मुजफ्फरपुर में बैंक की UIDAI मशीन से बन रहे थे फर्जी आधार-पासपोर्ट, पुलिस ने 2 गिरफ्तार किए
सारांश
मुख्य बातें
मुजफ्फरपुर (बिहार) के मोतीझील स्थित कन्हाई कम्युनिकेशन कंप्यूटर सेंटर में पटना के एक बैंक की यूआईडीएआई (UIDAI) मशीन का अवैध उपयोग कर फर्जी आधार कार्ड और जाली पासपोर्ट बनाए जाने का भंडाफोड़ हुआ है। 2 अक्टूबर 2026 को नगर थाना पुलिस ने छापेमारी कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया और भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री जब्त की। जांच में सामने आया कि इस नेटवर्क के जरिए कथित तौर पर बांग्लादेशी नागरिकों के लिए भी दस्तावेज बनाए गए थे।
कैसे चल रहा था यह फर्जीवाड़ा
पटना के बोरिंग कैनाल रोड स्थित यूनियन बैंक में टेम टेक्नोलॉजी एजेंसी के पास यूआईडीएआई मशीन से आधार बनाने का अधिकृत अनुबंध है। उक्त एजेंसी का कंप्यूटर ऑपरेटर शिवशंकर पंडित — जो छपरा के दरियापुर का निवासी है — छुट्टी के दिनों में इस सरकारी मशीन को अपने संपर्क के विभिन्न साइबर कैफे में ले जाकर अवैध काम कराता था।
पुलिस के अनुसार, वह आधार बनाने, नाम बदलने और अन्य दस्तावेजों में हेरफेर करने के एवज में अवैध रूप से पैसे वसूलता था। मोतिहारी के केसरिया थाना क्षेत्र निवासी साहिल कुमार 2019 से कन्हाई कम्युनिकेशन में काम कर रहा था और इस नेटवर्क का सक्रिय हिस्सा था।
छापेमारी और गिरफ्तारी
नगर एसडीपीओ वन सुरेश कुमार के नेतृत्व में नगर थाना की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर मोतीझील स्थित कन्हाई कम्युनिकेशन पर छापा मारा। इस दौरान दो लैपटॉप, एक आइरिस स्कैनर, एक फिंगर स्कैनर, अंगूठे का क्लोन (बायोमेट्रिक डिवाइस), 8 आधार कार्ड तथा अन्य डिजिटल और भौतिक दस्तावेज जब्त किए गए।
उसके बाद छपरा के दरियापुर में भी दबिश देकर शिवशंकर पंडित को हिरासत में लिया गया। दोनों आरोपियों के विरुद्ध नगर थाना में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
बांग्लादेशी पासपोर्ट का मामला
जांच में पुलिस को पता चला कि उक्त केंद्र से कथित तौर पर एक बांग्लादेशी नागरिक का पासपोर्ट भी जारी किया गया था। नगर एसडीपीओ सुरेश कुमार ने बताया कि जाँच में यह स्पष्ट हुआ कि यूआईडीएआई की अधिकृत मशीन का दुरुपयोग कर न केवल आधार कार्ड, बल्कि अन्य सरकारी दस्तावेजों में भी अवैध रूप से हेरफेर की जाती थी। यह ऐसे समय में आया है जब देश में अवैध दस्तावेज निर्माण पर कार्रवाई तेज हुई है।
विशेषज्ञों की नज़र में मामले की गंभीरता
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, किसी बैंक की अधिकृत यूआईडीएआई मशीन का इस प्रकार दुरुपयोग राष्ट्रीय पहचान-तंत्र की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है। अंगूठे के बायोमेट्रिक क्लोन की बरामदगी संकेत करती है कि आरोपी जाली बायोमेट्रिक डेटा की मदद से आधार प्रणाली को भी धोखा देने में सक्षम थे। पुलिस के अनुसार, अन्य साइबर कैफे में भी इसी तरह के काम होने की जांच जारी है।
आगे की जांच और कार्रवाई
पुलिस ने संकेत दिया है कि इस नेटवर्क में अन्य कंप्यूटर सेंटर और व्यक्तियों की भी संलिप्तता हो सकती है। जब्त लैपटॉप, स्कैनर और डिजिटल सामग्री की फोरेंसिक जांच की जा रही है। मामले में यूआईडीएआई और संबंधित बैंक को भी सूचित किए जाने की संभावना है, ताकि मशीन के उपयोग का पूरा रिकॉर्ड खंगाला जा सके।