नैनीताल में बर्ड वॉचिंग ट्रेनिंग: पर्यटन विभाग देगा निःशुल्क प्रशिक्षण, 350 से अधिक पक्षी प्रजातियों का है क्षेत्र
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड के नैनीताल जिले में बर्ड टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पर्यटन विभाग स्थानीय युवाओं को निःशुल्क बर्ड वॉचिंग प्रशिक्षण देने की तैयारी कर रहा है। जिला पर्यटन अधिकारी कीर्ति चंद्र आर्य के अनुसार, यह पहल स्थानीय रोज़गार को नई दिशा देने के साथ-साथ पर्यटकों के अनुभव को भी समृद्ध बनाएगी। प्रशिक्षण दिसंबर 2026 के दूसरे सप्ताह तक आयोजित किए जाने का लक्ष्य है।
क्यों शुरू हो रही है यह पहल
जिला पर्यटन अधिकारी कीर्ति चंद्र आर्य ने बताया कि नैनीताल क्षेत्र में साढ़े तीन सौ से अधिक पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं। यहाँ की भौगोलिक विविधता के कारण अलग-अलग किस्म के पक्षी देखने को मिलते हैं, जो इस क्षेत्र को बर्डवॉचर्स के लिए एक आदर्श गंतव्य बनाती है।
हालाँकि, आर्य ने चिंता जताई कि यहाँ आने वाले पर्यटक अक्सर पक्षियों के नाम, उनकी विशेषताओं और उनके प्राकृतिक आवास के बारे में पर्याप्त जानकारी लेकर नहीं जाते। प्रशिक्षित गाइडों की कमी इस अनुभव को अधूरा छोड़ देती है। यह पहल इसी अंतर को पाटने का प्रयास है।
प्रशिक्षण का स्वरूप और पात्रता
कीर्ति चंद्र आर्य ने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम लगभग दस दिन का होगा, जिसमें 25 से 30 प्रतिभागियों के भाग लेने की संभावना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रशिक्षण पूरी तरह निःशुल्क होगा — आवेदक को आवास, भोजन और ट्रेनिंग सभी निःशुल्क प्रदान किए जाएँगे।
यह अवसर उन स्थानीय युवाओं और युवतियों के लिए खुला है जो पहले से गाइड का कार्य कर रहे हैं अथवा इस क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं। जिलाधिकारी के निर्देश पर इस प्रशिक्षण की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
आवेदन प्रक्रिया
आर्य के अनुसार, शीघ्र ही स्थानीय समाचार पत्रों में प्रेस नोट के माध्यम से आवेदन आमंत्रित किए जाएँगे। इच्छुक अभ्यर्थी इस विज्ञापन के ज़रिये आवेदन कर सकेंगे। पर्यटन विभाग का प्रयास है कि प्रशिक्षण दिसंबर 2026 के दूसरे सप्ताह से पहले आयोजित हो जाए, ताकि शीत पर्यटन सीज़न का पूरा लाभ उठाया जा सके।
आम जनता और पर्यटन पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड सरकार इको-टूरिज्म और टिकाऊ पर्यटन को बढ़ावा देने पर ज़ोर दे रही है। बर्ड वॉचिंग एक ऐसी गतिविधि है जो पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना स्थानीय अर्थव्यवस्था को सहारा देती है।
प्रशिक्षण के बाद, नए गाइड पर्यटकों को नैनीताल की जैव-विविधता — पक्षियों के नाम, उनके व्यवहार और आवास — के बारे में प्रामाणिक जानकारी दे सकेंगे। गौरतलब है कि बर्डवॉचिंग पर्यटन वैश्विक स्तर पर तेज़ी से बढ़ रहा है और भारत में भी इसकी माँग साल-दर-साल बढ़ रही है।
क्या होगा आगे
विभाग द्वारा अखबारों में आवेदन विज्ञापन जारी होने के बाद चयन प्रक्रिया शुरू होगी। प्रशिक्षण पूरा होने पर सर्टिफाइड गाइड न केवल स्थानीय पर्यटन केंद्रों पर सेवाएँ दे सकेंगे, बल्कि स्वतंत्र रूप से बर्ड वॉचिंग टूर भी संचालित कर सकेंगे। यह पहल नैनीताल को एक विशेष बर्ड टूरिज्म गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक ठोस कदम है।