15 सितंबर 2026
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बिहार बाढ़: अदाणी फाउंडेशन के 'मिशन राहत' से 2,000+ परिवारों को राहत, CM ने ₹579 करोड़ DBT से जारी किए

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बिहार बाढ़: अदाणी फाउंडेशन के 'मिशन राहत' से 2,000+ परिवारों को राहत, CM ने ₹579 करोड़ DBT से जारी किए

सारांश

गंगा के उफान से बिहार के 50 लाख लोग प्रभावित — लेकिन इस बार राहत का मॉडल दोहरा है। एक तरफ अदाणी फाउंडेशन का 'मिशन राहत' घर-घर पहुँच रहा है, दूसरी तरफ CM सम्राट चौधरी ने ₹579.23 करोड़ सीधे बैंक खातों में भेजे। सवाल यह है कि क्या यह गति हर प्रभावित परिवार तक समय पर पहुँचेगी।

मुख्य बातें

अदाणी फाउंडेशन का 'मिशन राहत' कार्यक्रम बिहार के पीरपैंती प्रखंड में 2,000 से अधिक बाढ़ पीड़ित परिवारों तक तिरपाल, टॉर्च और पशु चारा पहुँचा चुका है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 8,27,472 परिवारों के खातों में DBT से ₹579.23 करोड़ जारी किए; प्रत्येक परिवार को ₹7,000 की सहायता।
बिहार के 15 जिले , 88 प्रखंड , 2,642 गाँव और 21 शहरों के 136 वार्ड बाढ़ से प्रभावित; करीब 50 लाख लोग चपेट में।
लगभग 55,000 हेक्टेयर कृषि भूमि पर बाढ़ का असर, फसलों को भारी नुकसान।
1,200 से अधिक सामुदायिक रसोइयों से अब तक करीब 1.28 करोड़ थालियाँ परोसी जा चुकी हैं।
CM ने निर्देश दिया — सूची से छूटे पात्र परिवार को एक सप्ताह के भीतर राहत सूची में शामिल किया जाए।

बिहार के पीरपैंती प्रखंड में गंगा नदी के बढ़े जलस्तर से प्रभावित परिवारों की मदद के लिए अदाणी फाउंडेशन का 'मिशन राहत' कार्यक्रम 15 सितंबर 2026 को सक्रिय रूप से संचालित हो रहा है। अब तक फाउंडेशन की टीम 2,000 से अधिक बाढ़ पीड़ित परिवारों तक पहुँचकर तिरपाल, टॉर्च और मवेशियों के लिए चारा उपलब्ध करा चुकी है।

मिशन राहत: ज़मीन पर क्या हो रहा है

अदाणी फाउंडेशन की टीम पीरपैंती के प्रभावित गाँवों में घर-घर जाकर राहत सामग्री वितरित कर रही है। फाउंडेशन के अनुसार, प्रत्येक परिवार को तत्काल आवश्यकता की वस्तुएँ — तिरपाल, टॉर्च और पशुओं के लिए चारा — दी जा रही हैं।

टीम द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरंतर सर्वेक्षण किया जा रहा है, ताकि जरूरतमंद परिवार सहायता से वंचित न रहें। फाउंडेशन का कहना है कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल तत्काल राहत देना है, बल्कि संकट की इस घड़ी में पीड़ितों के साथ खड़े रहना भी है।

सरकार की प्रतिक्रिया: CM ने ₹579.23 करोड़ DBT से जारी किए

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को बाढ़ प्रभावित 8 लाख 27 हजार 472 परिवारों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से ₹579.23 करोड़ की आनुग्रहिक राहत राशि अंतरित करने की प्रक्रिया आरंभ की। प्रत्येक प्रभावित परिवार को ₹7,000 की सहायता प्रदान की गई।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि कोई भी पात्र परिवार राहत से वंचित न रहे, और यदि कोई परिवार सूची से छूट गया हो, तो उसे एक सप्ताह के भीतर सूची में शामिल किया जाए। उन्होंने कहा, 'बाढ़ की चुनौतीपूर्ण स्थिति में राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत, सहायता और सुरक्षा उपलब्ध कराना है।'

बाढ़ की विभीषिका: 50 लाख लोग प्रभावित

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के अनुसार, बिहार के 15 जिले, 88 प्रखंड, 575 ग्राम पंचायतें और 2,642 गाँव तथा 21 शहरों के 136 वार्ड इस बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। कुल मिलाकर करीब 50 लाख लोग बाढ़ की चपेट में आए हैं, जबकि लगभग 55,000 हेक्टेयर कृषि भूमि पर भी बाढ़ का असर पड़ा है, जिससे फसलों को गंभीर नुकसान हुआ है।

