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भगवद्गीता: PM मोदी की 'गिफ्ट डिप्लोमेसी' का सबसे खास हथियार, 2014 से दर्जनों राष्ट्राध्यक्षों को भेंट

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भगवद्गीता: PM मोदी की 'गिफ्ट डिप्लोमेसी' का सबसे खास हथियार, 2014 से दर्जनों राष्ट्राध्यक्षों को भेंट

सारांश

मेलोनी को 'मेलोडी' टॉफी चर्चा में रही, लेकिन मोदी की असली सांस्कृतिक कूटनीति की धुरी 2014 से 'श्रीमद्भगवद्गीता' है — ओबामा, आबे, पुतिन, सभी को उनकी अपनी भाषा में। यह महज उपहार नहीं, भारतीय सभ्यता का कूटनीतिक संदेश है।

मुख्य बातें

PM मोदी की 'गिफ्ट डिप्लोमेसी' में श्रीमद्भगवद्गीता 2014 से केंद्रीय भूमिका में है।
2014 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को व्हाइट हाउस में महात्मा गांधी द्वारा लिखित गीता की प्रति भेंट की गई।
जापान यात्रा में सम्राट अकिहितो और शिंजो आबे को जापानी भाषा में लिखी गीता दी गई।
दिसंबर 2025 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को रूसी भाषा में लिखी गीता की प्रति भेंट की गई।
हर बार गीता की प्रति संबंधित राष्ट्राध्यक्ष के देश की भाषा में होती है — यह मोदी की कूटनीतिक संवेदनशीलता की पहचान है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति में कूटनीतिक वार्ताओं के साथ-साथ उनकी 'गिफ्ट डिप्लोमेसी' भी वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बनती रही है। हाल ही में रोम यात्रा के दौरान उन्होंने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को पार्ले की 'मेलोडी' टॉफी भेंट कर सुर्खियाँ बटोरीं। लेकिन इस चर्चित उपहार से परे, मोदी की 'सांस्कृतिक कूटनीति' की असली पहचान 'श्रीमद्भगवद्गीता' है — जिसे वे 2014 से लगातार विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों को उनकी अपनी भाषा में भेंट करते आए हैं।

गीता — सांस्कृतिक कूटनीति की धुरी

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की सांस्कृतिक विरासत को उपहारों के माध्यम से वैश्विक नेताओं तक पहुँचाने की एक सुनियोजित परंपरा स्थापित की है। इस परंपरा में श्रीमद्भगवद्गीता सर्वाधिक प्रमुख रही है। इसकी सबसे उल्लेखनीय विशेषता यह है कि मोदी ने जिस भी राष्ट्राध्यक्ष को गीता भेंट की, वह प्रति उसी देश की भाषा में लिखी हुई थी — यह कूटनीतिक संवेदनशीलता और सांस्कृतिक सम्मान का प्रतीक है।

ओबामा से आबे तक: गीता-भेंट का सिलसिला

2014 में प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद अपनी पहली अमेरिका यात्रा में मोदी ने तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा को व्हाइट हाउस में आयोजित रात्रिभोज के दौरान महात्मा गांधी द्वारा लिखित गीता की एक प्रति उपहार में दी। यह भेंट भारत-अमेरिका संबंधों में एक नए सांस्कृतिक अध्याय की शुरुआत मानी गई।

उसी वर्ष जापान दौरे पर प्रधानमंत्री मोदी सम्राट अकिहितो और तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे के लिए जापानी भाषा में लिखी गीता की प्रतियाँ लेकर गए। यह कदम जापान-भारत सांस्कृतिक निकटता का प्रतीक बना।

पुतिन को रूसी भाषा में गीता

दिसंबर 2025 में जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत आए, तब भी प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें रूसी भाषा में लिखी गीता की एक प्रति भेंट की। इस अवसर पर मोदी ने कहा, 'गीता के उपदेश विश्व भर के लाखों लोगों को प्रेरणा देते हैं।' यह भेंट भारत-रूस संबंधों की ऐतिहासिक गहराई को रेखांकित करती है।

