नेशनल हेराल्ड केस: राहुल और सोनिया गांधी ने दिल्ली हाई कोर्ट में ईडी याचिका को बताया 'कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग'
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी ने 22 सितंबर 2026 को दिल्ली उच्च न्यायालय में नेशनल हेराल्ड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका के विरुद्ध अपना विस्तृत जवाब दाखिल किया। दोनों नेताओं ने अदालत से ईडी की याचिका खारिज करने की माँग करते हुए इसे 'कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग' करार दिया।
मुख्य कानूनी दलीलें
राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने अपने जवाब में तर्क दिया कि धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) का कोई भी प्रावधान 'निजी शिकायत' को ईडी की कार्रवाई का कानूनी आधार नहीं मानता। उन्होंने स्पष्ट किया कि डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी की 2013 की शिकायत मनी लॉन्ड्रिंग जाँच शुरू करने के लिए कानूनी तौर पर वैध आधार नहीं बन सकती।
गांधी परिवार की ओर से यह भी दलील दी गई कि ईडी की 2014 से 2021 तक की आंतरिक नोटिंग्स, 2015 का एक तकनीकी परिपत्र, और वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) में ईडी के अपने ही सबमिशन — ये सभी दस्तावेज़ यह प्रदर्शित करते हैं कि ईडी खुद इस मत का था कि आगे बढ़ने से पहले एफआईआर दर्ज होना आवश्यक है।
ईडी की कार्रवाई की टाइमिंग पर सवाल
जवाब में ईडी द्वारा की गई कार्रवाई की टाइमिंग को भी निशाने पर लिया गया। दोनों नेताओं ने रेखांकित किया कि ईडी ने ट्रायल कोर्ट के 16 दिसंबर के आदेश के 24 घंटे के भीतर ही दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दे दी, जबकि ऐसे मामलों में सामान्यतः आंतरिक अनुमोदन प्रक्रिया का पालन किया जाता है। इस त्वरित कदम को उन्होंने असामान्य बताया।
पीएमएलए और अभियोजन का विरोधाभास
गांधी परिवार ने तर्क दिया कि इस मामले में पीएमएलए के तहत अभियोजन चलाने से एक विरोधाभासी स्थिति उत्पन्न होगी, जिसमें ईडी को किसी सार्थक जाँच के अभाव में अनुसूचित अपराध की जाँच का अधिकार लेना पड़ेगा — जो उनके अनुसार 'अधिनियम की योजना के बिल्कुल विपरीत' है। उन्होंने यह भी दोहराया कि ईडी का वर्षों से यही स्थापित रुख रहा है कि एफआईआर के अभाव में पीएमएलए के तहत संज्ञान नहीं लिया जा सकता।
नेशनल हेराल्ड केस की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि इस मामले में ईडी ने आरोप लगाए हैं कि गांधी परिवार ने कांग्रेस के कुछ अन्य पदाधिकारियों के साथ मिलकर एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की करीब ₹2,000 करोड़ की संपत्ति हड़पने के लिए कथित आपराधिक साजिश रची। एजेएल एक सार्वजनिक गैर-सूचीबद्ध कंपनी है और ऐतिहासिक अखबार 'नेशनल हेराल्ड' की प्रकाशक रही है।
यह ऐसे समय में आया है जब नेशनल हेराल्ड प्रकरण वर्षों से राजनीतिक और कानूनी घमासान का केंद्र रहा है। अब दिल्ली उच्च न्यायालय में दाखिल इस जवाब के बाद मामले की अगली सुनवाई पर सभी की नज़रें टिकी रहेंगी।