यह ऐसे समय में आया है जब बिहार हर वर्ष मानसून के दौरान गंगा और उसकी सहायक नदियों के उफान से त्रस्त रहता है। गौरतलब है कि पिछले वर्षों में भी इसी क्षेत्र में बाढ़ से भारी नुकसान हुआ था, लेकिन इस बार DBT के ज़रिये सीधी राहत का दायरा व्यापक रखा गया है।

सामुदायिक रसोई और राहत व्यवस्था

प्रभावित क्षेत्रों में भोजन की आपूर्ति बनाए रखने के लिए 1,200 से अधिक सामुदायिक रसोइयाँ संचालित की जा रही हैं, जिनके माध्यम से अब तक करीब 1.28 करोड़ थालियाँ परोसी जा चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि प्रभावित क्षेत्रों में भोजन, पेयजल, दवाइयाँ और अन्य आवश्यक सुविधाएँ निर्बाध रूप से उपलब्ध कराई जाएँ।

आगे की राह

अदाणी फाउंडेशन के 'मिशन राहत' कार्यक्रम के तहत प्रभावित क्षेत्रों का सर्वेक्षण जारी रहेगा और जरूरत के अनुसार राहत सामग्री का वितरण बढ़ाया जाएगा। राज्य सरकार ने भी अधिकारियों को सतर्क रहने और किसी भी पात्र परिवार को सूची से बाहर न रखने के निर्देश दिए हैं। जल-स्तर में उतार-चढ़ाव को देखते हुए राहत एवं बचाव अभियान आगामी दिनों में भी जारी रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

परंतु ₹7,000 प्रति परिवार उस नुकसान के सामने अपर्याप्त है जो 55,000 हेक्टेयर फसल बर्बाद होने से होता है। निजी फाउंडेशन की भागीदारी तत्काल राहत में कारगर है, लेकिन यह राज्य की स्थायी बाढ़-प्रबंधन विफलता को ढकने का काम नहीं कर सकती। असली जवाबदेही यह है कि गंगा तटबंध रखरखाव और अग्रिम चेतावनी प्रणाली पर वर्षों से बजट खर्च होने के बावजूद 50 लाख लोग हर बार क्यों विस्थापित होते हैं।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अदाणी फाउंडेशन का 'मिशन राहत' क्या है?
'मिशन राहत' अदाणी फाउंडेशन का बाढ़ सहायता कार्यक्रम है, जो बिहार के पीरपैंती प्रखंड में गंगा बाढ़ से प्रभावित परिवारों को घर-घर जाकर राहत सामग्री उपलब्ध करा रहा है। अब तक 2,000 से अधिक परिवारों को तिरपाल, टॉर्च और पशु चारा दिया जा चुका है।
बिहार में बाढ़ से कितने लोग प्रभावित हुए हैं?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के अनुसार, बिहार में इस बाढ़ से करीब 50 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। 15 जिलों के 88 प्रखंड, 2,642 गाँव और 21 शहरों के 136 वार्ड चपेट में आए हैं, जबकि लगभग 55,000 हेक्टेयर कृषि भूमि को नुकसान पहुँचा है।
बिहार सरकार ने बाढ़ पीड़ितों को कितनी राहत राशि दी है?
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 8 लाख 27 हजार 472 प्रभावित परिवारों के बैंक खातों में DBT के माध्यम से ₹579.23 करोड़ की राशि अंतरित की है। प्रत्येक परिवार को ₹7,000 की आनुग्रहिक सहायता दी गई है।
क्या बाढ़ पीड़ितों के लिए भोजन की व्यवस्था है?
हाँ, राज्य सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में 1,200 से अधिक सामुदायिक रसोइयाँ चलाई हैं, जिनके माध्यम से अब तक करीब 1.28 करोड़ थालियाँ परोसी जा चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को भोजन, पेयजल और दवाओं की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
यदि कोई पात्र परिवार राहत सूची से छूट गया हो तो क्या होगा?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सूची से छूटे किसी भी पात्र परिवार को एक सप्ताह के भीतर राहत सूची में शामिल किया जाए। कोई भी योग्य प्रभावित परिवार सरकारी सहायता से वंचित न रहे, यह सुनिश्चित करना अधिकारियों की जिम्मेदारी बताई गई है।
राष्ट्र प्रेस
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