म्यांमार आतंकी ट्रेनिंग केस: NIA कोर्ट ने 6 यूक्रेनी व 1 अमेरिकी नागरिक को परिवार से मिलने विदेश जाने की अनुमति दी
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के विशेष मामले में नई दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 24 सितंबर 2026 को म्यांमार में आतंकी ट्रेनिंग देने के आरोप में गिरफ्तार छह यूक्रेनी नागरिकों और एक अमेरिकी नागरिक को शर्तों के साथ एक महीने के लिए अपने परिवारों से मिलने हेतु विदेश जाने की अनुमति प्रदान की। अदालत ने इन सभी के पासपोर्ट भी वापस सौंपने का निर्देश दिया है और उनके तिहाड़ जेल से शीघ्र रिहा होने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
मामले का पृष्ठभूमि और आरोप
एनआईए ने इन सातों विदेशी नागरिकों को मार्च 2026 में गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी के अनुसार, ये सभी आरोपी म्यांमार के जातीय सशस्त्र समूहों को हथियार और ड्रोन ऑपरेशन से संबंधित प्रशिक्षण देने से जुड़े थे। आरोप है कि ये लोग टूरिस्ट वीज़ा पर भारत आए और मिजोरम के रास्ते अवैध तरीके से म्यांमार में प्रवेश किया। एजेंसी का यह भी कहना है कि इस प्रशिक्षण के लिए यूरोप से ड्रोन मँगाए गए थे।
छह यूक्रेनी नागरिकों की पहचान पेट्रो हुरबा, तारास स्लिवियाक, इवान सुकमानोवस्की, मारियन स्टेफांकिव, मक्सिम होंचरुक और विक्टर कामिंस्की के रूप में हुई है। इनके साथ अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक को भी गिरफ्तार किया गया था।
डिफॉल्ट बेल और कोर्ट के आदेश
विशेष एनआईए जज प्रशांत शर्मा ने बुधवार को छह यूक्रेनी नागरिकों को डिफॉल्ट बेल प्रदान की, जिसके तहत प्रत्येक को ₹1 लाख का कैश बॉन्ड भरना अनिवार्य किया गया। वैनडाइक को 18 सितंबर 2026 को ही डिफॉल्ट बेल मिल चुकी थी। उनकी जमानत शर्तों में बाद में संशोधन करते हुए सुरक्षा बॉन्ड से छूट देकर केवल ₹1 लाख का कैश बॉन्ड जमा करने पर रिहाई का आदेश दिया गया।
गौरतलब है कि डिफॉल्ट बेल तब दी जाती है जब जांच एजेंसी निर्धारित समयसीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल करने में विफल रहे। वैनडाइक ने इसी आधार पर जमानत की अर्जी दी थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार किया।
इमिग्रेशन धाराओं से मुक्ति
कोर्ट ने छह यूक्रेनी नागरिकों को इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट से जुड़े अपराधों से भी मुक्त कर दिया। फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) के समक्ष इन अपराधों के कंपाउंड होने के आधार पर यह कदम उठाया गया, जिसमें प्रत्येक आरोपी पर ₹5.5 लाख का जुर्माना लगाया गया था।
यह ऐसे समय में आया है जब मूल रूप से मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत आरोप तय किए गए थे, लेकिन एनआईए की ओर से बाद में दाखिल चार्जशीट में UAPA की धाराएं शामिल नहीं की गईं। इसके बजाय इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट से संबंधित धाराएं लगाई गईं — जो इस मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ है।
जांच की स्थिति
एनआईए का कहना है कि कथित आतंकी गतिविधियों से जुड़े पहलुओं की जांच अभी जारी है। एजेंसी ने संकेत दिया है कि आगे साक्ष्य मिलने पर पूरक चार्जशीट दाखिल की जा सकती है। इसका अर्थ है कि हालांकि सातों आरोपी अभी विदेश जाने के लिए स्वतंत्र हो सकते हैं, लेकिन कानूनी कार्यवाही पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
सभी आरोपियों को जांच अधिकारी के बुलाने पर उपलब्ध रहने की शर्त पर ही यह राहत दी गई है। यह मामला भारत-म्यांमार सीमा पर सुरक्षा चुनौतियों और पूर्वोत्तर क्षेत्र में विदेशी नागरिकों की गतिविधियों पर व्यापक निगरानी की ज़रूरत को रेखांकित करता है।