PM मोदी ने एंडी बर्नहैम को UK PM बनने पर दी बधाई, रक्षा-तकनीक-व्यापार में साझेदारी पर बनी सहमति
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 जुलाई 2026 को यूनाइटेड किंगडम के नवनियुक्त प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम से टेलीफोन पर बातचीत कर उन्हें पद संभालने पर बधाई दी और सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएँ दीं। इस वार्ता में दोनों नेताओं ने भारत-यूके व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने के संकल्प के साथ कई अहम क्षेत्रों में मिलकर काम करने पर सहमति जताई।
किन क्षेत्रों में बनी सहमति
दोनों नेताओं ने तकनीक, नवाचार, रक्षा, सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, शिक्षा और लोगों के बीच आपसी संपर्क जैसे व्यापक क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। यह वार्ता ऐसे समय में हुई जब दोनों देशों के बीच हाल ही में भारत-यूके कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) लागू हुआ है, जिससे व्यापार और निवेश के नए रास्ते खुले हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम से बात करके खुशी हुई। उन्हें यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री का पद संभालने पर बधाई दी और उनके सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएँ दीं।'
भारत-यूके व्यापार समझौते का महत्व
मोदी ने स्पष्ट किया कि दोनों देश मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि CETA से मिलने वाले व्यापार और निवेश के अवसरों का पूरा लाभ उठाया जाए। उनके अनुसार, यह समझौता दोनों देशों के नागरिकों की समृद्धि और जीवनस्तर सुधारने में सहायक होगा। गौरतलब है कि यह व्यापार समझौता वर्षों की बातचीत के बाद हाल ही में लागू हुआ है और इसे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
एंडी बर्नहैम कैसे बने UK के PM
पूर्व प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने 22 जून को लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफे का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि नए नेता के चुने जाने तक वे प्रधानमंत्री पद पर बने रहेंगे। औपचारिक प्रक्रिया के तहत एंडी बर्नहैम को लेबर पार्टी के 379 सांसदों का समर्थन मिला और वे तय संख्या तक पहुँचने वाले एकमात्र उम्मीदवार रहे, जिससे उनका पार्टी नेता और प्रधानमंत्री बनना सुनिश्चित हो गया।
बर्नहैम का पहला संबोधन
पदभार संभालने के बाद अपने पहले संबोधन में बर्नहैम ने देश में राजनीतिक स्थिरता बहाल करने और शासन व्यवस्था में व्यापक सुधार लाने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में बार-बार प्रधानमंत्री बदलने से जनता का राजनीति पर भरोसा कमज़ोर हुआ है और अब नेताओं को बेहतर प्रदर्शन करना होगा।
आगे की राह
भारत और यूके के बीच यह नई नेतृत्व-स्तरीय बातचीत द्विपक्षीय संबंधों को एक नई दिशा देने का संकेत है। CETA के लागू होने और रक्षा-तकनीक सहयोग पर सहमति के साथ, दोनों देशों के बीच आने वाले महीनों में ठोस कदम उठाए जाने की संभावना है।