24 अक्टूबर 2026
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राजस्थान में NCB की JCC बैठक: ड्रग तस्करी के खिलाफ 10 एजेंसियों की संयुक्त रणनीति मजबूत

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राजस्थान में NCB की JCC बैठक: ड्रग तस्करी के खिलाफ 10 एजेंसियों की संयुक्त रणनीति मजबूत

सारांश

राजस्थान में NCB की तीसरी तिमाही JCC बैठक महज़ एक रूटीन समीक्षा नहीं थी — यह पश्चिमी भारत में ड्रग तस्करी के बढ़ते नेटवर्क के खिलाफ 10 से अधिक केंद्रीय और राज्य एजेंसियों की एकजुट कार्रवाई की तस्वीर थी। 'नारकोटिक्स विजन डॉक्यूमेंट 2026-29' के तहत प्रवर्तन को और तेज़ करने का संकल्प लिया गया।

मुख्य बातें

NCB ने 24 अक्टूबर 2026 को जयपुर में राजस्थान की 2026 तीसरी तिमाही JCC बैठक आयोजित की।
बैठक में NIA, ED, DRI, CBN, कस्टम्स, IB सहित 10 से अधिक केंद्रीय और राज्य एजेंसियों ने भाग लिया।
ड्रग तस्करी नेटवर्क, अवैध प्रयोगशालाओं के भंडाफोड़ और अफीम व पोस्ता भूसे के अवैध डायवर्जन पर विशेष चर्चा हुई।
'नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट (2026-29)' के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रवर्तन में तेज़ी लाने का संकल्प लिया गया।
इससे पहले अगस्त 2026 में गुजरात के लिए दूसरी तिमाही JCC बैठक हुई थी, जिसकी अध्यक्षता मनीष कुमार (DDG, NCB पश्चिमी क्षेत्र) ने की थी।

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने 24 अक्टूबर 2026 को जयपुर में राजस्थान के लिए वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही की राज्य-स्तरीय संयुक्त समन्वय समिति (JCC) बैठक आयोजित की, जिसमें खुफिया जानकारी साझा करने, वित्तीय जाँच और समन्वित प्रवर्तन कार्रवाई को और धारदार बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई। ड्रग तस्करी नेटवर्क और अवैध प्रयोगशालाओं के भंडाफोड़ से लेकर अफीम व पोस्ता भूसे के अवैध डायवर्जन को रोकने तक — बैठक का एजेंडा व्यापक और बहु-आयामी था।

बैठक का स्वरूप और भागीदारी

इस बैठक की संयुक्त अध्यक्षता NCB (पश्चिमी क्षेत्र) के उप महानिदेशक (DDG) और राजस्थान के आईजी, एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने की। बैठक में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA), प्रवर्तन निदेशालय (ED), राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI), केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN), कस्टम्स, आयकर विभाग, खुफिया ब्यूरो (IB), सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, ड्रग कंट्रोलर कार्यालय, राज्य ANTF और अन्य एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी की।

अधिकारियों के अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में केंद्रीय और राज्य एजेंसियों की एक साथ उपस्थिति इस बात का संकेत है कि राजस्थान में ड्रग तस्करी से निपटने के लिए बहु-स्तरीय दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है।

मुख्य घटनाक्रम और एजेंडा

आधिकारिक बयान के अनुसार, बैठक में निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा हुई — विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल को मजबूत करना; NDPS (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस) से जुड़े अहम मामलों की समीक्षा; ड्रग तस्करी नेटवर्क और अवैध प्रयोगशालाओं का भंडाफोड़; बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थों की जब्ती; बार-बार अपराध करने वालों को मिली जमानत की निगरानी; और नशा मुक्ति केंद्रों की स्थिति की समीक्षा।

बयान में यह भी कहा गया कि 'नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट (2026-29)' के तहत तय लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रवर्तन उपायों में तेज़ी लाने का संकल्प लिया गया। संयुक्त पूछताछ और खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान के ज़रिये ड्रग तस्करी गिरोहों को समाप्त करने पर विशेष ज़ोर दिया गया।

गुजरात JCC बैठक से तुलना

गौरतलब है कि इससे पहले अगस्त 2026 में पड़ोसी राज्य गुजरात के लिए 2026 की दूसरी तिमाही की JCC बैठक आयोजित की गई थी। उस बैठक की अध्यक्षता NCB के उप महानिदेशक (पश्चिमी क्षेत्र) मनीष कुमार ने की थी, जबकि खुफिया ब्यूरो (IB) के अतिरिक्त निदेशक राजीव अहीर ने सह-अध्यक्षता संभाली थी।

गुजरात बैठक में भी राज्य ANTF, DRI, NIA, कस्टम्स, सीमा सुरक्षा बल (BSF), भारतीय तटरक्षक बल (ICG), केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) और राज्य ड्रग कंट्रोलर के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। उस बैठक में भी अंतर-राज्यीय और अंतर-एजेंसी समन्वय पर ध्यान केंद्रित किया गया था।

