भारत-यूके सीईटीए लागू: PM मोदी बोले — आर्थिक संबंध और गहरे होंगे, किसानों-MSME को मिलेगा बड़ा फायदा
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार, 15 जुलाई को कहा कि भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) दोनों देशों की साझेदारी में एक ऐतिहासिक पड़ाव है, जो द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को नई गहराई देगा। उन्होंने यह टिप्पणी एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की पोस्ट को कोट करते हुए की, जिसमें सीईटीए के लागू होने की घोषणा की गई थी।
PM मोदी ने क्या कहा
मोदी ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'यह भारत-यूनाइटेड किंगडम साझेदारी में एक महत्वपूर्ण क्षण है। सीईटीए और 'सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट' के लागू होने से हमारे आर्थिक संबंध और भी गहरे होंगे। ये समझौते मिलकर हमारी साझा महत्वाकांक्षाओं को हमारे लोगों के लिए ठोस अवसरों में बदलेंगे।'
उन्होंने आगे कहा कि इस समझौते से किसानों, उद्यमियों और एमएसएमई को नई गति मिलेगी तथा टेक्नोलॉजी, प्रोफेशनल सेवाओं और इनोवेशन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ेगा। साथ ही, कुशल भारतीय प्रतिभाओं की यूके में आवाजाही को भी बढ़ावा मिलेगा।
सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट का महत्व
PM मोदी ने स्पष्ट किया कि सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट विशेष रूप से उन भारतीय पेशेवरों के लिए राहत लेकर आएगा जो यूके में अस्थायी रूप से कार्यरत हैं। इससे भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। गौरतलब है कि यह समझौता वर्षों की वार्ता के बाद अंततः लागू हुआ है।
निर्यात को मिलेगी जीरो-ड्यूटी एक्सेस
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि यह समझौता दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में मील का पत्थर है। उनके अनुसार, इससे भारत के करीब 99 प्रतिशत निर्यात को यूके में जीरो-ड्यूटी एक्सेस मिलेगी, जो भारत की 100 प्रतिशत ट्रेड वैल्यू को कवर करती है।
गोयल ने यह भी रेखांकित किया कि इस व्यापार समझौते से कपड़ा, चमड़ा, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, समुद्री उत्पाद, केमिकल और प्रोसेस्ड फूड जैसे प्रमुख क्षेत्रों को यूके के बाजार में बड़े निर्यात अवसर मिलेंगे। इसके साथ ही एमएसएमई, किसानों और मैन्युफैक्चरर्स को भी सीधा लाभ पहुँचेगा।
भविष्य की साझेदारी की नींव
मोदी ने इस अवसर को दोनों लोकतंत्रों के बीच भरोसे और व्यापार, टेक्नोलॉजी, निवेश और इनोवेशन पर आधारित भविष्योन्मुखी साझेदारी का प्रतीक बताया। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार तनावों के बीच भारत अपने निर्यात बाजारों में विविधता लाने पर जोर दे रहा है। भारत और यूके के बीच यह समझौता दोनों देशों की साझा समृद्धि की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।