार्टी (सपा) से जुड़े लोगों पर उन्हें डराने-धमकाने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि बहेड़ी तहसील की 1,400 बीघा वक्फ भूमि की अवैध बिक्री और चांदपुर बिचपुरी की एक वक्फ संपत्ति — जिसका वर्तमान बाज़ार मूल्य कथित तौर पर ₹100 करोड़ है — के हस्तांतरण से जुड़े साक्ष्य उन्होंने अधिकारियों को सौंपे हैं।

धमकियों का आरोप और मौलाना का जवाब

मौलाना रजवी ने कहा, 'समाजवादी पार्टी के लोग मुझे डराने-धमकाने और दबाव डालने की कोशिश कर रहे हैं। मैं एक मुसलमान हूँ जो अल्लाह में पूरी आस्था रखता है। इसलिए मैं इन खोखली धमकियों से नहीं डरूँगा।' उन्होंने स्पष्ट किया कि सपा नेताओं द्वारा सबूत माँगे जाने के बाद ही उन्होंने DM कार्यालय में औपचारिक रूप से दस्तावेज़ दाखिल करने का निर्णय लिया।

वक्फ संपत्तियों में कथित अनियमितताएँ

मौलाना रजवी के अनुसार, पहला मामला बहेड़ी तहसील में 1,400 बीघा वक्फ भूमि की बिक्री से जुड़ा है, जिसके दस्तावेज़ उन्होंने प्रस्तुत किए। दूसरा मामला बरेली के चांदपुर बिचपुरी क्षेत्र की एक वक्फ संपत्ति का है, जिसकी कीमत शहरीकरण के बाद बढ़कर कथित तौर पर ₹100 करोड़ हो गई है और जिसे कथित तौर पर बेचा जा चुका है। उन्होंने कहा कि वक्फ की राशि गरीब, अनाथ और विधवा मुसलमानों की सहायता के लिए निर्धारित होती है, परंतु 'केवल भ्रष्टाचार हुआ है और लोगों ने अपने स्वार्थ के लिए पैसे का इस्तेमाल किया है।'

सपा और अखिलेश यादव पर निशाना

मौलाना रजवी ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर भी सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जहाँ अखिलेश यादव राम मंदिर के दान में कथित चोरी — जो उनके अनुसार ₹2.5 से ₹3 करोड़ की बताई जाती है — का मुद्दा उठाते हैं, वहीं वक्फ बोर्ड की भूमि से जुड़ा कथित घोटाला अरबों रुपये का है। यह बयान राजनीतिक रूप से संवेदनशील है और सपा ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

मुख्यमंत्री योगी से जाँच की माँग

इससे पहले मौलाना रजवी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर वक्फ संपत्तियों की जाँच की माँग कर चुके हैं। 31 जुलाई को DM कार्यालय में सबूत सौंपने के बाद उन्होंने दोहराया, 'मैं मुख्यमंत्री और जिला मजिस्ट्रेट से अपील करता हूँ कि वे इन सभी संपत्तियों की जाँच कराएँ ताकि सच्चाई सामने आए और पैसा गरीब मुसलमानों तक पहुँचे।' गौरतलब है कि वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर भी बहस तेज़ हो रही है और संसद में वक्फ (संशोधन) अधिनियम पर विवाद जारी है।

आगे क्या

अब देखना होगा कि बरेली के जिला मजिस्ट्रेट प्रस्तुत दस्तावेज़ों पर क्या कार्रवाई करते हैं और उत्तर प्रदेश सरकार मौलाना रजवी की जाँच माँग को स्वीकार करती है या नहीं। सपा की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया आने पर यह विवाद और गहरा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

आरोप गंभीर हैं, पर अभी तक न तो सपा ने आधिकारिक खंडन किया है और न ही प्रशासन ने जाँच की पुष्टि की है। मुख्यधारा की कवरेज इस तथ्य को नज़रअंदाज़ कर रही है कि वक्फ संपत्तियों का दुरुपयोग कोई नई समस्या नहीं — संसदीय समितियाँ वर्षों से इसे रेखांकित करती रही हैं। असली परीक्षा यह है कि क्या प्रशासन इन दस्तावेज़ों पर वास्तविक जाँच बैठाता है, या यह मामला भी राजनीतिक बयानबाज़ी में दब जाता है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने किन वक्फ संपत्तियों के सबूत पेश किए हैं?
उन्होंने बरेली के DM कार्यालय में दो संपत्तियों के दस्तावेज़ सौंपे — बहेड़ी तहसील की 1,400 बीघा वक्फ भूमि, जो कथित तौर पर बेची जा रही है, और चांदपुर बिचपुरी की एक वक्फ संपत्ति जिसका वर्तमान बाज़ार मूल्य ₹100 करोड़ बताया गया है।
मौलाना रजवी ने समाजवादी पार्टी पर क्या आरोप लगाए हैं?
मौलाना रजवी ने आरोप लगाया कि सपा से जुड़े लोग उन्हें डराने-धमकाने और दबाव डालने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अखिलेश यादव ने सबूत माँगे थे, जिसके जवाब में उन्होंने DM कार्यालय में दस्तावेज़ दाखिल किए।
मौलाना रजवी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से क्या माँग की है?
उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर और जिला मजिस्ट्रेट को सबूत सौंपकर वक्फ संपत्तियों की जाँच की माँग की है, ताकि सच्चाई सामने आए और वक्फ की राशि गरीब, अनाथ व विधवा मुसलमानों तक पहुँचे।
मौलाना रजवी ने राम मंदिर दान विवाद का ज़िक्र क्यों किया?
उन्होंने अखिलेश यादव पर पलटवार करते हुए कहा कि राम मंदिर दान में कथित चोरी ₹2.5 से ₹3 करोड़ की बताई जाती है, जबकि वक्फ भूमि से जुड़ा कथित घोटाला अरबों रुपये का है — यह तुलना सपा के दोहरे मानदंड को उजागर करने के लिए की गई।
वक्फ संपत्तियों की राशि किसके लिए निर्धारित होती है?
मौलाना रजवी के अनुसार, वक्फ की राशि गरीब, अनाथ और विधवा मुसलमानों की सहायता के लिए होती है। उनका आरोप है कि भ्रष्टाचार के कारण यह राशि सही लाभार्थियों तक नहीं पहुँच रही।
राष्ट्र प्रेस
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