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महंगाई पर दलजीत सिंह चीमा का केंद्र-राज्य को अल्टीमेटम: पेट्रोल-डीजल पर कर घटाओ

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महंगाई पर दलजीत सिंह चीमा का केंद्र-राज्य को अल्टीमेटम: पेट्रोल-डीजल पर कर घटाओ

सारांश

शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता दलजीत सिंह चीमा ने चंडीगढ़ में केंद्र और पंजाब सरकार दोनों को घेरा — पेट्रोल-डीजल पर कर कटौती, पंजाब में बिगड़ती कानून-व्यवस्था, नशे की महामारी और चुनावी लोकलुभावन वादों पर एक साथ निशाना साधा।

मुख्य बातें

दलजीत सिंह चीमा ने 9 जून को चंडीगढ़ में बढ़ती महंगाई पर केंद्र और राज्य सरकारों से तत्काल राहत की माँग की।
पंजाब में वैट के कारण पेट्रोल-डीजल की कीमतें अत्यधिक हैं; चीमा ने दोनों सरकारों से कर कटौती की अपील की।
पंजाब में पुलिस कार्यालयों, BJP दफ्तरों और मंदिरों पर हमले; कई पुलिसकर्मियों की जान गई।
सीमा पार से हथियारों की तस्करी और बच्चों-लड़कियों तक नशे के फैलाव पर गहरी चिंता।
चीमा ने चुनाव आयोग से माँग की कि बिना वित्तीय आधार वाली लोकलुभावन योजनाओं पर रोक लगाई जाए।

शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता दलजीत सिंह चीमा ने 9 जून को चंडीगढ़ में बढ़ती महंगाई को लेकर केंद्र और राज्य दोनों सरकारों को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस की आसमान छूती कीमतों से देश की आम जनता बेहाल है और अब सरकारों को ठोस राहत देने का वक्त आ गया है।

महंगाई का बोझ और सरकारी मुनाफाखोरी

चीमा ने आरोप लगाया कि जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव चरम पर था, तब सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में मुनाफा कमाने का मौका नहीं छोड़ा। अब जब वैश्विक परिस्थितियाँ अनुकूल हो रही हैं, तो सरकार को चाहिए कि वह जनता पर पड़ रहे आर्थिक बोझ को कम करने के लिए सामने आए। उन्होंने कहा कि चुनावों के दौरान फौरी राहत दी गई थी, लेकिन अब फिर से हालात चुनौतीपूर्ण हो गए हैं।

केंद्र और पंजाब सरकार — दोनों पर निशाना

चीमा ने कहा कि पंजाब में वैट जोड़ने के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतें इतनी अधिक हो चुकी हैं कि मामूली कटौती भी लोगों को बड़ी राहत दे सकती है। उनके अनुसार, केंद्र सरकार जितना कमा रही है, उससे कहीं अधिक राज्य सरकार अपने करों से वसूल रही है। उन्होंने दोनों सरकारों से करों में कटौती की माँग की।

पंजाब में कानून-व्यवस्था की बदहाली

चीमा ने पंजाब की सुरक्षा स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था अब केवल कागजों तक सिमट कर रह गई है। उन्होंने कहा कि लोग अपने घरों में भी सुरक्षित नहीं हैं। पुलिस कार्यालयों, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दफ्तरों और यहाँ तक कि मंदिरों के पास भी हमले हो चुके हैं। इन हमलों में कई पुलिसकर्मियों को अपनी जान गँवानी पड़ी है और कई राजनीतिक दलों के नेता भी निशाने पर आ चुके हैं।

नशे की महामारी और सीमापार हथियारों की तस्करी

चीमा ने राज्य में नशे की बढ़ती समस्या को लेकर भी चेताया। उन्होंने कहा कि पहले यह संकट सिर्फ युवाओं तक सीमित था, लेकिन अब बच्चे और लड़कियाँ भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सीमा पार से बड़े पैमाने पर हथियारों की तस्करी हो रही है। आलोचकों का कहना है कि केंद्र और राज्य — दोनों सरकारें इस पर अंकुश लगाने में नाकाम साबित हो रही हैं, जिससे निवेशक पंजाब से दूरी बना रहे हैं।

चुनावी लोकलुभावन वादों पर चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की माँग

चीमा ने राजनीतिक दलों की ओर से बिना वित्तीय आधार के घोषित जनकल्याणकारी योजनाओं पर भी प्रहार किया। उन्होंने कहा कि कई दल बजट की व्यवहार्यता जाँचे बिना योजनाएँ घोषित कर देते हैं, जो बाद में धरातल पर नहीं उतर पातीं। उनके अनुसार, चुनाव आयोग को सामने आकर ऐसे लोकलुभावन वादों पर रोक लगानी चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में मुफ्त योजनाओं की राजनीति पर बहस तेज हो रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक ठोस और सत्यापन-योग्य दावा है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है। पंजाब में कानून-व्यवस्था और नशे की समस्या पर उनकी चिंता नई नहीं है, लेकिन निवेशकों के पलायन का संदर्भ जोड़ना आर्थिक नुकसान की एक परत उजागर करता है। चुनाव आयोग को लोकलुभावन वादों पर लगाम लगाने की माँग साहसिक है — यह देखना होगा कि क्या उनकी अपनी पार्टी भी इस कसौटी पर खरी उतरती है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दलजीत सिंह चीमा ने महंगाई पर क्या कहा?
चीमा ने कहा कि पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस की बढ़ती कीमतों से आम जनता परेशान है और केंद्र व राज्य दोनों सरकारों को तत्काल कर कटौती करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान दी गई राहत अब खत्म हो चुकी है।
पंजाब में पेट्रोल-डीजल इतना महँगा क्यों है?
चीमा के अनुसार, पंजाब में वैट जोड़ने के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतें बेहद ऊँची हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केंद्र से भी अधिक कर वसूल रही है और मामूली कटौती से भी लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है।
पंजाब की कानून-व्यवस्था को लेकर चीमा ने क्या चिंता जताई?
चीमा ने कहा कि पंजाब में पुलिस कार्यालयों, BJP दफ्तरों और मंदिरों तक पर हमले हो चुके हैं और कई पुलिसकर्मियों की जान जा चुकी है। उनके अनुसार, बिगड़ती सुरक्षा स्थिति के कारण निवेशक राज्य में आने से परहेज कर रहे हैं।
चीमा ने चुनाव आयोग से क्या माँग की?
चीमा ने माँग की कि चुनाव आयोग को राजनीतिक दलों को बिना वित्तीय आधार के लोकलुभावन योजनाएँ घोषित करने से रोकना चाहिए। उनका कहना है कि ऐसी योजनाएँ बाद में धरातल पर नहीं उतर पातीं क्योंकि उनके लिए बजट ही नहीं होता।
पंजाब में नशे की समस्या कितनी गंभीर है?
चीमा के अनुसार, नशे की समस्या अब सिर्फ युवाओं तक सीमित नहीं रही — बच्चे और लड़कियाँ भी इसकी चपेट में हैं। साथ ही, सीमा पार से बड़े पैमाने पर हथियारों की तस्करी भी हो रही है और केंद्र व राज्य दोनों सरकारें इस पर अंकुश लगाने में नाकाम बताई जा रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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