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वारिस पठान का मुंबई हिंसा पर कड़ा रुख: भाषा विवाद में मारपीट अस्वीकार्य, दोषियों पर FIR हो

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वारिस पठान का मुंबई हिंसा पर कड़ा रुख: भाषा विवाद में मारपीट अस्वीकार्य, दोषियों पर FIR हो

सारांश

मुंबई में एक साथ भड़के सांप्रदायिक और भाषाई विवादों के बीच एआईएमआईएम नेता वारिस पठान ने मुंबई पुलिस से दोषियों पर FIR की माँग की, भागवत के बयान पर 'डबल स्टैंडर्ड' का आरोप लगाया और भाषा के नाम पर मारपीट को सिरे से खारिज किया।

मुख्य बातें

एआईएमआईएम नेता वारिस पठान ने 31 अगस्त को मुंबई पुलिस से मुलाकात कर लालबाग-परेल जुलूस विवाद में वीडियो जाँच और FIR दर्ज करने की माँग की।
पठान ने कहा कि मुंबई का माहौल बिगाड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
RSS प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका वाले बयान को 'डबल स्टैंडर्ड' बताते हुए भारत में नफरती बयानों पर कार्रवाई की माँग की।
हिंदी-मराठी विवाद पर कहा — मराठी सीखना जरूरी, लेकिन भाषा के नाम पर मारपीट या दबाव बनाना गलत।
सर्वोच्च न्यायालय की छात्रों के सवाल पूछने के अधिकार वाली टिप्पणी का समर्थन किया; युवाओं को संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक बताया।

एआईएमआईएम नेता वारिस पठान ने 31 अगस्त को मुंबई में हालिया सांप्रदायिक तनाव, हिंदी-मराठी भाषा विवाद और कई राष्ट्रीय मुद्दों पर खुलकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मुंबई का माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और भाषा के नाम पर किसी के साथ मारपीट किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है।

गणेश प्रतिमा विवाद और मुंबई पुलिस से मुलाकात

गणेश प्रतिमा पर अंडे फेंके जाने की घटना के बाद उपजे तनाव के बीच वारिस पठान के नेतृत्व में एआईएमआईएम के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुंबई पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। पठान ने बताया कि लालबाग-परेल इलाके में ईद मिलादुन्नबी के जुलूस के बाद कथित तौर पर कुछ लोगों के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार हुआ। उन्होंने कहा कि इस संबंध में कई वीडियो सामने आए हैं और पीड़ितों ने उनसे संपर्क कर गंभीर आरोप लगाए हैं।

पठान ने मुंबई पुलिस से माँग की कि उपलब्ध वीडियो साक्ष्यों की निष्पक्ष जाँच की जाए और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। उन्होंने कहा, 'मुंबई का माहौल खराब करने की कोशिश करने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए — चाहे वे किसी भी पक्ष के हों।'

मोहन भागवत के बयान पर 'डबल स्टैंडर्ड' का आरोप

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने अमेरिका में कथित तौर पर कहा था कि मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने वालों को हिंदू नहीं माना जा सकता। इस बयान पर पठान ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे 'डबल स्टैंडर्ड' करार दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि आरएसएस प्रमुख विदेश में नफरत की राजनीति का विरोध करते हैं, तो भारत में नफरत फैलाने वाले बयानों के खिलाफ ठोस कार्रवाई क्यों नहीं होती।

उज्बेकिस्तान सम्मान और बाबर की राजनीति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उज्बेकिस्तान में मिले राजकीय सम्मान पर पठान ने एक अलग नज़रिया पेश किया। उन्होंने कहा कि जिस भूमि से मुगल शासक बाबर का ऐतिहासिक संबंध रहा है, उसी देश द्वारा भारत के प्रधानमंत्री को सम्मानित किया जाना उन लोगों के लिए करारा जवाब है जो भारत में बाबर के नाम पर राजनीतिक बयानबाजी करते हैं। पठान ने अपील की कि नफरत की राजनीति छोड़कर देश और समाज की तरक्की पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

