13 अगस्त 2026
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पलामू में नाबालिग से दुष्कर्म और दो बहनों को 'कैद' रखने पर बाबूलाल मरांडी का आक्रोश, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग

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पलामू में नाबालिग से दुष्कर्म और दो बहनों को 'कैद' रखने पर बाबूलाल मरांडी का आक्रोश, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग

सारांश

पलामू के सकलदीपा गांव में एक आदिवासी नाबालिग से दुष्कर्म और उसकी दो बहनों को महीनों कथित तौर पर 'कैद' रखने की घटना ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सीधे गांव पहुंचकर प्रशासन से निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की।

मुख्य बातें

बाबूलाल मरांडी ने 13 अगस्त को पलामू जिले के सकलदीपा गांव में पीड़ित परिवार से मुलाकात की।
आदिवासी नाबालिग के साथ फरवरी माह में दुष्कर्म का आरोप; आरोपी के परिजनों ने बाद में पीड़ित परिवार को धमकियां दीं।
पीड़ित परिवार की दो लड़कियों को कथित तौर पर जबरन उठाकर रांची सहित अन्य स्थानों पर महीनों रखा गया।
मरांडी ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच , पीड़ित परिवार की सुरक्षा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।
चतरा सांसद कालीचरण सिंह , पांकी विधायक शशिभूषण मेहता सहित BJP के कई नेता आक्रोश सभा में मौजूद रहे।

झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने गुरुवार, 13 अगस्त को पलामू जिले के पांकी विधानसभा क्षेत्र के सकलदीपा गांव पहुंचकर एक आदिवासी नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म और उसकी दो बहनों को कथित तौर पर महीनों तक 'कैद' में रखे जाने की घटना के विरोध में पीड़ित परिवार से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने फुलवरिया गांव में आयोजित आक्रोश सभा को संबोधित करते हुए राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए।

घटनाक्रम: क्या हुआ सकलदीपा में

मरांडी ने पीड़ित परिवार के हवाले से बताया कि फरवरी माह में नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म की घटना हुई। आरोपी के पकड़े जाने के बाद उसके परिजनों ने पीड़ित परिवार को धमकियां देना शुरू कर दिया। इसके बाद दो लड़कियों को जबरन उठाकर रांची सहित अन्य स्थानों पर महीनों तक कथित तौर पर रखा गया। उन्होंने कहा कि इस गांव में मात्र पाँच-छह आदिवासी परिवार निवास करते हैं और पीड़ित परिवार की बेटियों पर पहनावे को लेकर भी दबाव बनाए जाने का आरोप है।

मरांडी की प्रशासन से मांग

मरांडी ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि कार्रवाई ऐसी होनी चाहिए जिससे पीड़ित परिवार में न्यायिक व्यवस्था के प्रति भरोसा बहाल हो। साथ ही उन्होंने पीड़ित परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी अपील की।

सामाजिक पहचान और जबरदस्ती पर बयान

मरांडी ने स्पष्ट कहा कि किसी भी व्यक्ति या समूह को किसी दूसरे की धार्मिक या सामाजिक पहचान, रहन-सहन और संस्कृति में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा, 'ऐसे किसी भी दबाव या जबरदस्ती को स्वीकार नहीं किया जा सकता।' उन्होंने समाज के सभी वर्गों से ऐसे अपराधों की निंदा करने और दोषियों से दूरी बनाए रखने की अपील की।

आक्रोश सभा में कौन-कौन रहे मौजूद

इस अवसर पर चतरा के सांसद कालीचरण सिंह, पांकी विधायक शशिभूषण मेहता, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश महामंत्री मनोज सिंह, जिलाध्यक्ष अमित तिवारी सहित पार्टी के अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

आगे क्या होगा

मरांडी ने यह भी स्पष्ट किया कि अपराध चाहे किसी भी समुदाय या वर्ग के व्यक्ति द्वारा किया गया हो, उसके विरुद्ध समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब झारखंड में आदिवासी समुदायों की सुरक्षा और न्याय तक पहुंच को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। प्रशासन की प्रतिक्रिया और जांच की दिशा पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि झारखंड में आदिवासी समुदायों की सुरक्षा और न्याय तक पहुंच की व्यापक विफलता का प्रतीक है। विपक्ष का सीधे गांव पहुंचना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन असली सवाल यह है कि फरवरी में दुष्कर्म के बाद से अब तक प्रशासन ने पीड़ित परिवार की सुरक्षा के लिए क्या ठोस कदम उठाए। लड़कियों को महीनों कथित 'कैद' में रखे जाने के आरोप यदि सत्य हैं, तो यह पुलिस की निष्क्रियता या मिलीभगत का गंभीर संकेत है — जिसकी स्वतंत्र जांच अनिवार्य है।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पलामू के सकलदीपा गांव में क्या हुआ?
पीड़ित परिवार के अनुसार, फरवरी माह में एक आदिवासी नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म हुआ। आरोपी के पकड़े जाने के बाद उसके परिजनों ने पीड़ित परिवार को धमकियां दीं और बाद में दो लड़कियों को कथित तौर पर जबरन उठाकर रांची सहित अन्य स्थानों पर महीनों रखा गया।
बाबूलाल मरांडी ने आक्रोश सभा में क्या मांग की?
मरांडी ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, पीड़ित परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दोषियों के विरुद्ध कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि अपराध किसी भी समुदाय के व्यक्ति द्वारा किया गया हो, कार्रवाई समान रूप से होनी चाहिए।
क्या इस मामले में कोई गिरफ्तारी हुई है?
स्रोत के अनुसार दुष्कर्म का आरोपी पकड़ा गया, जिसके बाद उसके परिजनों ने पीड़ित परिवार को धमकियां दीं। लड़कियों को 'कैद' रखने के मामले में गिरफ्तारी की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
इस घटना में आदिवासी समुदाय की स्थिति क्या है?
मरांडी के अनुसार सकलदीपा गांव में मात्र पाँच-छह आदिवासी परिवार निवास करते हैं। पीड़ित परिवार की बेटियों पर पहनावे को लेकर भी दबाव बनाए जाने का आरोप है, जिसे मरांडी ने सांस्कृतिक पहचान में अस्वीकार्य हस्तक्षेप बताया।
आक्रोश सभा में कौन-से प्रमुख नेता शामिल हुए?
फुलवरिया गांव में आयोजित आक्रोश सभा में चतरा के सांसद कालीचरण सिंह, पांकी विधायक शशिभूषण मेहता, BJP के प्रदेश महामंत्री मनोज सिंह और जिलाध्यक्ष अमित तिवारी सहित पार्टी के कई पदाधिकारी उपस्थित रहे।
राष्ट्र प्रेस
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