1 अक्टूबर 2026
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म्यांमार आतंकी ट्रेनिंग केस: 7 विदेशी नागरिकों पर NIA चार्जशीट की सुनवाई 23 अक्टूबर तक स्थगित

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म्यांमार आतंकी ट्रेनिंग केस: 7 विदेशी नागरिकों पर NIA चार्जशीट की सुनवाई 23 अक्टूबर तक स्थगित

सारांश

म्यांमार में हथियारबंद समूहों को प्रशिक्षण देने के आरोप में गिरफ्तार एक अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिकों के खिलाफ NIA चार्जशीट पर दिल्ली की विशेष अदालत में सुनवाई 23 अक्टूबर तक टल गई। सभी आरोपी फिलहाल डिफॉल्ट जमानत पर हैं और परिवार से मिलने विदेश जाने की अनुमति भी मिल चुकी है।

मुख्य बातें

दिल्ली की विशेष NIA अदालत में 1 अक्टूबर 2026 को हुई सुनवाई अब 23 अक्टूबर 2026 तक स्थगित।
म्यांमार में आतंकी प्रशिक्षण के आरोपी — मैथ्यू एरन वैन डाइक (अमेरिका) और 6 यूक्रेनी नागरिक — सभी डिफॉल्ट जमानत पर।
आज की सुनवाई में वैन डाइक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से उपस्थित; यूक्रेनी नागरिकों ने छूट माँगी।
सभी 7 आरोपियों को 24 सितंबर 2026 को एक महीने के लिए विदेश जाने की अनुमति दी गई थी।
NIA के अनुसार सभी को मार्च 2026 में गिरफ्तार किया गया था।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा म्यांमार में हथियारबंद समूहों को प्रशिक्षण देने और भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने के आरोप में दाखिल चार्जशीट पर दिल्ली की विशेष एनआईए अदालत में 1 अक्टूबर 2026 को सुनवाई हुई, जिसे अब 23 अक्टूबर 2026 तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। इस मामले में एक अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिक आरोपी हैं, जो फिलहाल डिफॉल्ट जमानत पर बाहर हैं।

आज की सुनवाई में क्या हुआ

राऊज एवेन्यू कोर्ट स्थित विशेष एनआईए अदालत में आज की कार्यवाही के दौरान अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरन वैन डाइक अमेरिका से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित हुए। वहीं, छह यूक्रेनी नागरिकों ने सुनवाई से छूट की अर्जी दी थी, जिसे अदालत ने स्वीकार किया।

अदालत ने चार्जशीट पर संज्ञान लेने के मामले में अगली तारीख 23 अक्टूबर 2026 निर्धारित की है। यह ऐसे समय में आया है जब एनआईए मामले की जाँच को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है।

मुख्य आरोपी और चार्जशीट का विवरण

पिछले महीने एनआईए ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल की थी। अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरन वैन डाइक के अलावा छह यूक्रेनी नागरिक — कामिंस्की विक्टर, हुर्बा पेट्रो, स्लिविएक तारास, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफानकिव मारियान और होंचारुक मैक्सिम — इस चार्जशीट में आरोपी हैं।

एनआईए के अनुसार, इन सभी को मार्च 2026 में गिरफ्तार किया गया था। एजेंसी का आरोप है कि ये सभी म्यांमार में एक विशेष सशस्त्र समूह को आतंकी प्रशिक्षण दे रहे थे और इससे भारत की सुरक्षा को सीधा खतरा पैदा हो रहा था।

डिफॉल्ट जमानत और विदेश यात्रा की अनुमति

गौरतलब है कि अदालत ने सभी सातों आरोपियों को डिफॉल्ट जमानत दे दी थी, जिसके बाद वे तिहाड़ जेल से रिहा हो गए थे। डिफॉल्ट जमानत तब दी जाती है जब जांच एजेंसी कानून में निर्धारित समय-सीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल करने में विफल रहती है।

24 सितंबर 2026 को हुई पिछली सुनवाई में विशेष एनआईए अदालत ने सभी सात विदेशी नागरिकों को कुछ शर्तों के साथ अपने परिवार से मिलने के लिए क्रमशः अमेरिका और यूक्रेन जाने की अनुमति दी थी। कोर्ट ने आवश्यक औपचारिकताएँ पूरी करने के बाद एक महीने के लिए विदेश जाने की इजाज़त दी और उनके पासपोर्ट सौंपने का भी निर्देश दिया था।

