नक्सल मुक्त पोलमपल्ली में तीन महीने के भीतर खुली स्थायी राशन दुकान, सुकमा के ग्रामीणों को मिली खाद्य सुरक्षा
सारांश
मुख्य बातें
सुकमा जिले के पोलमपल्ली गांव में नक्सल मुक्त होने के महज तीन महीने के भीतर एक स्थायी राशन दुकान शुरू कर दी गई है, जिससे दशकों से बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहे ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है। छत्तीसगढ़ के इस सुदूर गांव में यह कदम सरकार की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत नक्सल प्रभाव से मुक्त हुए इलाकों में विकास की नींव तेज़ी से रखी जा रही है।
पहले क्या थी स्थिति
नक्सल प्रभाव के दौर में पोलमपल्ली के ग्रामीणों को राशन के लिए पंचायत भवन या स्कूल में लगाई गई अस्थायी व्यवस्था पर निर्भर रहना पड़ता था। लोगों को घंटों लंबी लाइन में खड़ा रहना पड़ता था और वितरण में बार-बार असुविधाओं का सामना करना पड़ता था। बुनियादी खाद्य सुरक्षा तक पहुँच भी अनिश्चित बनी रहती थी।
अब क्या बदला
गांव में अब अपनी अलग और स्थायी राशन दुकान खुल गई है। एक स्थानीय निवासी ने राष्ट्र प्रेस को बताया कि अब उन्हें घंटों लाइन में खड़े रहने की जरूरत नहीं पड़ती और समय पर अनाज आसानी से मिल जाता है। राशन दुकान के सेल्समैन के अनुसार, वह रोज़ाना करीब 30 से 35 राशन कार्डधारकों को राशन वितरित करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि राशन कार्ड मिलने के बाद उन्हें अच्छी गुणवत्ता का अनाज मिल रहा है।
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का लाभ
यह सुविधा प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत दी जा रही है। केंद्र सरकार की इस प्रमुख खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत देश के लगभग 80 करोड़ पात्र राशन कार्डधारकों को मुफ्त अनाज उपलब्ध कराया जाता है। अंत्योदय अन्न योजना और प्राथमिकता वाले परिवार श्रेणी के लाभार्थियों को हर महीने प्रति व्यक्ति 5 किलो मुफ्त चावल या गेहूं दिया जाता है। इसके साथ ही लाभार्थियों को पोषणयुक्त फोर्टिफाइड चावल भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
योजना की समयसीमा और विस्तार
सरकार ने इस योजना को 1 जनवरी 2024 से अगले पाँच वर्षों यानी दिसंबर 2028 तक बढ़ा दिया है। यह योजना 'एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड' व्यवस्था के तहत काम करती है, जिससे लाभार्थी देश में कहीं भी अपने राशन कार्ड का उपयोग कर मुफ्त अनाज प्राप्त कर सकते हैं। यह व्यवस्था प्रवासी मज़दूरों और दूरदराज़ के इलाकों के निवासियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।
विकास और विश्वास की नई पहचान
पोलमपल्ली में खुली यह राशन दुकान ग्रामीणों के लिए केवल एक खाद्य वितरण केंद्र नहीं है — यह उस बदलाव की प्रतीक है जो नक्सल मुक्ति के बाद इस इलाके में आ रही है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब सरकार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास को सुरक्षा रणनीति का अभिन्न हिस्सा बना रही है। आने वाले महीनों में इस गांव में और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की उम्मीद जताई जा रही है।