पंजाब में ईंधन पर स्टेट टैक्स घटाए भगवंत मान सरकार, किसानों को राहत दे: भाजपा की माँग

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पंजाब में ईंधन पर स्टेट टैक्स घटाए भगवंत मान सरकार, किसानों को राहत दे: भाजपा की माँग

सारांश

भाजपा ने पंजाब की AAP सरकार पर निशाना साधा है — माँग है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान केंद्र की तर्ज पर पेट्रोल-डीजल पर राज्य कर घटाएँ और ₹3 प्रति लीटर की वृद्धि का बोझ खुद वहन करें, ताकि बुवाई सीजन में किसानों को राहत मिल सके।

मुख्य बातें

भाजपा महासचिव अनिल सरीन ने 16 मई को चंडीगढ़ में माँग की कि पंजाब सरकार पेट्रोल-डीजल पर ₹3 प्रति लीटर का राज्य कर कम करे।
केंद्र सरकार ने 27 मार्च को ईंधन पर ₹10 प्रति लीटर की कटौती की थी — भाजपा ने इसे आदर्श उदाहरण बताया।
भाजपा के अनुसार, मार्च 2022 के बाद AAP सरकार ने राज्य कर बढ़ाए, जिससे उपभोक्ताओं पर लगभग ₹3 प्रति लीटर का अतिरिक्त बोझ पड़ा।
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें $70 से बढ़कर $120–130 प्रति बैरल हुईं; भारत में ईंधन वृद्धि केवल लगभग 3% रही।
बुवाई सीजन में किसानों की डीजल पर निर्भरता को देखते हुए भाजपा ने तत्काल राहत की माँग की।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पंजाब इकाई ने शनिवार, 16 मई को माँग की कि मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार पेट्रोल और डीजल पर राज्य कर में कटौती करे, ताकि बुवाई के मौसम में किसानों और आम नागरिकों को ₹3 प्रति लीटर की अतिरिक्त मूल्य वृद्धि का बोझ न उठाना पड़े। पार्टी ने केंद्र सरकार द्वारा 27 मार्च को की गई ₹10 प्रति लीटर की कटौती को उदाहरण के रूप में पेश किया।

भाजपा की मुख्य माँग

भाजपा महासचिव अनिल सरीन ने पार्टी के राज्य मीडिया प्रमुख विनीत जोशी की उपस्थिति में चंडीगढ़ में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने जिस प्रकार ईंधन की बढ़ती कीमतों का बोझ स्वयं वहन किया, उसी तर्ज पर राज्य सरकार को भी ₹3 प्रति लीटर की वृद्धि का भार अपने कोष से उठाना चाहिए।

सरीन ने तर्क दिया कि यह कदम विशेष रूप से इसलिए ज़रूरी है क्योंकि अभी बुवाई का महत्वपूर्ण मौसम चल रहा है और किसान पहले से ही आर्थिक दबाव में हैं।

केंद्र बनाम राज्य: कर नीति का अंतर

सरीन के अनुसार, केंद्र की भाजपा सरकार ने अप्रैल 2022 से चार वर्षों से अधिक समय तक पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाईं — यह निर्णय रूस-यूक्रेन युद्ध और अन्य अंतरराष्ट्रीय दबावों के बावजूद लिया गया।

इसके विपरीत, उन्होंने आरोप लगाया कि मार्च 2022 के बाद पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार ने राज्य कर में बढ़ोतरी की, जिससे आम उपभोक्ता पर लगभग ₹3 प्रति लीटर का अतिरिक्त बोझ पड़ा।

अंतरराष्ट्रीय संदर्भ

सरीन ने वैश्विक ईंधन मूल्य वृद्धि का हवाला देते हुए कहा कि मौजूदा युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण कच्चे तेल की कीमतें लगभग $70 प्रति बैरल से बढ़कर $120–130 प्रति बैरल तक पहुँच गई हैं।

उन्होंने तुलनात्मक आँकड़े पेश किए — अमेरिका में ईंधन कीमतें लगभग 50%, यूरोप में 20%, पाकिस्तान में 60% और बांग्लादेश में 16% बढ़ीं, जबकि भारत में यह वृद्धि केवल लगभग 3% रही। भाजपा ने इसे केंद्र सरकार की नीति की सफलता के रूप में प्रस्तुत किया।

