8 नवंबर 2026
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मुंबई में CSAM मामला: 20,000 से अधिक बाल यौन शोषण सामग्री रखने पर मालाड का शख्स गिरफ्तार

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मुंबई में CSAM मामला: 20,000 से अधिक बाल यौन शोषण सामग्री रखने पर मालाड का शख्स गिरफ्तार

सारांश

महाराष्ट्र साइबर की तीन विशेष इकाइयों की निगरानी ने मुंबई के मालाड में एक ऐसे शख्स को बेनकाब किया जिसके पास कथित तौर पर 20,000 से अधिक CSAM फाइलें थीं। 49 वर्षीय सैफुद्दीन मलिक की गिरफ्तारी और जारी फॉरेंसिक जाँच यह तय करेगी कि यह नेटवर्क कितना बड़ा है।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र साइबर ने 7 नवंबर 2026 को मुंबई के मालाड (पश्चिम) निवासी सैफुद्दीन जमीर उद्दीन मलिक (49 वर्ष) को गिरफ्तार किया।
आरोपी के मोबाइल फोन से कथित तौर पर 20,000 से अधिक CSAM तस्वीरें और वीडियो बरामद।
मामला BNS धारा 294 , पॉक्सो अधिनियम 2012 की धारा 15 और IT अधिनियम 2000 की धारा 67(B) के तहत दर्ज; एफआईआर संख्या 88/2026 ।
कार्रवाई CCPWC , OCWC और TRACE — तीन विशेष साइबर इकाइयों की डिजिटल निगरानी का परिणाम।
महाराष्ट्र साइबर अब तक 5.67 लाख टिपलाइन रिपोर्टों और 31,000 बाल शोषण शिकायतों पर कार्रवाई कर चुका है।
फॉरेंसिक जाँच जारी; सामग्री के स्रोत और प्रसार की जाँच हो रही है।

महाराष्ट्र साइबर ने 7 नवंबर 2026 को मुंबई के मालाड (पश्चिम) निवासी 49 वर्षीय सैफुद्दीन जमीर उद्दीन मलिक को गिरफ्तार किया, जिसके मोबाइल फोन से कथित तौर पर 20,000 से अधिक बाल यौन शोषण एवं उत्पीड़न सामग्री (CSAM) की तस्वीरें और वीडियो बरामद की गईं। यह कार्रवाई ऑनलाइन बाल यौन शोषण के विरुद्ध जारी विशेष अभियान के तहत की गई, और फॉरेंसिक जाँच अभी भी जारी है।

गिरफ्तारी का घटनाक्रम

महाराष्ट्र साइबर की तीन विशेष इकाइयों — CCPWC, OCWC और TRACE — द्वारा डिजिटल प्लेटफॉर्म की निरंतर निगरानी के दौरान एक संदिग्ध की गतिविधियाँ सामने आईं। साइबर इंटेलिजेंस टूल्स और तकनीकी विश्लेषण के ज़रिए जाँचकर्ताओं ने यह स्थापित किया कि आरोपी कथित तौर पर CSAM सामग्री डाउनलोड और संग्रहित कर रहा था।

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, महाराष्ट्र साइबर कार्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, डिजिटल खुफिया जानकारी के आधार पर जाँच के बाद आरोपी को मालाड से गिरफ्तार किया गया।

दर्ज धाराएँ और कानूनी कार्रवाई

महाराष्ट्र साइबर के नोडल साइबर पुलिस स्टेशन में एफआईआर संख्या 88/2026 दर्ज की गई है। यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 294, पॉक्सो अधिनियम 2012 की धारा 15 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 67(B) के तहत दर्ज किया गया है।

गौरतलब है कि पॉक्सो अधिनियम की धारा 15 विशेष रूप से CSAM सामग्री के संग्रह और प्रसार को गंभीर अपराध की श्रेणी में रखती है, जिसमें कठोर दंड का प्रावधान है।

फॉरेंसिक जाँच और आगे की कार्रवाई

पुलिस अब फॉरेंसिक जाँच के ज़रिए यह पता लगाने में जुटी है कि यह सामग्री कहाँ से प्राप्त की गई, किस प्रकार डाउनलोड की गई, और क्या इसे किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से आगे साझा या प्रसारित भी किया गया था।

यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में साइबर अपराध, विशेष रूप से ऑनलाइन बाल शोषण से जुड़े मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।

महाराष्ट्र साइबर की व्यापक कार्रवाई

महाराष्ट्र साइबर के अनुसार, विभाग अब तक 5.67 लाख साइबर टिपलाइन रिपोर्टों और 31,000 ऑनलाइन बाल शोषण संबंधी शिकायतों पर कार्रवाई कर चुका है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि CSAM सामग्री को डाउनलोड करना, रखना, संग्रहित करना, साझा करना या प्रसारित करना एक गंभीर संज्ञेय अपराध है।

विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि ऐसी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से या साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके दें।

आम जनता पर असर

यह मामला ऑनलाइन बाल सुरक्षा के प्रति जागरूकता की ज़रूरत को एक बार फिर रेखांकित करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि CSAM के प्रसार में डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका बढ़ती जा रही है, और सक्रिय साइबर निगरानी ही इस पर अंकुश लगाने का प्रभावी तरीका है। फॉरेंसिक जाँच के नतीजे यह तय करेंगे कि इस मामले में अन्य आरोपियों की संलिप्तता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस व्यापक डिजिटल भूमिगत नेटवर्क की झलक है जो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर CSAM के प्रसार को जीवित रखता है। महाराष्ट्र साइबर की सक्रिय निगरानी सराहनीय है, लेकिन असली सवाल यह है कि 20,000 से अधिक फाइलें एक व्यक्ति के फोन तक कैसे पहुँचीं — क्या कोई सप्लाई चेन है जिसे फॉरेंसिक जाँच उजागर करेगी? पॉक्सो और IT अधिनियम के तहत दर्ज मामले में सज़ा तभी सुनिश्चित होगी जब डिजिटल साक्ष्य की श्रृंखला अदालत में अटूट साबित हो — जो भारतीय साइबर अभियोजन की पुरानी कमज़ोरी रही है।
RashtraPress
8 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुंबई CSAM मामले में किसे और क्यों गिरफ्तार किया गया?
महाराष्ट्र साइबर ने मुंबई के मालाड (पश्चिम) निवासी 49 वर्षीय सैफुद्दीन जमीर उद्दीन मलिक को गिरफ्तार किया, जिस पर कथित तौर पर 20,000 से अधिक CSAM तस्वीरें और वीडियो अपने मोबाइल फोन में संग्रहित रखने का आरोप है। यह गिरफ्तारी डिजिटल प्लेटफॉर्म की निगरानी के दौरान मिली खुफिया जानकारी के आधार पर की गई।
आरोपी पर कौन-सी धाराएँ लगाई गई हैं?
मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 294, पॉक्सो अधिनियम 2012 की धारा 15 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 67(B) के तहत दर्ज किया गया है। एफआईआर संख्या 88/2026 महाराष्ट्र साइबर के नोडल साइबर पुलिस स्टेशन में दर्ज है।
CSAM रखना या डाउनलोड करना क्या कानूनन अपराध है?
हाँ, पॉक्सो अधिनियम 2012 की धारा 15 और IT अधिनियम 2000 की धारा 67(B) के तहत CSAM को डाउनलोड करना, संग्रहित करना, साझा करना या प्रसारित करना एक गंभीर संज्ञेय अपराध है। महाराष्ट्र साइबर ने स्पष्ट किया है कि इस अपराध में कठोर दंड का प्रावधान है।
फॉरेंसिक जाँच में क्या पता लगाने की कोशिश हो रही है?
पुलिस यह जाँच कर रही है कि सामग्री कहाँ से प्राप्त की गई, किस तरह डाउनलोड की गई, और क्या इसे किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के ज़रिए आगे साझा या प्रसारित भी किया गया था। जाँच के नतीजे यह तय करेंगे कि इस मामले में कोई व्यापक नेटवर्क शामिल है या नहीं।
ऐसी संदिग्ध गतिविधि की शिकायत कहाँ करें?
ऑनलाइन बाल यौन शोषण से जुड़ी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर या साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके की जा सकती है। महाराष्ट्र साइबर ने नागरिकों से सक्रिय रूप से रिपोर्ट करने की अपील की है।
राष्ट्र प्रेस
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