नैनीताल के ओखलकांडा में देवगुरु बृहस्पति मंदिर: खुले आसमान तले विराजते हैं देवताओं के गुरु
सारांश
मुख्य बातें
नैनीताल जिले के ओखलकांडा क्षेत्र की पर्वत चोटियों पर स्थित देवगुरु बृहस्पति मंदिर उत्तराखंड की उन अनूठी धार्मिक धरोहरों में से एक है, जहाँ प्रकृति और आस्था का संगम देखने को मिलता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यही वह पावन स्थली है जहाँ देवगुरु बृहस्पति ने कठिन समय में तपस्या की थी और भगवान शिव की कृपा से उन्हें नवग्रहों में स्थान एवं देवताओं के 'गुरु' का सर्वोच्च पद प्राप्त हुआ था। गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026 को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मंदिर का वीडियो साझा कर इसके ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व को उजागर किया।
मुख्यमंत्री धामी का संदेश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर मंदिर का वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, 'नैनीताल जिले के ओखलकांडा इलाके में पहाड़ों की चोटियों के बीच बसा देवगुरु बृहस्पति मंदिर कई भक्तों की आस्था का केंद्र है। इस जगह को देवगुरु बृहस्पति की तपस्या का पवित्र स्थान भी माना जाता है।' उन्होंने आगे कहा, 'कुदरत की बेमिसाल सुंदरता और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरे इस पवित्र मंदिर में पहुंचकर मन को एक अनोखी शांति का अनुभव होता है। नैनीताल जिले में आने पर आपको भी इस पवित्र मंदिर में जरूर दर्शन करने चाहिए।'
पौराणिक महत्व और मान्यताएँ
मान्यता है कि यह पर्वत स्वयं देवताओं के गुरु बृहस्पति देव की मुख्य तपस्थली रहा है। जब भी देवताओं पर भारी संकट आता था या देवासुर संग्राम की परिस्थितियाँ बनती थीं, तब देवगुरु इसी शांत पर्वत पर आकर चिंतन और कठिन तपस्या करते थे। स्थानीय जनमानस में यह विश्वास गहराई से रचा-बसा है कि इसी स्थान पर की गई घोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें नवग्रहों में स्थान और 'गुरु' का सर्वोच्च पद प्रदान किया। इसी कारण इस चोटी को देवगुरु पर्वत के नाम से जाना जाता है।
खुले आसमान की अनोखी विशेषता
इस मंदिर की सबसे विलक्षण विशेषता यह है कि यहाँ स्थापित देवगुरु बृहस्पति की पिंडी खुले आकाश के नीचे विराजमान है — मंदिर के ऊपर कोई छत या आच्छादन नहीं है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, पूर्व में कई बार भव्य मंदिर निर्माण का प्रयास किया गया। किंतु जब भी पत्थरों की खुदाई की गई, हर बार सर्पों का झुंड निकला और पत्थर इतने भारी हो गए कि कोई उन्हें हिला भी न सका।
इन घटनाओं को भक्तों और स्थानीय लोगों ने देवगुरु का संकेत माना कि वे खुले आसमान के नीचे ही विराजमान रहना चाहते हैं। तब से कभी निर्माण कार्य नहीं हुआ, और यह खुला दरबार आज भी उसी रूप में श्रद्धालुओं को दर्शन देता है।
विद्यार्थियों और ज्ञान-साधकों का आस्था-केंद्र
देवगुरु बृहस्पति मंदिर को विद्यार्थियों, शिक्षकों और शिक्षा से जुड़े लोगों के लिए बुद्धि व ज्ञान का विशेष केंद्र माना जाता है। श्रद्धालु यहाँ कुंडली से गुरु दोष निवारण के लिए भी आते हैं। प्रत्येक गुरुवार को यहाँ विशेष पूजा का आयोजन होता है, जिसमें पीले वस्त्र, पीले फूल और चने की दाल अर्पित की जाती है — बृहस्पति ग्रह से जुड़ी पारंपरिक पूजा-सामग्री।
पर्यटन और आध्यात्मिक पर्यटन का संगम
नैनीताल अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। ओखलकांडा क्षेत्र में स्थित यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि आध्यात्मिक पर्यटन के इच्छुक लोगों के लिए भी एक महत्वपूर्ण गंतव्य बनता जा रहा है। दूर-दूर से श्रद्धालु मनोकामना-पूर्ति और दिव्य शांति के अनुभव के लिए यहाँ आते हैं। मुख्यमंत्री धामी के इस पोस्ट के बाद उम्मीद है कि मंदिर की ओर आस्थालुओं और पर्यटकों का रुझान और बढ़ेगा।