नीट पेपर लीक विरोध: मुरली मनोहर जोशी बोले — 'छात्रों की चिंताएं वास्तविक, बल प्रयोग न हो'
सारांश
मुख्य बातें
जंतर-मंतर, नई दिल्ली में नीट पेपर लीक के विरोध और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का आंदोलन 23 जुलाई 2026 को भी जारी रहा। इसी बीच, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने प्रदर्शनकारी छात्रों के पक्ष में खुलकर बात की और सरकार से उनके विरुद्ध बल प्रयोग न करने की अपील की।
जोशी का बयान: सहानुभूति और दूरगामी समाधान की माँग
मुरली मनोहर जोशी ने गुरुवार को फेसबुक पर एक पोस्ट साझा कर अपनी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने लिखा, 'यह देखना अत्यन्त पीड़ादायक है कि देश के विभिन्न भागों से आए युवा छात्र कई दिनों से नई दिल्ली की सड़कों पर एकत्रित हैं। उनकी चिंताएं और सरोकार वास्तविक हैं। इन्हें सहानुभूति तथा दूरगामी समाधान की दृष्टि से हल किया जाना चाहिए।'
जोशी ने यह भी कहा कि उन्हें पूरी आशा है कि इस मामले को 'केवल कानूनी और व्यवस्था की समस्या के रूप में नहीं देखा जाएगा, जिससे बलपूर्वक निपटा जाए।' यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जोशी स्वयं BJP के ही वरिष्ठ नेता हैं और उनकी यह टिप्पणी सत्तारूढ़ दल की आंतरिक बेचैनी को उजागर करती है।
महिलाओं पर बल प्रयोग को लेकर गहरी पीड़ा
जोशी ने अपने बयान में विशेष रूप से महिला प्रदर्शनकारियों पर हुए बल प्रयोग की आलोचना की। उन्होंने कहा, 'मुझे यह देखकर अत्यन्त पीड़ा हुई है कि महिलाओं और युवतियों पर निर्मम बल प्रयोग किया गया।' उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे बल के उपयोग से 'भारतीय समाज का बड़ा हिस्सा विकसित भारत के लक्ष्य से बहुत दूर चला जाएगा।'
यह ऐसे समय में आया है जब सरकार 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को अपनी प्रमुख नीतिगत पहचान बना रही है। एक वरिष्ठ BJP नेता द्वारा इसी शब्दावली का उपयोग करते हुए प्रदर्शनकारियों का पक्ष लेना राजनीतिक दृष्टि से उल्लेखनीय है।
NSA विवाद: दिल्ली पुलिस ने खारिज किए आरोप
इस बीच, दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को उन रिपोर्टों को खारिज किया जिनमें दावा किया गया था कि उसे प्रदर्शनकारियों को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लेने के विशेष अधिकार दिए गए हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह कोई नया या लक्षित आदेश नहीं है।
गौरतलब है कि दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) ने 15 जुलाई को NSA, 1980 की धारा 3(3) के तहत एक आदेश जारी किया था, जिसने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को 19 जुलाई 2026 से 18 अक्टूबर 2026 तक NSA की धारा 3(2) के अंतर्गत निवारक हिरासत (Preventive Detention) के आदेश जारी करने का अधिकार दिया।
अधिकारियों ने बताया कि यह आदेश वर्षों से लागू है और मानक प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत हर तीन महीने में इसका नवीनीकरण किया जाता है। इसे प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध विशेष रूप से लागू करने की कोई योजना नहीं है।
आंदोलन की पृष्ठभूमि
सीजेपी का यह आंदोलन नीट-यूजी परीक्षा में कथित पेपर लीक की घटनाओं के बाद शुरू हुआ, जिसने देशभर के लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों के भविष्य को अनिश्चित कर दिया। प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और परीक्षा प्रणाली में आमूल सुधार की माँग कर रहे हैं।
आगे देखना होगा कि BJP के भीतर से उठी इस आवाज़ का सरकार की रणनीति पर क्या असर पड़ता है और क्या प्रशासन छात्रों की माँगों पर संवाद का रास्ता अपनाता है।