23 सितंबर 2026
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म्यांमार आतंकी ट्रेनिंग मामला: दिल्ली कोर्ट ने 6 यूक्रेनी नागरिकों को डिफॉल्ट बेल दी

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म्यांमार आतंकी ट्रेनिंग मामला: दिल्ली कोर्ट ने 6 यूक्रेनी नागरिकों को डिफॉल्ट बेल दी

सारांश

दिल्ली कोर्ट ने म्यांमार में सशस्त्र समूहों को कथित हथियार-ड्रोन ट्रेनिंग देने के मामले में मार्च 2026 से बंद छह यूक्रेनी नागरिकों को डिफॉल्ट बेल दी — क्योंकि एनआईए निर्धारित समय में चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकी। यूएपीए हटने और अब जमानत मिलने से यह मामला कानूनी रूप से कमज़ोर पड़ता दिख रहा है।

मुख्य बातें

राउज एवेन्यू कोर्ट ने 23 सितंबर 2026 को 6 यूक्रेनी नागरिकों को डिफॉल्ट बेल दी; प्रत्येक पर ₹1 लाख कैश बॉन्ड।
आरोपियों की पहचान: पेट्रो हुरबा, तारास स्लिवियाक, इवान सुकमानोवस्की, मारियन स्टेफांकिव, मक्सिम होंचरुक और विक्टर कामिंस्की ।
सभी छहों को इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट के अपराधों से मुक्त किया गया; एफआरआरओ ने प्रत्येक पर ₹5.5 लाख जुर्माना लगाया।
अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक को 18 सितंबर को पहले ही डिफॉल्ट बेल मिल चुकी थी; अब श्योरिटी बॉन्ड की शर्त हटाई गई।
शुरुआत में लगाई गई यूएपीए की धाराएँ एनआईए की चार्जशीट में शामिल नहीं हुईं; कथित आतंकी पहलुओं की जांच अभी जारी।
वैनडाइक के अमेरिका जाने की अनुमति के आवेदन पर 25 सितंबर 2026 को सुनवाई।

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 23 सितंबर 2026 को म्यांमार के जातीय सशस्त्र समूहों को कथित तौर पर हथियार और ड्रोन ऑपरेशन की ट्रेनिंग देने के मामले में गिरफ्तार छह यूक्रेनी नागरिकों को डिफॉल्ट बेल प्रदान कर दी। विशेष एनआईए जज प्रशांत शर्मा ने यह आदेश पारित किया और प्रत्येक आरोपी को ₹1 लाख का कैश बॉन्ड भरने का निर्देश दिया।

छह आरोपियों की पहचान

जिन छह यूक्रेनी नागरिकों को जमानत मिली है, उनकी पहचान पेट्रो हुरबा, तारास स्लिवियाक, इवान सुकमानोवस्की, मारियन स्टेफांकिव, मक्सिम होंचरुक और विक्टर कामिंस्की के रूप में हुई है। इन सभी को मार्च 2026 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक के साथ गिरफ्तार किया था।

कोर्ट ने इन छहों आरोपियों को इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट से जुड़े अपराधों से भी मुक्त कर दिया है। यह राहत फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (एफआरआरओ) के समक्ष अपराधों के कंपाउंड होने के आधार पर दी गई, जिसमें एफआरआरओ ने प्रत्येक आरोपी पर ₹5.5 लाख का जुर्माना लगाया है।

वैनडाइक की जमानत शर्तों में बदलाव

इसी मामले में गिरफ्तार अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक को 18 सितंबर 2026 को राउज एवेन्यू कोर्ट पहले ही डिफॉल्ट बेल दे चुकी थी। उस समय उन पर ₹1 लाख का निजी मुचलका और इतनी ही राशि की एक जमानत (श्योरिटी) की शर्त लगाई गई थी।

23 सितंबर के आदेश में कोर्ट ने वैनडाइक की शर्तों में संशोधन करते हुए उन्हें श्योरिटी बॉन्ड से छूट दे दी — अब उन्हें केवल ₹1 लाख का कैश बॉन्ड जमा करके रिहा किया जाएगा। वैनडाइक ने अपने परिवार से मिलने के लिए अमेरिका जाने की अनुमति माँगते हुए अलग से आवेदन दाखिल किया है, जिस पर 25 सितंबर 2026 को सुनवाई निर्धारित है।

