22 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

नेशनल हेराल्ड केस: राहुल और सोनिया गांधी ने दिल्ली हाई कोर्ट में ईडी याचिका को बताया 'कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
नेशनल हेराल्ड केस: राहुल और सोनिया गांधी ने दिल्ली हाई कोर्ट में ईडी याचिका को बताया 'कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग'

सारांश

नेशनल हेराल्ड केस में राहुल और सोनिया गांधी ने दिल्ली उच्च न्यायालय में ईडी की याचिका को सीधे चुनौती दी — पीएमएलए में निजी शिकायत की वैधता, ईडी की खुद की आंतरिक नोटिंग्स और ट्रायल कोर्ट के आदेश के 24 घंटे के भीतर की गई अपील की टाइमिंग को लेकर तीखे सवाल उठाए।

मुख्य बातें

राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने 22 सितंबर 2026 को दिल्ली उच्च न्यायालय में नेशनल हेराल्ड केस में ईडी याचिका के खिलाफ जवाब दाखिल किया।
दोनों नेताओं ने ईडी की याचिका को 'कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग' बताते हुए खारिज करने की माँग की।
सुब्रमण्यम स्वामी की 2013 की निजी शिकायत पीएमएलए के तहत मनी लॉन्ड्रिंग जाँच का वैध आधार नहीं बन सकती।
ईडी की 2014-2021 की आंतरिक नोटिंग्स और एफएटीएफ सबमिशन का हवाला देते हुए कहा कि ईडी खुद एफआईआर को अनिवार्य मानता था।
ट्रायल कोर्ट के 16 दिसंबर के आदेश के 24 घंटे के भीतर हाई कोर्ट में अपील की टाइमिंग पर सवाल उठाए।
ईडी का आरोप है कि गांधी परिवार ने एजेएल की ₹2,000 करोड़ की संपत्ति हड़पने की कथित साजिश रची।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी ने 22 सितंबर 2026 को दिल्ली उच्च न्यायालय में नेशनल हेराल्ड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका के विरुद्ध अपना विस्तृत जवाब दाखिल किया। दोनों नेताओं ने अदालत से ईडी की याचिका खारिज करने की माँग करते हुए इसे 'कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग' करार दिया।

मुख्य कानूनी दलीलें

राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने अपने जवाब में तर्क दिया कि धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) का कोई भी प्रावधान 'निजी शिकायत' को ईडी की कार्रवाई का कानूनी आधार नहीं मानता। उन्होंने स्पष्ट किया कि डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी की 2013 की शिकायत मनी लॉन्ड्रिंग जाँच शुरू करने के लिए कानूनी तौर पर वैध आधार नहीं बन सकती।

गांधी परिवार की ओर से यह भी दलील दी गई कि ईडी की 2014 से 2021 तक की आंतरिक नोटिंग्स, 2015 का एक तकनीकी परिपत्र, और वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) में ईडी के अपने ही सबमिशन — ये सभी दस्तावेज़ यह प्रदर्शित करते हैं कि ईडी खुद इस मत का था कि आगे बढ़ने से पहले एफआईआर दर्ज होना आवश्यक है।

ईडी की कार्रवाई की टाइमिंग पर सवाल

जवाब में ईडी द्वारा की गई कार्रवाई की टाइमिंग को भी निशाने पर लिया गया। दोनों नेताओं ने रेखांकित किया कि ईडी ने ट्रायल कोर्ट के 16 दिसंबर के आदेश के 24 घंटे के भीतर ही दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दे दी, जबकि ऐसे मामलों में सामान्यतः आंतरिक अनुमोदन प्रक्रिया का पालन किया जाता है। इस त्वरित कदम को उन्होंने असामान्य बताया।

पीएमएलए और अभियोजन का विरोधाभास

गांधी परिवार ने तर्क दिया कि इस मामले में पीएमएलए के तहत अभियोजन चलाने से एक विरोधाभासी स्थिति उत्पन्न होगी, जिसमें ईडी को किसी सार्थक जाँच के अभाव में अनुसूचित अपराध की जाँच का अधिकार लेना पड़ेगा — जो उनके अनुसार 'अधिनियम की योजना के बिल्कुल विपरीत' है। उन्होंने यह भी दोहराया कि ईडी का वर्षों से यही स्थापित रुख रहा है कि एफआईआर के अभाव में पीएमएलए के तहत संज्ञान नहीं लिया जा सकता।

