गंगा दशहरा पर उज्जैन के रामघाट पर भारतीय नौसेना बैंड की सुरीली प्रस्तुति, CM मोहन यादव ने की शिप्रा परिक्रमा
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के उज्जैन में 26 मई को गंगा दशहरा के पावन अवसर पर रामघाट पर एक अविस्मरणीय शाम का आयोजन हुआ, जब मुंबई से आए भारतीय नौसेना के बैंड ने अपनी मनमोहक धुनों से हज़ारों श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्वयं शिप्रा तीर्थ परिक्रमा में भाग लेकर इस धार्मिक-सांस्कृतिक उत्सव की शोभा बढ़ाई।
मुख्य घटनाक्रम
मंगलवार को शिप्रा नदी के तट पर आयोजित दो दिवसीय शिप्रा तीर्थ परिक्रमा का समापन हुआ, जिसमें हज़ारों श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। मुख्यमंत्री यादव ने विधिवत पूजन-अर्चन कर मोक्षदायिनी माँ शिप्रा में चुनरी अर्पित की।
इस अवसर पर मुंबई से विशेष रूप से आए भारतीय नौसेना के बैंड ने रामघाट पर अपनी प्रस्तुति दी। बैंड के सदस्यों ने संगीतमय कार्यक्रम के ज़रिए रामघाट पर उपस्थित नागरिकों को सुरीली धुनें सुनाकर इस शाम को यादगार बना दिया।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन सहित प्रदेशभर में गंगा दशहरा हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना के बैंड की प्रस्तुति ने सभी उपस्थित लोगों को आनंदित किया और इस उत्सव को विशेष बना दिया।
जल संरक्षण अभियान की उपलब्धि
इस अवसर पर मुख्यमंत्री यादव ने जल गंगा संरक्षण अभियान की प्रगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि प्रदेशभर में प्रमुख तालाब, कुएँ, बावड़ी, पोखर और नदियों के उद्गम स्थलों पर जनसहयोग से जल संचयन का कार्य जारी है। उनके अनुसार अब तक लगभग 2 लाख से अधिक कार्य पूरे किए जा चुके हैं और जल संरक्षण की दिशा में मध्य प्रदेश देशभर में पहले स्थान पर है।
उपस्थित गणमान्य व्यक्ति
इस कार्यक्रम में राज्यसभा सदस्य महंत उमेश नाथ महाराज, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, विधायक जितेंद्र पंड्या, उज्जैन महापौर मुकेश टटवाल, उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष नवीन सोलंकी, नगर निगम सभापति कलावती यादव, जिलाध्यक्ष जगदीश अग्रवाल, ग्रामीण जिलाध्यक्ष राजेश धाकड़ और अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य रामलाल मालवीय सहित अनेक निगम-मंडलों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
आगे की राह
गंगा दशहरा और शिप्रा परिक्रमा जैसे आयोजन उज्जैन की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान को और सुदृढ़ करते हैं। भारतीय नौसेना के बैंड की उपस्थिति ने इस वर्ष के उत्सव में राष्ट्रीय गौरव का एक नया आयाम जोड़ा, जो आने वाले वर्षों में भी इस परंपरा को नई ऊँचाइयाँ देने का संकेत देता है।