हिंदी-मराठी भाषा विवाद: समय दें, दबाव नहीं

मनसे प्रमुख राज ठाकरे पर हिंदी-मराठी भाषा विवाद को कथित तौर पर हवा देने का आरोप लगाते हुए पठान ने अपना रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि वे मराठी भाषा का पूरा सम्मान करते हैं और महाराष्ट्र में बसने वाले सभी लोगों को मराठी सीखनी चाहिए। लेकिन भाषा के नाम पर किसी के साथ मारपीट या जबरदस्ती करना सर्वथा गलत है।

पठान ने यह भी कहा कि मुंबई में उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात समेत देश के कोने-कोने से लोग रोजगार की तलाश में आते हैं। ऐसे प्रवासी मजदूरों और गरीब तबके पर ही कथित तौर पर भाषाई दबाव बनाया जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि भाषा का मुद्दा वाकई गंभीर है, तो बड़े उद्योगपतियों और फिल्मी सितारों पर भी समान नियम क्यों नहीं लागू होते।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और लोकतांत्रिक अधिकार

सर्वोच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश की उस टिप्पणी का पठान ने समर्थन किया जिसमें छात्रों के सवाल पूछने के अधिकार की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को सरकार की नीतियों पर सवाल करने का संवैधानिक अधिकार है। पठान ने युवाओं — विशेषकर 'जेन-ज़ी' पीढ़ी — को संविधान और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बताया और उनकी सराहना की।

यह ऐसे समय में आया है जब मुंबई में सांप्रदायिक और भाषाई तनाव के कई मामले एक साथ सुर्खियों में हैं। पठान का यह बहुआयामी बयान आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस को और तेज़ कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन भागवत के बयान पर 'डबल स्टैंडर्ड' का आरोप तब तक अधूरा रहेगा जब तक खुद एआईएमआईएम अपने नेताओं के विवादित बयानों पर समान मानक नहीं अपनाती। हिंदी-मराठी विवाद पर पठान का रुख संतुलित दिखता है, लेकिन 'बड़े उद्योगपतियों और फिल्मी सितारों' का जिक्र बिना नाम लिए राजनीतिक पैंतरेबाजी से अधिक नहीं। असली सवाल यह है कि मुंबई में बार-बार उभरने वाले इन भाषाई और सांप्रदायिक विवादों की जड़ में नीतिगत खालीपन है, जिसे किसी एक नेता के बयान से नहीं भरा जा सकता।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वारिस पठान ने मुंबई पुलिस से क्या माँग की?
वारिस पठान ने मुंबई पुलिस से माँग की कि लालबाग-परेल इलाके में ईद मिलादुन्नबी जुलूस के बाद हुई कथित मारपीट के वीडियो साक्ष्यों की निष्पक्ष जाँच हो और दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए। उन्होंने कहा कि मुंबई का माहौल बिगाड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
हिंदी-मराठी भाषा विवाद पर पठान का क्या कहना है?
पठान ने कहा कि महाराष्ट्र में रहने वाले सभी लोगों को मराठी सीखनी चाहिए, लेकिन भाषा के नाम पर मारपीट या जबरदस्ती करना गलत है। उन्होंने यह भी कहा कि यूपी, बिहार और गुजरात से आए प्रवासी मजदूरों को मराठी सीखने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।
मोहन भागवत के बयान पर पठान ने 'डबल स्टैंडर्ड' क्यों कहा?
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने अमेरिका में कथित तौर पर कहा कि मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने वाले हिंदू नहीं हो सकते। पठान ने सवाल उठाया कि यदि यही सोच है तो भारत में नफरती बयानों के खिलाफ ठोस कार्रवाई क्यों नहीं होती — इसीलिए उन्होंने इसे 'डबल स्टैंडर्ड' कहा।
उज्बेकिस्तान में PM मोदी के सम्मान पर पठान ने क्या कहा?
पठान ने कहा कि बाबर की ऐतिहासिक भूमि उज्बेकिस्तान द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को सम्मानित किया जाना उन लोगों के लिए जवाब है जो भारत में बाबर के नाम पर राजनीतिक बयानबाजी करते हैं। उन्होंने नफरत की राजनीति छोड़ने की अपील की।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर पठान का क्या रुख है?
पठान ने सर्वोच्च न्यायालय की उस टिप्पणी का समर्थन किया जिसमें छात्रों के सवाल पूछने के अधिकार की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को सरकारी नीतियों पर सवाल करने का संवैधानिक अधिकार है।
राष्ट्र प्रेस
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