आम जनता और किसानों पर असर

बुवाई के मौसम में ट्रैक्टर और सिंचाई पंपों के लिए डीजल की खपत बढ़ जाती है, जिससे ईंधन की कीमतें सीधे किसानों की लागत को प्रभावित करती हैं। भाजपा का कहना है कि राज्य कर में कटौती से न केवल कृषि लागत घटेगी, बल्कि परिवहन और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।

आगे क्या

भाजपा ने मुख्यमंत्री मान से औपचारिक रूप से आग्रह किया है कि वे केंद्र के उदाहरण का अनुसरण करते हुए राज्य करों में तत्काल कमी करें। अब यह देखना होगा कि AAP सरकार इस माँग पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या बुवाई सीजन से पहले कोई राहत घोषित की जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक असुविधाजनक तथ्य छुपा है — केंद्र सरकार ने स्वयं वर्षों तक ईंधन पर भारी उत्पाद शुल्क बनाए रखा, जो राज्यों के VAT से कहीं अधिक था। ₹10 प्रति लीटर की कटौती उस संचित अधिभार की आंशिक वापसी थी, न कि कोई असाधारण उदारता। दूसरी ओर, AAP सरकार पर राज्य कर बढ़ाने का आरोप तथ्यात्मक जाँच की माँग करता है — पंजाब की वित्तीय स्थिति और राजस्व दबाव को नज़रअंदाज़ करके केवल तुलना करना अधूरा विश्लेषण है। असली सवाल यह है कि क्या केंद्र और राज्य मिलकर किसानों के लिए एक समन्वित राहत तंत्र बना सकते हैं, या यह मुद्दा चुनावी बयानबाज़ी तक सीमित रहेगा।
RashtraPress
17 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भाजपा ने पंजाब सरकार से ईंधन पर कितनी कर कटौती की माँग की है?
भाजपा ने माँग की है कि पंजाब सरकार पेट्रोल और डीजल पर ₹3 प्रति लीटर की राज्य कर कटौती करे, जिससे हाल की मूल्य वृद्धि का बोझ उपभोक्ताओं पर न पड़े। यह माँग विशेष रूप से बुवाई सीजन में किसानों को राहत देने के उद्देश्य से की गई है।
केंद्र सरकार ने ईंधन पर कब और कितनी कटौती की थी?
केंद्र सरकार ने 27 मार्च को पेट्रोल और डीजल पर ₹10 प्रति लीटर की दर से कर कम किया था। भाजपा ने इसी कदम को उदाहरण के रूप में पेश करते हुए पंजाब सरकार से भी इसी तर्ज पर राज्य कर घटाने की अपील की है।
पंजाब में AAP सरकार पर भाजपा का क्या आरोप है?
भाजपा महासचिव अनिल सरीन के अनुसार, मार्च 2022 के बाद AAP सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर राज्य कर में बढ़ोतरी की, जिससे उपभोक्ताओं पर लगभग ₹3 प्रति लीटर का अतिरिक्त बोझ पड़ा। भाजपा ने इसे केंद्र की नीति के विपरीत बताया।
वैश्विक ईंधन कीमतों में कितनी वृद्धि हुई और भारत पर क्या असर पड़ा?
भाजपा के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतें लगभग $70 प्रति बैरल से बढ़कर $120–130 प्रति बैरल हो गई हैं। इसके बावजूद भारत में ईंधन कीमतें केवल लगभग 3% बढ़ीं, जबकि अमेरिका में 50%, पाकिस्तान में 60% और यूरोप में 20% की वृद्धि हुई।
किसानों पर ईंधन की कीमतों का क्या असर पड़ता है?
बुवाई सीजन में किसान ट्रैक्टर और सिंचाई पंपों के लिए डीजल पर बड़े पैमाने पर निर्भर रहते हैं, इसलिए ईंधन की ऊँची कीमतें सीधे कृषि लागत बढ़ाती हैं। भाजपा का तर्क है कि राज्य कर में कटौती से किसानों की जेब पर पड़ने वाला यह बोझ कम किया जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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