देहरादून में NCB की JCC बैठक: नेपाल तस्करी मार्गों और डार्कनेट पर कसेगा शिकंजा
सारांश
मुख्य बातें
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने 10 अक्टूबर 2026 को देहरादून में उत्तराखंड के लिए त्रैमासिक राज्य स्तरीय संयुक्त समन्वय समिति (JCC) की बैठक आयोजित की, जिसमें मादक पदार्थों की तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए अंतर-एजेंसी सहयोग को सुदृढ़ करने की रणनीतियों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। अधिकारियों के अनुसार, यह बैठक ऐसे समय में हुई जब केंद्र सरकार ने 31 दिसंबर 2026 तक नशीले पदार्थों के व्यापार को जड़ से समाप्त करने का संकल्प लिया है।
बैठक में कौन-कौन शामिल हुए
NCB उत्तरी क्षेत्र के उप महानिदेशक की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में कई प्रमुख केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इनमें राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI), प्रवर्तन निदेशालय (ED), आयकर विभाग, सशस्त्र सीमा बल (SSB), खुफिया ब्यूरो (IB), उत्तराखंड एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) और खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के प्रतिनिधि सम्मिलित थे।
मुख्य चर्चा बिंदु
बैठक में नेपाल से जुड़े तस्करी मार्गों, सीमावर्ती क्षेत्रों में नशीले पदार्थों की आवाजाही और तस्करों के उभरते तौर-तरीकों पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके अलावा, गुप्त प्रयोगशालाओं का पता लगाने, वित्तीय जांच, PIT-NDPS प्रावधानों और मादक पदार्थ नियंत्रण विजन डॉक्यूमेंट (2026-29) के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विचार-विमर्श किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि बैठक में NDPS अदालतों की स्थापना, डार्कनेट और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से होने वाले नशीले पदार्थों के लेन-देन की जांच में क्षमता निर्माण और एजेंसियों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने के तंत्र की समीक्षा भी की गई।
ओडिशा-उत्तराखंड गांजा नेटवर्क पर विशेष ध्यान
बैठक में उत्तराखंड ANTF को एक विशेष निर्देश दिया गया — पिछले पाँच वर्षों के उन प्रमुख गांजा मामलों को संकलित करने का आग्रह किया गया जिनमें ओडिशा आपूर्ति के स्रोत के रूप में सामने आया हो। इसके साथ ही, आपूर्ति नेटवर्क को स्रोत पर ही नष्ट करने के लिए ओडिशा के अधिकारियों के साथ समन्वय बनाने को कहा गया।
गौरतलब है कि यह दृष्टिकोण 'सोर्स-टू-डेस्टिनेशन' रणनीति का हिस्सा है, जो केवल अंतिम बिंदु पर कार्रवाई करने की बजाय उत्पादन और आपूर्ति शृंखला की जड़ पर प्रहार करने पर केंद्रित है।
ANTF राष्ट्रीय सम्मेलन की पृष्ठभूमि
पिछले महीने NCB द्वारा 'एकजुट संकल्प, साझा जिम्मेदारी' विषय पर आयोजित ANTF प्रमुखों के तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मादक पदार्थों को देश और विश्व के सामने सबसे गंभीर खतरों में से एक बताया था। इस दो दिवसीय कार्यक्रम में 36 राज्यों और जम्मू-कश्मीर के ANTF प्रमुखों सहित विभिन्न विभागों के हितधारक शामिल हुए थे।
शाह ने 31 दिसंबर 2026 तक भारत से नशीले पदार्थों के व्यापार को समाप्त करने का दृढ़ संकल्प व्यक्त करते हुए कहा था कि 2047 तक विकसित भारत के निर्माण और भावी पीढ़ियों की सुरक्षा के लिए 'नशा मुक्त भारत' अत्यावश्यक है। उक्त सम्मेलन में विजन डॉक्यूमेंट के चार रणनीतिक स्तंभों — परिभाषित जिम्मेदारियाँ, समय-सीमा, निगरानी तंत्र और पुनर्वास — पर तकनीकी सत्र भी आयोजित किए गए।
आगे की राह
देहरादून की यह JCC बैठक उस व्यापक राष्ट्रीय रूपरेखा का हिस्सा है जिसमें केंद्र और राज्य स्तर की एजेंसियाँ एक समन्वित ढाँचे के तहत काम करें। विशेषज्ञों का मानना है कि डार्कनेट और क्रिप्टोकरेंसी के उभरते माध्यमों से निपटने के लिए तकनीकी क्षमता निर्माण और अंतर-राज्यीय खुफिया सहयोग ही इस लड़ाई में निर्णायक भूमिका निभाएँगे।