मामले का व्यापक संदर्भ

यह मामला भारत की उस बड़ी चिंता का हिस्सा है जो म्यांमार में अस्थिरता और वहाँ सक्रिय सशस्त्र समूहों के भारत-विरोधी कार्यकलापों को लेकर है। आलोचकों का कहना है कि विदेशी नागरिकों का म्यांमार में इस तरह की गतिविधियों में कथित तौर पर शामिल होना भारत-म्यांमार सीमा पर सुरक्षा तंत्र के लिए गंभीर चुनौती प्रस्तुत करता है।

यह भी उल्लेखनीय है कि इस तरह के मामले में एक अमेरिकी और कई यूक्रेनी नागरिकों का एक साथ आरोपी होना कूटनीतिक दृष्टि से संवेदनशील है, विशेषकर जब भारत दोनों देशों के साथ सक्रिय संबंध बनाए हुए है।

आगे क्या होगा

अब सभी की निगाहें 23 अक्टूबर 2026 की सुनवाई पर टिकी हैं, जब अदालत चार्जशीट पर संज्ञान लेने के सवाल पर निर्णय ले सकती है। यदि अदालत संज्ञान लेती है, तो मामले की नियमित सुनवाई की प्रक्रिया शुरू होगी और सभी आरोपियों की उपस्थिति सुनिश्चित करना एक महत्त्वपूर्ण कानूनी पहलू बनेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके भू-राजनीतिक आयाम असाधारण हैं — एक अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिक एक साथ भारत के सबसे संवेदनशील सुरक्षा कानून के तहत आरोपी हैं, जबकि भारत इन दोनों देशों के साथ रणनीतिक संबंध बनाए हुए है। डिफॉल्ट जमानत का मिलना और विदेश यात्रा की अनुमति देना NIA की जाँच प्रक्रिया पर सवाल उठाता है — क्या एजेंसी समय-सीमा में चार्जशीट दाखिल करने में चूकी? अदालत का 23 अक्टूबर को संज्ञान लेने का निर्णय यह तय करेगा कि यह मामला सुर्खियों से आगे बढ़कर ठोस कानूनी परिणाम तक पहुँचेगा या नहीं।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

म्यांमार आतंकी ट्रेनिंग केस में 7 विदेशी नागरिक कौन हैं?
इस मामले में अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरन वैन डाइक और छह यूक्रेनी नागरिक — कामिंस्की विक्टर, हुर्बा पेट्रो, स्लिविएक तारास, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफानकिव मारियान और होंचारुक मैक्सिम — आरोपी हैं। NIA के अनुसार इन सभी को मार्च 2026 में गिरफ्तार किया गया था।
इन विदेशी नागरिकों पर क्या आरोप हैं?
NIA का आरोप है कि इन सभी ने म्यांमार में एक विशेष सशस्त्र समूह को आतंकी प्रशिक्षण दिया और इससे भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हुआ। अभी तक ये आरोप कथित स्तर पर हैं क्योंकि अदालत ने चार्जशीट पर अभी संज्ञान नहीं लिया है।
डिफॉल्ट जमानत क्या होती है और इन्हें यह क्यों मिली?
डिफॉल्ट जमानत तब दी जाती है जब जांच एजेंसी कानून में निर्धारित समय-सीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाती। इस मामले में NIA द्वारा समय पर चार्जशीट न दाखिल होने पर सभी सात आरोपियों को डिफॉल्ट जमानत मिली और वे तिहाड़ जेल से रिहा हो गए।
23 अक्टूबर 2026 की सुनवाई में क्या होने की उम्मीद है?
23 अक्टूबर को दिल्ली की विशेष NIA अदालत NIA की चार्जशीट पर संज्ञान लेने के सवाल पर निर्णय ले सकती है। यदि अदालत संज्ञान लेती है, तो मामले की नियमित सुनवाई शुरू होगी और सभी आरोपियों की उपस्थिति सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा।
क्या इन आरोपियों को विदेश जाने की अनुमति दी गई है?
हाँ, 24 सितंबर 2026 को विशेष NIA अदालत ने सभी सात आरोपियों को कुछ शर्तों के साथ एक महीने के लिए अपने परिवार से मिलने क्रमशः अमेरिका और यूक्रेन जाने की अनुमति दी थी और उनके पासपोर्ट लौटाने का निर्देश भी दिया था।
राष्ट्र प्रेस
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