गीता को लेकर मोदी का दर्शन

प्रधानमंत्री मोदी ने एक कार्यक्रम में कहा था, 'भगवद्गीता सिखाती है कि शांति और सत्य बनाए रखने के लिए अन्याय की शक्तियों का सामना करना और उन्हें समाप्त करना आवश्यक हो सकता है, और यही सिद्धांत राष्ट्र की सुरक्षा के दृष्टिकोण में केंद्रित है।' वे मानते हैं कि गीता के संदेश न केवल व्यक्तिगत मार्गदर्शन देते हैं, बल्कि राष्ट्र की नीतियों की दिशा भी तय करते हैं।

आगे की राह: सांस्कृतिक कूटनीति का विस्तार

गौरतलब है कि मोदी की यह 'सांस्कृतिक कूटनीति' केवल गीता तक सीमित नहीं है — वे भारत की हस्तशिल्प विरासत, पारंपरिक कलाकृतियाँ और क्षेत्रीय उत्पाद भी विदेशी नेताओं को भेंट करते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के उपहार कूटनीतिक संवाद में एक अतिरिक्त भावनात्मक और सांस्कृतिक परत जोड़ते हैं, जो औपचारिक वार्ताओं से परे जाकर संबंधों को व्यक्तिगत स्तर पर मजबूत करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि वास्तविक द्विपक्षीय संवाद का हिस्सा है। हालाँकि आलोचक यह भी पूछते हैं कि क्या धार्मिक ग्रंथ को राजकीय उपहार बनाना धर्मनिरपेक्ष कूटनीति की मर्यादाओं के अनुकूल है। यह बहस जारी रहेगी, लेकिन यह भी सच है कि इस 'गीता कूटनीति' ने भारत को वैश्विक मंच पर एक सांस्कृतिक महाशक्ति के रूप में स्थापित करने में भूमिका निभाई है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी की 'गिफ्ट डिप्लोमेसी' में भगवद्गीता क्यों खास है?
PM मोदी 2014 से विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों को उनकी अपनी देश की भाषा में लिखी श्रीमद्भगवद्गीता भेंट करते आए हैं, जो भारत की सांस्कृतिक कूटनीति का सबसे प्रमुख प्रतीक बन गई है। यह उपहार औपचारिक कूटनीति से परे जाकर सभ्यतागत संवाद स्थापित करता है।
मोदी ने किन-किन राष्ट्राध्यक्षों को गीता भेंट की है?
अब तक मोदी ने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा, जापान के सम्राट अकिहितो, प्रधानमंत्री शिंजो आबे और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को गीता भेंट की है। हर प्रति संबंधित देश की भाषा में तैयार की गई थी।
मोदी ने इटली की PM मेलोनी को क्या गिफ्ट दिया?
रोम यात्रा के दौरान PM मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को पार्ले की 'मेलोडी' टॉफी भेंट की, जो व्यापक रूप से चर्चित रही। यह उपहार उनकी 'गिफ्ट डिप्लोमेसी' के हल्के-फुल्के पहलू को दर्शाता है।
पुतिन को गीता कब और किस भाषा में दी गई?
दिसंबर 2025 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान PM मोदी ने उन्हें रूसी भाषा में लिखी गीता की एक प्रति भेंट की। इस अवसर पर मोदी ने कहा कि 'गीता के उपदेश विश्व भर के लाखों लोगों को प्रेरणा देते हैं।'
मोदी की सांस्कृतिक कूटनीति का उद्देश्य क्या है?
मोदी मानते हैं कि गीता के संदेश व्यक्तिगत मार्गदर्शन के साथ-साथ राष्ट्र की नीतियों की दिशा भी तय करते हैं। उनकी सांस्कृतिक कूटनीति भारत की सभ्यतागत विरासत को वैश्विक नेताओं तक पहुँचाकर 'सॉफ्ट पावर' को मजबूत करने का प्रयास है।
राष्ट्र प्रेस
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