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मैसूर में 1 लाख मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश, तनवीर सैत ने भाजपा-RSS पर लगाया साजिश का आरोप

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मैसूर में 1 लाख मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश, तनवीर सैत ने भाजपा-RSS पर लगाया साजिश का आरोप

सारांश

मैसूर के नरसिम्हा राजा विधानसभा क्षेत्र में 10,000 से अधिक फॉर्म-7 दाखिल कर करीब एक लाख अल्पसंख्यक और दलित मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश का आरोप। कांग्रेस विधायक तनवीर सैत ने भाजपा-RSS को जिम्मेदार ठहराया, दो थानों में एफआईआर दर्ज।

मुख्य बातें

कांग्रेस विधायक तनवीर सैत ने आरोप लगाया कि मैसूर के नरसिम्हा राजा विधानसभा क्षेत्र में 10,000 से अधिक फॉर्म-7 दाखिल किए गए हैं।
इन आपत्तियों से करीब एक लाख मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं, जिनमें अल्पसंख्यक और दलित समुदाय के मतदाता प्रमुख रूप से शामिल हैं।
एक-एक मतदान केंद्र पर 100 से 200 तक आपत्तियां दर्ज; आपत्ति दाखिल करने वालों का क्षेत्र से कोई संबंध नहीं — कांग्रेस का दावा।
इस मामले में दो थानों में एफआईआर दर्ज कराई गई है और जांच की मांग की गई है।
सैत ने भाजपा और RSS को जिम्मेदार ठहराते हुए चुनाव आयोग (ECI) से हस्तक्षेप की मांग की है।

कर्नाटक के मैसूर स्थित नरसिम्हा राजा विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाने की कोशिश का आरोप लगाते हुए कांग्रेस विधायक तनवीर सैत ने 2 अक्टूबर 2026 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, 10,000 से अधिक फॉर्म-7 दाखिल किए गए हैं, जिनसे करीब एक लाख मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं — जिनमें अल्पसंख्यक और दलित समुदायों के मतदाता विशेष रूप से निशाने पर बताए जा रहे हैं। इस मामले में दो थानों में एफआईआर दर्ज करा दी गई है।

मुख्य आरोप और घटनाक्रम

कांग्रेस विधायक तनवीर सैत ने आरोप लगाया कि नरसिम्हा राजा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा प्रतिनिधियों ने बड़ी संख्या में फॉर्म-7 दाखिल किए हैं, जो मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए इस्तेमाल होता है। उन्होंने कहा, 'मेरे विधानसभा क्षेत्र में अल्पसंख्यक और दलित मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की गई है। लगभग एक लाख मतदाताओं के नाम मेरे निर्वाचन क्षेत्र से हटाने का प्रयास किया गया है।'

सैत ने यह भी बताया कि एक-एक मतदान केंद्र पर 100 से 200 तक आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं, और जिन लोगों ने ये फॉर्म भरे हैं, उनका उस क्षेत्र से कोई संबंध नहीं है।

एफआईआर और जांच की मांग

विधायक ने बताया कि उन्होंने इस मामले में दो थानों में शिकायत दर्ज कराई है और प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की जा चुकी है। उन्होंने मांग की है कि जल्द से जल्द जांच शुरू कर सच्चाई सामने लाई जाए। सैत ने कहा, '10 हजार से ज्यादा फॉर्म-7 दाखिल किए गए हैं। इसका इस्तेमाल सही है या गलत, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।'

भाजपा और RSS पर सीधा आरोप

तनवीर सैत ने इस पूरे मामले के लिए भाजपा और RSS को जिम्मेदार ठहराया। उनके अनुसार जहां-जहां कांग्रेस लगातार जीतती रही है, वहाँ इस तरह की रणनीति अपनाई जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि यह मुद्दा पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और बिहार समेत देशभर में चर्चा का विषय बन चुका है।

