एमएसपी गारंटी कानून किसानों की सबसे बड़ी मांग: राकेश टिकैत का नांदेड़ से आह्वान
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने 4 अगस्त 2026 को नांदेड़ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी गारंटी देने की मांग एक बार फिर दोहराई। उन्होंने कहा कि जब तक फसलों की कीमतों को विधिक संरक्षण नहीं मिलता, तब तक देश का किसान आर्थिक संकट से उबर नहीं सकता। महाराष्ट्र दौरे के दौरान टिकैत ने राज्य में किसान आत्महत्याओं की बढ़ती संख्या पर गहरी चिंता व्यक्त की।
महाराष्ट्र में किसान संकट की तस्वीर
टिकैत के अनुसार, महाराष्ट्र उन राज्यों में शामिल है जहाँ किसान आत्महत्याओं के मामले सर्वाधिक दर्ज होते हैं। उन्होंने कहा कि यहाँ पैदावार घट रही है और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा। BKU का प्रतिनिधिमंडल नांदेड़ के बाद अकोला सहित राज्य के अन्य जिलों में भी किसानों से सीधे संवाद करेगा। टिकैत ने स्पष्ट किया कि यह केवल महाराष्ट्र का नहीं, बल्कि समूचे देश के किसानों का मुद्दा है।
भूमि अधिग्रहण और मुआवजे का विवाद
भूमि अधिग्रहण के मसले पर टिकैत ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि देशभर में तेज़ी से ज़मीनें अधिग्रहित की जा रही हैं, लेकिन किसानों को वैधानिक मुआवजा नहीं मिल रहा। उनके अनुसार, कानूनन किसानों को सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा मिलना चाहिए, जबकि कई स्थानों पर 2013 के सर्किल रेट के आधार पर महज दो गुना देकर ज़मीन ले ली जा रही है। यह कानूनी प्रावधान का खुला उल्लंघन है, टिकैत ने आरोप लगाया।
अमेरिका व्यापार समझौते से किसानों को खतरा
अमेरिका के साथ संभावित व्यापारिक समझौते पर चिंता जताते हुए टिकैत ने कहा कि यदि यह डील लागू हुई और अमेरिकी कृषि उत्पादों पर शून्य प्रतिशत आयात शुल्क रहा, जबकि भारतीय उत्पादों पर 18 प्रतिशत तक शुल्क लगता रहा, तो इसका सीधा नुकसान भारतीय किसानों को होगा। उन्होंने कहा कि अनाज, फल, मेवा और अन्य कृषि उत्पादों की बड़े पैमाने पर आमद से घरेलू बाज़ार चरमरा सकता है।
संसद में लंबित विधेयकों पर आपत्ति
टिकैत ने संसद में लंबित बिजली संशोधन विधेयक, सीड बिल और पेस्टिसाइड बिल पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने याद दिलाया कि दिल्ली किसान आंदोलन के दौरान बिजली संशोधन विधेयक को आगे न बढ़ाने पर सहमति बनी थी, लेकिन अब इसे पुनः सदन के पटल पर लाया गया है। BKU देशभर में जनसंपर्क अभियान चलाकर इन मुद्दों को सरकार और विपक्षी दलों के सामने रख रहा है।
आगामी रणनीति और अन्य मुद्दे
आंदोलन की अगली दिशा पर टिकैत ने कहा कि फिलहाल विभिन्न राज्यों में बैठकों का दौर जारी है और अंतिम निर्णय होने पर उसे सार्वजनिक किया जाएगा। दिल्ली में हुए 'कॉकरोच जनता पार्टी' आंदोलन के समर्थन पर उन्होंने कहा कि यह युवाओं का आंदोलन था और उनके संगठन ने बाहर से पूरा सहयोग दिया। CJP की कथित विदेशी फंडिंग के सवाल पर टिकैत ने कहा कि आंदोलन के दौरान पानी-भोजन जैसी बुनियादी सहायता को विदेशी फंडिंग नहीं कहा जा सकता। किसान संगठन सरकार को लगातार पत्र लिख रहा है और विपक्ष को ज्ञापन देकर इन मुद्दों पर संसद में बहस कराने की माँग कर रहा है।