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मेरठ महापंचायत में राकेश टिकैत की माँग — गन्ना भाव ₹500 प्रति क्विंटल, बिजली दरें घटाओ

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मेरठ महापंचायत में राकेश टिकैत की माँग — गन्ना भाव ₹500 प्रति क्विंटल, बिजली दरें घटाओ

सारांश

मेरठ की महापंचायत में राकेश टिकैत ने गन्ने का भाव ₹500 प्रति क्विंटल करने, बिजली दरें घटाने, भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजे और खादर क्षेत्र में बाढ़-राहत की माँग उठाई। अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर भी किसान हितों की अनदेखी को लेकर चेतावनी दी।

मुख्य बातें

राकेश टिकैत के नेतृत्व में 1 सितंबर को मेरठ में भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) की महापंचायत आयोजित हुई।
किसानों ने गन्ने का भाव ₹500 प्रति क्विंटल करने और बकाया भुगतान की माँग रखी।
बिजली दरों में कमी और खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने की माँग उठाई गई।
भूमि अधिग्रहण में सर्किल रेट बढ़ाने और खादर क्षेत्र में बाढ़-प्रभावित किसानों को मुआवजे की माँग।
टिकैत ने अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता में भारतीय किसान हितों की सुरक्षा पर भी सवाल उठाए।

भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के नेतृत्व में 1 सितंबर को मेरठ में किसानों की महापंचायत आयोजित हुई, जिसमें गन्ने का उचित मूल्य, बिजली दरों में कमी, भूमि अधिग्रहण मुआवजा और बाढ़-राहत सहित कई अहम मुद्दे केंद्र में रहे। महापंचायत में उपस्थित किसानों ने एकजुट होकर माँग की कि सरकार उनकी आय और उत्पादन लागत के बीच बढ़ते अंतर को तत्काल दूर करे।

मुख्य माँगें और मुद्दे

टिकैत ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि गन्ने के दाम में पर्याप्त बढ़ोतरी नहीं हुई है और उन्होंने माँग रखी कि गन्ने का भाव ₹500 प्रति क्विंटल निर्धारित किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को कम से कम पिछले वर्ष चीनी की बढ़ी हुई कीमतों का लाभ मिलना चाहिए था, जो अब तक नहीं मिला।

बीकेयू प्रवक्ता ने कहा, 'जमीन के सर्किल रेट कम हैं, जबकि बिजली के रेट अधिक हैं।' उन्होंने माँग की कि बिजली की दरें घटाई जाएँ, क्योंकि बढ़ती बिजली लागत किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रही है।

आलू और अन्य फसल उत्पादकों की स्थिति

टिकैत ने आलू उत्पादक किसानों की दुर्दशा का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन उपज का उचित बाज़ार मूल्य नहीं मिल रहा, जिससे आलू किसान घाटे में हैं। उन्होंने खाद की उपलब्धता और उसकी कीमतों पर भी सवाल उठाए।

यह ऐसे समय में आया है जब महँगाई की मार से खाने-पीने की वस्तुओं, कपड़े और रोज़मर्रा की ज़रूरतों के दाम बढ़े हैं, परंतु किसानों की फसल के भाव उसी अनुपात में नहीं बढ़े।

भूमि अधिग्रहण और बाढ़ मुआवजे की माँग

महापंचायत में भूमि अधिग्रहण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। टिकैत ने कहा कि मौजूदा सर्किल रेट बाज़ार मूल्य से बहुत कम हैं, इसलिए अधिग्रहण की स्थिति में किसानों को उनकी जमीन का उचित मूल्य नहीं मिल पाता। उन्होंने सर्किल रेट बढ़ाने की माँग की।

खादर क्षेत्र में बाढ़ से हो रहे नुकसान पर टिकैत ने कहा कि प्रभावित किसानों को तत्काल उचित मुआवजा मिलना चाहिए और सरकार को बाढ़-रोकथाम के लिए बाँध जैसी स्थायी अवसंरचना बनानी चाहिए, न कि हर साल राहत पैकेज पर निर्भर रहना चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों पर चिंता

टिकैत ने दिल्ली में अमेरिका के साथ चल रही व्यापार वार्ता को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते का सीधा असर भारतीय किसानों पर पड़ सकता है और सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसे समझौते किसान-हित के विरुद्ध न जाएँ। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि इन समझौतों से किसानों को लाभ नहीं होगा, तो उनका औचित्य क्या है।

आगे की राह

गौरतलब है कि यह महापंचायत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना-बहुल क्षेत्र में हुई, जहाँ किसान लंबे समय से बकाया भुगतान और उचित मूल्य की माँग कर रहे हैं। बीकेयू ने संकेत दिया है कि यदि सरकार इन माँगों पर ध्यान नहीं देती, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर ठोस नीतिगत बदलाव नहीं आया। ₹500 प्रति क्विंटल की माँग तब तक खोखली लग सकती है जब तक गन्ना बकाये की वसूली का तंत्र मज़बूत न हो, क्योंकि उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों पर किसानों का बकाया हर सीज़न में अरबों रुपये तक पहुँचता रहा है। अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर टिकैत की चिंता नई है और इसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए — कृषि क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन किए बिना किसी भी द्विपक्षीय व्यापार वार्ता को अंतिम रूप देना नीतिगत चूक होगी।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेरठ महापंचायत में राकेश टिकैत ने क्या माँगें उठाईं?
राकेश टिकैत ने गन्ने का भाव ₹500 प्रति क्विंटल करने, बिजली दरें घटाने, भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजा देने और खादर क्षेत्र में बाढ़-प्रभावित किसानों को राहत देने की माँग की। उन्होंने खाद की उपलब्धता और कीमतों पर भी सवाल उठाए।
गन्ना किसानों की मुख्य समस्या क्या है?
गन्ने के भाव में पर्याप्त बढ़ोतरी न होने और बकाया भुगतान में देरी से गन्ना किसान आर्थिक संकट में हैं। टिकैत के अनुसार महँगाई के अनुपात में फसल के दाम नहीं बढ़े, जबकि उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है।
भूमि अधिग्रहण पर किसानों की क्या माँग है?
किसानों की माँग है कि जमीन के सर्किल रेट बढ़ाए जाएँ ताकि अधिग्रहण की स्थिति में उन्हें बाज़ार मूल्य के अनुरूप मुआवजा मिल सके। टिकैत ने कहा कि मौजूदा सर्किल रेट वास्तविक बाज़ार मूल्य से काफी कम हैं।
खादर क्षेत्र में बाढ़ से किसानों को क्या नुकसान हो रहा है?
खादर क्षेत्र में बाढ़ से किसानों की फसल और जमीन को नुकसान पहुँच रहा है। टिकैत ने सरकार से माँग की है कि प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए और बाँध जैसी स्थायी बाढ़-रोकथाम व्यवस्था की जाए।
टिकैत ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर चिंता क्यों जताई?
टिकैत का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों का सीधा असर भारतीय किसानों पर पड़ सकता है। उन्होंने माँग की कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि किसी भी समझौते से भारतीय किसानों के हित प्रभावित न हों।
राष्ट्र प्रेस
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