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एमएसपी गारंटी कानून किसानों की सबसे बड़ी मांग: राकेश टिकैत का नांदेड़ से आह्वान

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एमएसपी गारंटी कानून किसानों की सबसे बड़ी मांग: राकेश टिकैत का नांदेड़ से आह्वान

सारांश

राकेश टिकैत का नांदेड़ दौरा महज़ एक राजनीतिक भ्रमण नहीं था — यह उस गहरे कृषि संकट की याद दिलाता है जो महाराष्ट्र में आत्महत्याओं के रूप में सामने आता है। एमएसपी कानून, अनुचित भूमि मुआवजा और अमेरिका व्यापार समझौते की चिंताएँ — किसानों के सामने एक साथ कई मोर्चे खुले हैं।

मुख्य बातें

राकेश टिकैत ने 4 अगस्त 2026 को नांदेड़ में एमएसपी को कानूनी गारंटी देने की माँग दोहराई।
महाराष्ट्र देश के उन राज्यों में है जहाँ किसान आत्महत्याओं के मामले सर्वाधिक दर्ज होते हैं।
भूमि अधिग्रहण में किसानों को कानूनन सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा मिलना चाहिए, लेकिन कई जगह केवल दो गुना दिया जा रहा है।
अमेरिकी कृषि उत्पादों पर शून्य प्रतिशत और भारतीय उत्पादों पर 18 प्रतिशत शुल्क की स्थिति से भारतीय किसानों को नुकसान की आशंका।
बिजली संशोधन विधेयक , सीड बिल और पेस्टिसाइड बिल को लेकर BKU ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।
किसान संगठन देशभर में जनसंपर्क अभियान चला रहा है; अगले आंदोलन की रणनीति बैठकों के बाद तय होगी।

भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने 4 अगस्त 2026 को नांदेड़ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी गारंटी देने की मांग एक बार फिर दोहराई। उन्होंने कहा कि जब तक फसलों की कीमतों को विधिक संरक्षण नहीं मिलता, तब तक देश का किसान आर्थिक संकट से उबर नहीं सकता। महाराष्ट्र दौरे के दौरान टिकैत ने राज्य में किसान आत्महत्याओं की बढ़ती संख्या पर गहरी चिंता व्यक्त की।

महाराष्ट्र में किसान संकट की तस्वीर

टिकैत के अनुसार, महाराष्ट्र उन राज्यों में शामिल है जहाँ किसान आत्महत्याओं के मामले सर्वाधिक दर्ज होते हैं। उन्होंने कहा कि यहाँ पैदावार घट रही है और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा। BKU का प्रतिनिधिमंडल नांदेड़ के बाद अकोला सहित राज्य के अन्य जिलों में भी किसानों से सीधे संवाद करेगा। टिकैत ने स्पष्ट किया कि यह केवल महाराष्ट्र का नहीं, बल्कि समूचे देश के किसानों का मुद्दा है।

भूमि अधिग्रहण और मुआवजे का विवाद

भूमि अधिग्रहण के मसले पर टिकैत ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि देशभर में तेज़ी से ज़मीनें अधिग्रहित की जा रही हैं, लेकिन किसानों को वैधानिक मुआवजा नहीं मिल रहा। उनके अनुसार, कानूनन किसानों को सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा मिलना चाहिए, जबकि कई स्थानों पर 2013 के सर्किल रेट के आधार पर महज दो गुना देकर ज़मीन ले ली जा रही है। यह कानूनी प्रावधान का खुला उल्लंघन है, टिकैत ने आरोप लगाया।

अमेरिका व्यापार समझौते से किसानों को खतरा

अमेरिका के साथ संभावित व्यापारिक समझौते पर चिंता जताते हुए टिकैत ने कहा कि यदि यह डील लागू हुई और अमेरिकी कृषि उत्पादों पर शून्य प्रतिशत आयात शुल्क रहा, जबकि भारतीय उत्पादों पर 18 प्रतिशत तक शुल्क लगता रहा, तो इसका सीधा नुकसान भारतीय किसानों को होगा। उन्होंने कहा कि अनाज, फल, मेवा और अन्य कृषि उत्पादों की बड़े पैमाने पर आमद से घरेलू बाज़ार चरमरा सकता है।