एनआईए के आरोप और चार्जशीट का घटनाक्रम

एनआईए ने आरोप लगाया था कि ये सातों विदेशी नागरिक मिजोरम से अवैध रूप से म्यांमार में प्रवेश करके वहाँ के जातीय सशस्त्र समूहों को हथियार और ड्रोन युद्ध की ट्रेनिंग देने में संलिप्त थे। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी भारत में टूरिस्ट वीज़ा पर आए थे और पूर्वोत्तर की ओर गए थे। यूरोप से ड्रोन लाने का भी आरोप लगाया गया था।

गौरतलब है कि मामले में शुरुआत में गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोप लगाए गए थे, लेकिन एनआईए द्वारा बाद में दाखिल चार्जशीट में यूएपीए की धाराएँ शामिल नहीं की गईं। आरोपियों के खिलाफ अंततः इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट से संबंधित धाराएँ लगाई गईं। यह वही कानूनी आधार है जिसके तहत चार्जशीट दाखिल न होने पर डिफॉल्ट बेल का रास्ता खुला।

जांच की स्थिति और आगे की राह

एनआईए ने स्पष्ट किया है कि कथित आतंकी गतिविधियों से जुड़े पहलुओं की जांच अभी जारी है। एजेंसी ने संकेत दिया है कि आगे सबूत मिलने पर पूरक चार्जशीट दाखिल की जा सकती है। कोर्ट को एफआरआरओ की ओर से एक सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट भी प्राप्त हुई है, जिसका विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया।

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र और म्यांमार सीमा पर सुरक्षा चिंताएँ बढ़ी हुई हैं। वैनडाइक के विदेश यात्रा आवेदन पर 25 सितंबर को होने वाली सुनवाई इस मामले की अगली महत्वपूर्ण तारीख होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

चार्जशीट में वह आधार गायब हो गया। डिफॉल्ट बेल का मिलना मतलब है कि जांच एजेंसी निर्धारित समयसीमा में सबूत न्यायालय के समक्ष नहीं रख सकी। यह मामला भारत की पूर्वोत्तर सीमा से जुड़ी सुरक्षा संवेदनशीलता और विदेशी नागरिकों की संलिप्तता के गंभीर आरोपों को देखते हुए असाधारण है — ऐसे में चार्जशीट की कमज़ोरी पर जवाबदेही ज़रूरी है।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

म्यांमार आतंकी ट्रेनिंग मामले में किन यूक्रेनी नागरिकों को जमानत मिली?
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 23 सितंबर 2026 को पेट्रो हुरबा, तारास स्लिवियाक, इवान सुकमानोवस्की, मारियन स्टेफांकिव, मक्सिम होंचरुक और विक्टर कामिंस्की को डिफॉल्ट बेल दी। इन्हें मार्च 2026 में एनआईए ने गिरफ्तार किया था।
डिफॉल्ट बेल क्या होती है और इन आरोपियों को यह क्यों मिली?
डिफॉल्ट बेल तब मिलती है जब जांच एजेंसी कानूनी रूप से निर्धारित समयसीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाती। इस मामले में एनआईए निर्धारित समय में चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकी, जिसके आधार पर आरोपियों ने यह बेल माँगी और कोर्ट ने मंजूर की।
इन आरोपियों पर एनआईए ने क्या आरोप लगाए थे?
एनआईए ने आरोप लगाया था कि ये सातों विदेशी नागरिक म्यांमार के जातीय सशस्त्र समूहों को हथियार और ड्रोन ऑपरेशन की ट्रेनिंग देने में संलिप्त थे। आरोप था कि ये लोग टूरिस्ट वीज़ा पर भारत आए और मिजोरम से अवैध रूप से म्यांमार में घुसे।
इस मामले में यूएपीए की धाराएँ क्यों हटाई गईं?
मामले में शुरुआत में गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए के तहत आरोप लगाए गए थे, लेकिन एनआईए ने बाद में दाखिल चार्जशीट में यूएपीए की धाराएँ नहीं जोड़ीं। एजेंसी ने कहा है कि कथित आतंकी पहलुओं की जांच जारी है और आगे सबूत मिलने पर पूरक चार्जशीट दाखिल की जा सकती है।
अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक के मामले में अब क्या स्थिति है?
वैनडाइक को 18 सितंबर 2026 को डिफॉल्ट बेल मिल चुकी थी। 23 सितंबर को कोर्ट ने उनकी शर्तों में बदलाव करते हुए श्योरिटी बॉन्ड की शर्त हटा दी — अब केवल ₹1 लाख का कैश बॉन्ड भरना होगा। उनके अमेरिका जाने के आवेदन पर 25 सितंबर 2026 को सुनवाई होगी।
राष्ट्र प्रेस
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