नांदेड़ में अवैध रेत खनन पर कार्रवाई: ₹3.15 करोड़ के उपकरण जब्त व नष्ट, 9 नावें विस्फोट से तबाह
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के नांदेड़ में पुलिस ने 16 अक्टूबर 2026 को गोदावरी नदी से अवैध रेत खनन के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाया, जिसमें कुल ₹3.15 करोड़ मूल्य के उपकरण और सामग्री जब्त कर नष्ट किए गए। पुलिस के आधिकारिक बयान के अनुसार, नदी तल पर संचालित अवैध खनन के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई।
अभियान का नेतृत्व और टीमें
नांदेड़ पुलिस अधीक्षक नीलाभ रोहन के निर्देश पर चलाए गए इस अभियान की बागडोर उपमंडल पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) माणिक बेंद्रे ने संभाली। अभियान में नांदेड़ ग्रामीण, एयरपोर्ट और मुदखेड़ पुलिस थानों की संयुक्त टीमों ने हिस्सा लिया। निगरानी की ज़िम्मेदारी पुलिस निरीक्षक अशोक जाधव, गणेश कराड और रामदास शिंदे ने अपनी-अपनी टीमों के साथ संभाली।
मुख्य घटनाक्रम: क्या-क्या नष्ट किया गया
अभियान के दौरान लोहे की नौ बड़ी नावें जब्त कर जिलेटिन की छड़ों से नियंत्रित विस्फोट के ज़रिए नष्ट की गईं। पुलिस के अनुसार, प्रत्येक नाव की कीमत ₹30 लाख थी और कुल मिलाकर इनका मूल्य ₹2.70 करोड़ आँका गया। विस्फोट से पहले आवश्यक दस्तावेज़ी प्रक्रिया पूरी की गई।
इसके अतिरिक्त ₹15 लाख मूल्य की एक छोटी नाव और ₹3.5 लाख की एक रेत निकालने वाली मशीन भी नष्ट की गई। ₹50,000 प्रति नाव की दर पर मूल्यांकित 23 तैरती हुई बेड़ियाँ — कुल ₹11.5 लाख मूल्य की — भी नष्ट की गईं।
पुलिस ने अवैध रूप से निकाली गई 58 ब्रास रेत भी नष्ट की। इन बेड़ियों और रेत की संयुक्त कीमत ₹14.40 लाख बताई गई। इसके साथ ही दो ब्रास रेत से लदे एक टिपर ट्रक को जब्त किया गया, जिसकी कीमत ₹12.10 लाख आँकी गई है।
कानूनी कार्रवाई
पुलिस के अनुसार, इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) सहित विभिन्न कानूनी प्रावधानों के तहत मामले दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। नांदेड़ ग्रामीण, मुदखेड़ और एयरपोर्ट पुलिस थानों में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र के कई ज़िलों में अवैध रेत माफिया के खिलाफ प्रशासन की सक्रियता बढ़ी है।
आगे भी जारी रहेगा अभियान
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अवैध खनन पर रोक लगाने, गोदावरी नदी के पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करने और सरकार को होने वाले राजस्व नुकसान को रोकने के लिए इस तरह के विशेष अभियान आगे भी जारी रहेंगे। गौरतलब है कि नदी तल की रेत का अवैध दोहन न केवल पर्यावरणीय क्षति पहुँचाता है, बल्कि सरकारी राजस्व को भी भारी नुकसान करता है।