संसद में लंबित विधेयकों पर आपत्ति

टिकैत ने संसद में लंबित बिजली संशोधन विधेयक, सीड बिल और पेस्टिसाइड बिल पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने याद दिलाया कि दिल्ली किसान आंदोलन के दौरान बिजली संशोधन विधेयक को आगे न बढ़ाने पर सहमति बनी थी, लेकिन अब इसे पुनः सदन के पटल पर लाया गया है। BKU देशभर में जनसंपर्क अभियान चलाकर इन मुद्दों को सरकार और विपक्षी दलों के सामने रख रहा है।

आगामी रणनीति और अन्य मुद्दे

आंदोलन की अगली दिशा पर टिकैत ने कहा कि फिलहाल विभिन्न राज्यों में बैठकों का दौर जारी है और अंतिम निर्णय होने पर उसे सार्वजनिक किया जाएगा। दिल्ली में हुए 'कॉकरोच जनता पार्टी' आंदोलन के समर्थन पर उन्होंने कहा कि यह युवाओं का आंदोलन था और उनके संगठन ने बाहर से पूरा सहयोग दिया। CJP की कथित विदेशी फंडिंग के सवाल पर टिकैत ने कहा कि आंदोलन के दौरान पानी-भोजन जैसी बुनियादी सहायता को विदेशी फंडिंग नहीं कहा जा सकता। किसान संगठन सरकार को लगातार पत्र लिख रहा है और विपक्ष को ज्ञापन देकर इन मुद्दों पर संसद में बहस कराने की माँग कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सरकार की ओर से ठोस कदम अब तक नहीं उठाया गया। महाराष्ट्र में किसान आत्महत्याओं का सिलसिला दशकों पुराना है और हर चुनाव में वादे होते हैं, पर संरचनात्मक बदलाव नदारद रहता है। अमेरिका व्यापार समझौते की चिंता वाजिब है — असममित शुल्क ढाँचा छोटे किसानों के लिए घातक हो सकता है, जिसका आकलन नीति-निर्माता अक्सर नज़रअंदाज़ करते हैं। जब तक एमएसपी, भूमि मुआवजा और व्यापार नीति को एक साथ संबोधित नहीं किया जाता, तब तक ये दौरे और ज्ञापन केवल दबाव की राजनीति बनकर रह जाएंगे।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राकेश टिकैत की एमएसपी गारंटी कानून की मांग क्या है?
टिकैत चाहते हैं कि सरकार एक कानून बनाए जो किसानों को उनकी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी दे, ताकि उन्हें औने-पौने दामों पर उपज न बेचनी पड़े। यह माँग 2020-21 के किसान आंदोलन के समय से प्रमुख रूप से उठाई जा रही है।
महाराष्ट्र में किसान आत्महत्याओं की स्थिति क्यों चिंताजनक है?
महाराष्ट्र उन राज्यों में शुमार है जहाँ किसान आत्महत्याओं के मामले सबसे अधिक दर्ज होते हैं। टिकैत के अनुसार, घटती पैदावार और उपज का उचित मूल्य न मिलना किसानों को आर्थिक तंगी की ओर धकेलता है, जो इन त्रासदियों की मुख्य वजह है।
भूमि अधिग्रहण में किसानों को कानूनन कितना मुआवजा मिलना चाहिए?
कानून के अनुसार किसानों को सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा मिलना चाहिए। टिकैत ने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर 2013 के सर्किल रेट के आधार पर केवल दो गुना देकर ज़मीनें अधिग्रहित की जा रही हैं।
अमेरिका के साथ व्यापार समझौते से भारतीय किसानों पर क्या असर पड़ सकता है?
टिकैत ने आशंका जताई कि यदि अमेरिकी कृषि उत्पादों पर शून्य प्रतिशत आयात शुल्क रहा और भारतीय उत्पादों पर 18 प्रतिशत तक शुल्क लगा, तो सस्ते विदेशी अनाज, फल और मेवे से घरेलू बाज़ार में भारतीय किसानों की प्रतिस्पर्धा क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित होगी।
BKU की आगामी आंदोलन रणनीति क्या है?
फिलहाल विभिन्न राज्यों में बैठकों का दौर जारी है और अंतिम निर्णय होने पर उसे सार्वजनिक किया जाएगा। इसके साथ ही संगठन सरकार को पत्र और विपक्षी दलों को ज्ञापन देकर एमएसपी, भूमि अधिग्रहण और लंबित विधेयकों पर संसद में बहस कराने की माँग कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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