NDPS मामलों की प्रस्तुति

NCB ने गुजरात JCC बैठक में NDPS से जुड़े दो अहम मामले प्रस्तुत किए, जिनमें काम करने के तरीके, अंतर-राज्यीय संबंधों और जाँच की स्थिति पर विस्तृत चर्चा हुई। वहीं, DRI ने भी एक महत्वपूर्ण NDPS मामला रखा, जिसमें तस्करी के पैटर्न और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की आवश्यकता को रेखांकित किया गया।

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी भारत में ड्रग तस्करी के मार्गों पर अंकुश लगाना केंद्र सरकार की प्राथमिकता बनी हुई है। NCB की त्रैमासिक JCC बैठकों की यह श्रृंखला 'नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-29' के क्रियान्वयन का हिस्सा है।

आगे की राह

बैठक में सभी एजेंसियों ने राजस्थान में ड्रग तस्करी और संगठित नशीले पदार्थों के नेटवर्क के विरुद्ध मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई। पिछली JCC बैठक की 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' की समीक्षा भी बैठक के प्रमुख बिंदुओं में शामिल रही। अधिकारियों के अनुसार, अफीम और पोस्ता भूसे के अवैध डायवर्जन को रोकने के लिए विशेष निगरानी तंत्र को और सुदृढ़ किया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि इन बैठकों में हुई चर्चाएँ ज़मीनी गिरफ्तारियों और जब्ती के आँकड़ों में कितनी तब्दील होती हैं। बार-बार अपराध करने वालों को मिली जमानत की निगरानी का एजेंडे में शामिल होना यह दर्शाता है कि न्यायिक प्रक्रिया और प्रवर्तन के बीच की खाई अभी भी चुनौती बनी हुई है। पश्चिमी भारत के राजस्थान और गुजरात — दोनों राज्यों में एक के बाद एक JCC बैठकें यह संकेत देती हैं कि समुद्री और स्थलीय दोनों मार्गों पर ड्रग तस्करी का दबाव बढ़ा है। बिना सार्वजनिक जवाबदेही और पारदर्शी परिणाम-रिपोर्टिंग के, ये बैठकें केवल समन्वय का प्रतीक बनकर रह सकती हैं।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

NCB की राजस्थान JCC बैठक क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की संयुक्त समन्वय समिति (JCC) बैठक एक त्रैमासिक मंच है जिसमें केंद्रीय और राज्य स्तर की एजेंसियाँ ड्रग तस्करी के खिलाफ संयुक्त रणनीति बनाती हैं। 24 अक्टूबर 2026 को जयपुर में आयोजित यह राजस्थान की 2026 की तीसरी तिमाही की बैठक थी, जिसमें 10 से अधिक एजेंसियों ने भाग लिया।
इस बैठक में कौन-कौन सी एजेंसियाँ शामिल हुईं?
बैठक में NIA, ED, DRI, CBN, कस्टम्स, आयकर विभाग, IB, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, ड्रग कंट्रोलर कार्यालय और राज्य ANTF सहित अनेक एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक की संयुक्त अध्यक्षता NCB (पश्चिमी क्षेत्र) के DDG और राजस्थान के आईजी ANTF ने की।
नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-29 क्या है?
यह NCB का एक नीतिगत दस्तावेज़ है जो 2026 से 2029 तक ड्रग तस्करी और नशीले पदार्थों के नेटवर्क से निपटने के लिए लक्ष्य और प्रवर्तन रणनीतियाँ निर्धारित करता है। JCC बैठकों में इसी दस्तावेज़ के तहत तय लक्ष्यों की समीक्षा और क्रियान्वयन पर चर्चा होती है।
गुजरात JCC बैठक और राजस्थान JCC बैठक में क्या अंतर था?
गुजरात की दूसरी तिमाही JCC बैठक अगस्त 2026 में हुई थी और इसकी अध्यक्षता NCB के DDG मनीष कुमार तथा IB के अतिरिक्त निदेशक राजीव अहीर ने की थी। राजस्थान की तीसरी तिमाही बैठक अक्टूबर 2026 में जयपुर में हुई — दोनों बैठकों में पश्चिमी भारत में ड्रग तस्करी के अंतर-राज्यीय नेटवर्क पर विशेष ध्यान दिया गया।
बार-बार अपराध करने वालों की जमानत पर निगरानी का मुद्दा क्यों उठाया गया?
NDPS मामलों में बार-बार अपराध करने वाले आरोपियों को जमानत मिलने के बाद दोबारा तस्करी में लिप्त होने की प्रवृत्ति एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। अधिकारियों के अनुसार, इन पर निगरानी रखना प्रवर्तन तंत्र को प्रभावी बनाने के लिए ज़रूरी है।
राष्ट्र प्रेस
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