गौरतलब है कि फॉर्म-7 भारत निर्वाचन आयोग की वह प्रक्रिया है जिसके ज़रिए कोई भी नागरिक किसी मतदाता के नाम पर आपत्ति दर्ज करा सकता है। इस प्रक्रिया के दुरुपयोग के आरोप पहले भी कई राज्यों में लग चुके हैं।

व्यापक राजनीतिक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया चल रही है। कांग्रेस का कहना है कि अल्पसंख्यक और दलित मतदाताओं को व्यवस्थित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है, जो लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है। विपक्ष की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

आगे क्या होगा

एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस जांच शुरू होने की उम्मीद है। विधायक तनवीर सैत ने मांग की है कि चुनाव आयोग (ECI) इस मामले में दखल दे और दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करे। इस मामले के नतीजे आगामी चुनावों में मतदाता सूची की विश्वसनीयता को लेकर बड़ी बहस की ओर संकेत देते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 से अधिक आपत्तियां और एक-एक बूथ पर 200 तक फॉर्म दाखिल होना, यह सामान्य नागरिक प्रक्रिया नहीं लगती। असली सवाल यह है कि चुनाव आयोग इन आपत्तियों की जांच में कितनी सक्रियता दिखाएगा, और क्या फॉर्म भरने वालों का क्षेत्र से कोई वास्तविक संबंध साबित होता है। अल्पसंख्यक और दलित मतदाताओं को विशेष रूप से निशाना बनाने के आरोप — अगर जांच में सही साबित हुए — तो यह संवैधानिक लोकतंत्र के लिए एक गंभीर चुनौती होगी। मुख्यधारा की मीडिया अक्सर ऐसे मामलों को महज राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप बताकर छोड़ देती है, जबकि मतदाता सूची की शुचिता पर सवाल उठना हर नागरिक को प्रभावित करता है।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मैसूर मतदाता सूची विवाद क्या है?
मैसूर के नरसिम्हा राजा विधानसभा क्षेत्र में 10,000 से अधिक फॉर्म-7 दाखिल किए गए हैं, जिससे करीब एक लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने का खतरा है। कांग्रेस विधायक तनवीर सैत ने आरोप लगाया है कि इसमें विशेष रूप से अल्पसंख्यक और दलित मतदाताओं को निशाना बनाया गया है।
फॉर्म-7 क्या होता है और इसका दुरुपयोग कैसे होता है?
फॉर्म-7 भारत निर्वाचन आयोग की वह प्रक्रिया है जिसके जरिए कोई भी नागरिक किसी मतदाता के नाम पर आपत्ति दर्ज करा सकता है। बड़े पैमाने पर असंबंधित व्यक्तियों द्वारा एक ही क्षेत्र में फॉर्म भरना इसके दुरुपयोग का संकेत माना जाता है।
तनवीर सैत ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
कांग्रेस विधायक तनवीर सैत ने दो थानों में शिकायत दर्ज कराकर एफआईआर दर्ज कराई है। उन्होंने चुनाव आयोग से मामले में हस्तक्षेप और त्वरित जांच की मांग की है।
इस मामले में भाजपा और RSS पर क्या आरोप हैं?
कांग्रेस विधायक तनवीर सैत ने आरोप लगाया है कि भाजपा प्रतिनिधियों ने यह फॉर्म दाखिल किए हैं और इस पूरी कार्यवाही के पीछे भाजपा व RSS की रणनीति है। यह आरोप भाजपा या RSS की ओर से अभी तक खंडित नहीं किया गया है।
इस विवाद का आम मतदाताओं पर क्या असर पड़ सकता है?
अगर ये आपत्तियां स्वीकार की गईं, तो करीब एक लाख वैध मतदाता — विशेषकर अल्पसंख्यक और दलित — आगामी चुनावों में मतदान के अधिकार से वंचित हो सकते हैं। पुलिस जांच और चुनाव आयोग की समीक्षा के नतीजे इस मामले की दिशा तय करेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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