58 शहरों के विकास के लिए नवयुग पालिका योजना, सड़क और चीनी मिल विस्तार को मिली मंजूरी
सारांश
Key Takeaways
- 58 नगरीय निकायों का समग्र विकास
- सड़क चौड़ीकरण और रेल उपरिगामी सेतु का निर्माण
- चीनी मिल की पेराई क्षमता में वृद्धि
- प्रति वर्ष 583.20 करोड़ रुपए का खर्च
- वित्तीय अवधि 2025-26 से 2029-30 तक
लखनऊ, 23 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में शहरी विकास को नई दिशा देने और बुनियादी ढांचे के विकास से संबंधित कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई। नगर विकास मंत्री एके शर्मा ने जानकारी दी कि नवयुग पालिका योजना के अंतर्गत 58 जिला मुख्यालयों के नगरीय निकायों के समग्र विकास, सिद्धार्थनगर में नार्थ-साउथ कॉरिडोर सड़क चौड़ीकरण, बलरामपुर में रेल उपरिगामी सेतु के निर्माण और बागपत में चीनी मिल की क्षमता विस्तार जैसे महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगाई गई।
बैठक में नवयुग पालिका योजना को मंजूरी देते हुए सरकार ने जिला मुख्यालयों के नगरीय निकायों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने का एक ठोस रोडमैप तय किया है। इस योजना के तहत कुल 58 निकायों का चयन किया गया है, जिसमें 55 नगरपालिका परिषदें और 3 नगर पंचायतें शामिल हैं। इन शहरों में स्मार्ट सिटी की आधारभूत संरचनाओं का बहुउद्देशीय उपयोग कर डिजिटल गवर्नेंस, ईज ऑफ लिविंग और संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा दिया जाएगा।
सरकार इस योजना पर प्रति वर्ष 583.20 करोड़ रुपए और पांच वर्षों में कुल 2916 करोड़ रुपए खर्च करने की योजना बना रही है। यह योजना पूरी तरह से राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित होगी, और इसका कार्यकाल वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2029-30 तक रहेगा।
कैबिनेट ने सिद्धार्थनगर जनपद में बर्डपुर-पिपरहवा मार्ग (लंबाई 9.4 किमी) को नार्थ-साउथ कॉरिडोर के तहत चार लेन में चौड़ा करने और सुदृढ़ीकरण के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। इस परियोजना की लागत लगभग 26149.63 लाख रुपए है, जिससे पर्यटन, व्यापार, शिक्षा और भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में आवागमन को नई मजबूती मिलेगी।
इसके अलावा, बलरामपुर में राष्ट्रीय राजमार्ग-730 पर गोण्डा-बलरामपुर रेल खंड के बीच स्थित समपार संख्या-136 पर दो लेन के रेल उपरिगामी सेतु के निर्माण को स्वीकृति दी गई है। यह सेतु लगभग 29221.35 लाख रुपए की लागत से बनेगा, जिससे शहर में यातायात की समस्याओं में सुधार होगा। बागपत की सहकारी चीनी मिल की पेराई क्षमता को 2500 टीसीडी से बढ़ाकर 5000 टीसीडी करने के फैसले से गन्ना किसानों को लाभ और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।