नेशनल हेराल्ड केस की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि इस मामले में ईडी ने आरोप लगाए हैं कि गांधी परिवार ने कांग्रेस के कुछ अन्य पदाधिकारियों के साथ मिलकर एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की करीब ₹2,000 करोड़ की संपत्ति हड़पने के लिए कथित आपराधिक साजिश रची। एजेएल एक सार्वजनिक गैर-सूचीबद्ध कंपनी है और ऐतिहासिक अखबार 'नेशनल हेराल्ड' की प्रकाशक रही है।

यह ऐसे समय में आया है जब नेशनल हेराल्ड प्रकरण वर्षों से राजनीतिक और कानूनी घमासान का केंद्र रहा है। अब दिल्ली उच्च न्यायालय में दाखिल इस जवाब के बाद मामले की अगली सुनवाई पर सभी की नज़रें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

आक्रामक है — ईडी के अपने आंतरिक दस्तावेजों को ही उसके विरुद्ध हथियार बनाना एक सुविचारित कदम है। असली सवाल यह है कि यदि ईडी ने वर्षों तक यह माना कि एफआईआर के बिना पीएमएलए कार्रवाई नहीं हो सकती, तो फिर इस मामले में अपवाद क्यों — यह सवाल अदालत के सामने भी है और जनता के सामने भी। ट्रायल कोर्ट के आदेश के 24 घंटे के भीतर हाई कोर्ट जाने की असाधारण तत्परता पर जो सवाल उठाए गए हैं, वे प्रक्रियागत स्वतंत्रता की बड़ी बहस को भी छूते हैं। नेशनल हेराल्ड केस अब केवल एक संपत्ति विवाद नहीं रहा — यह इस बात की परीक्षा बन गया है कि जाँच एजेंसियाँ राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामलों में प्रक्रियागत मानकों का पालन करती हैं या नहीं।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेशनल हेराल्ड केस में राहुल और सोनिया गांधी ने दिल्ली हाई कोर्ट में क्या जवाब दाखिल किया?
राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने 22 सितंबर 2026 को दिल्ली उच्च न्यायालय में ईडी की याचिका को 'कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग' बताते हुए खारिज करने की माँग की। उन्होंने तर्क दिया कि पीएमएलए में कोई प्रावधान निजी शिकायत को ईडी कार्रवाई का आधार नहीं मानता।
नेशनल हेराल्ड केस क्या है और ईडी के क्या आरोप हैं?
इस मामले में ईडी ने आरोप लगाया है कि गांधी परिवार और कांग्रेस के कुछ पदाधिकारियों ने मिलकर एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की करीब ₹2,000 करोड़ की संपत्ति हड़पने की कथित आपराधिक साजिश रची। एजेएल ऐतिहासिक 'नेशनल हेराल्ड' अखबार की प्रकाशक कंपनी है।
गांधी परिवार ने ईडी की टाइमिंग पर क्या सवाल उठाए?
गांधी परिवार ने रेखांकित किया कि ईडी ने ट्रायल कोर्ट के 16 दिसंबर के आदेश के महज 24 घंटे के भीतर दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दे दी, जबकि ऐसे मामलों में सामान्यतः आंतरिक अनुमोदन की आवश्यकता होती है। उन्होंने इसे असामान्य और संदेहास्पद बताया।
गांधी परिवार ने ईडी के अपने ही दस्तावेजों का हवाला क्यों दिया?
जवाब में ईडी की 2014 से 2021 तक की आंतरिक नोटिंग्स, 2015 के तकनीकी परिपत्र और एफएटीएफ सबमिशन का उल्लेख किया गया, जो यह दर्शाते हैं कि ईडी खुद मानता था कि एफआईआर दर्ज हुए बिना पीएमएलए कार्रवाई नहीं हो सकती। इस तर्क से यह दिखाने की कोशिश की गई कि ईडी अपनी ही स्थापित मान्यताओं के विरुद्ध काम कर रहा है।
डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी की शिकायत इस मामले में कैसे जुड़ी है?
डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने 2013 में इस मामले में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसे ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग जाँच का आधार बनाया। गांधी परिवार का तर्क है कि पीएमएलए के तहत एक निजी शिकायत मात्र से ईडी कार्रवाई का कोई कानूनी आधार नहीं बनता और इसके लिए एफआईआर का दर्ज होना अनिवार्य था।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 6 महीने पहले
  3. 9 महीने पहले
  4. 9 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले