भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर बोले — साजिश रचने वालों की सात पीढ़ियां याद रखेंगी, जंतर-मंतर प्रदर्शन पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक नंद किशोर गुर्जर ने 26 जुलाई को बागपत में कहा कि केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा किसी बाहरी दबाव का नतीजा नहीं, बल्कि उनका स्वैच्छिक निर्णय था। साथ ही गुर्जर ने जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन की प्रकृति पर तीखे सवाल उठाए और 20 जुलाई की हिंसा के पीछे साजिश का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी कि दोषियों को लंबे समय तक इसके परिणाम भुगतने होंगे।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर गुर्जर का बयान
गुर्जर ने स्पष्ट किया कि धर्मेंद्र प्रधान ने अपना इस्तीफा पूरी तरह स्वेच्छा से दिया है। उन्होंने कहा, 'हम छात्रों के साथ थे, उनके साथ हैं और आगे भी उनके साथ खड़े रहेंगे।' गुर्जर के अनुसार, BJP की प्रतिबद्धता छात्र हितों के प्रति अटल है।
जंतर-मंतर प्रदर्शन पर विवादित दावे
गुर्जर ने जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन को लेकर कई दावे किए — हालाँकि इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों में कोई भी NEET परीक्षार्थी नहीं था। उन्होंने यह भी दावा किया कि वहाँ भगवान राम के विरुद्ध नारेबाजी हुई और उसका कोई विरोध नहीं हुआ। गुर्जर ने कहा, 'जिस तरह नारे लगे, भगवान राम के खिलाफ अपशब्द बोले गए, अगर वहाँ हिंदू होते तो टकराव होता।'
साजिश का आरोप और कड़ी चेतावनी
गुर्जर ने 20 जुलाई की हिंसा को एक सुनियोजित साजिश करार देते हुए कहा कि इस मामले में व्यापक जाँच होगी। उन्होंने चेतावनी दी — 'जिन्होंने साजिश रचने की कोशिश की, उनकी सात पीढ़ियाँ भी याद रखेंगी।' उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री के आवास को घेरने का प्रयास किया और गृह मंत्री अमित शाह दिल्ली में मौजूद हैं — यह बात सभी को ध्यान में रखनी चाहिए।
कांग्रेस पर पलटवार
विपक्ष की आलोचना पर गुर्जर ने कहा कि पेपर लीक की समस्या कांग्रेस के शासनकाल की देन है। उन्होंने दावा किया, 'जब मैं उत्तर प्रदेश में छात्र संघ अध्यक्ष था, तब उत्तर पुस्तिकाएँ खुलेआम पड़ी मिलती थीं। प्रश्न पत्र तीन दिन पहले ही लीक हो जाते थे और पैसे देकर नौकरियाँ मिल जाती थीं।' गुर्जर ने यह भी रेखांकित किया कि जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकार है, वहाँ भी पेपर लीक के मामले सामने आए हैं।
आगे क्या
गुर्जर के बयानों के बाद 20 जुलाई की हिंसा और जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत हैं। जाँच एजेंसियाँ इस मामले में क्या कदम उठाती हैं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।