मोहन भागवत के 'जेन जी संवाद' पर बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी बोले — युवाओं से सीधे संवाद का स्वागत
सारांश
मुख्य बातें
बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने 6 अगस्त 2026 को पटना में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत के 'जेन जी संवाद' कार्यक्रम को 'स्वागत योग्य कदम' करार दिया। सरावगी ने कहा कि युवाओं और छात्रों से सीधे संवाद की यह पहल देश के लिए आवश्यक है।
जेन जी संवाद पर सरावगी का स्वागत
सरावगी ने कहा, 'सरसंघचालक जी ने कहा है कि छात्रों से सीधा संवाद होना चाहिए। आपने देखा, पूरे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने भी सीधे वीडियो संदेश के माध्यम से नौजवानों और छात्रों से संवाद किया था। अब सरसंघचालक भी कह रहे हैं। यह स्वागत योग्य कदम है। यह होना चाहिए।' उन्होंने इस पहल को युवा पीढ़ी से जुड़ाव की दिशा में एक सकारात्मक संकेत बताया।
एफसीआरए विधेयक पर भाजपा का रुख
बिहार भाजपा अध्यक्ष ने विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक — जिसे एफसीआरए बिल कहा जा रहा है — को देशहित में बताते हुए इसे शीघ्र पारित कराने की वकालत की। सरावगी ने कहा, 'यह कई सालों से लटका हुआ है। धर्मांतरण के लिए विदेशी पैसे से प्रोत्साहन दिया जाता था, जो देशहित में नहीं है। विदेशी शक्तियाँ पैसा देकर यहाँ देश-विरोधी काम कराती थीं, जिसके कारण यह विधेयक अत्यंत महत्वपूर्ण है।' उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस विधेयक को पारित कराने की दिशा में सक्रिय है।
मेटा और जुकरबर्ग की माफी पर प्रतिक्रिया
मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग की ओर से माफी मांगे जाने पर सरावगी ने कहा कि यह घटना 'घोर निंदनीय और आपत्तिजनक' थी। उन्होंने कहा, 'देश के प्रधानमंत्री का वीडियो कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया। मेटा के मालिक ने लिखित रूप से माफी माँगी है और बताया है कि किस प्रकार पैसे लेकर कुछ कंटेंट को अधिक प्रचारित किया गया।' सरावगी ने मेटा को बुलाकर पूरी जानकारी साझा किए जाने की बात भी कही।
बंगाल में लाउडस्पीकर कार्रवाई पर टिप्पणी
पश्चिम बंगाल में मस्जिदों सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाए जाने के मुद्दे पर सरावगी ने कहा कि यह कार्रवाई ध्वनि प्रदूषण बोर्ड ने समान रूप से सभी धार्मिक स्थलों पर की है। उन्होंने कहा, 'तेज़ आवाज़ के कारण बुजुर्गों और छात्रों को भारी कठिनाई होती थी। मंदिर, मस्जिद और अन्य सभी धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाए गए हैं।' उन्होंने पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर आरोप लगाया कि तुष्टिकरण की नीति के चलते पहले यह कार्रवाई नहीं हो पाई थी।
आगे क्या
सरावगी के इन बयानों से स्पष्ट है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) एफसीआरए विधेयक को संसद में प्राथमिकता के साथ पारित कराने की रणनीति पर काम कर रही है। साथ ही, संघ और भाजपा की युवा-केंद्रित संवाद पहल आगामी चुनावी मौसम में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।