एनसीसी की माउंट देव टिब्बा टीम ने हिमाचल के दुर्गम पहाड़ों में घायल ब्रिटिश नागरिक को बचाया
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) की माउंट देव टिब्बा पर्वतारोहण अभियान टीम ने 10 जून को हिमाचल प्रदेश के टेंटा क्षेत्र में एक घायल ब्रिटिश नागरिक की जान बचाई, जो पैराग्लाइडिंग दुर्घटना के बाद बेहद दुर्गम और ऊंचाई वाले इलाके में फंसा हुआ था। दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को रीढ़ की हड्डी, गर्दन और सिर में गंभीर चोटें आई थीं। यह बचाव अभियान साहस, त्वरित समन्वय और मानवीय संवेदनशीलता का उल्लेखनीय उदाहरण बनकर सामने आया है।
घटनाक्रम: कैसे मिली सूचना और कैसे हुई कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, टेंटा क्षेत्र में तैनात एनसीसी की पर्वतारोहण टीम को सूचना मिली कि एक ब्रिटिश नागरिक पैराग्लाइडिंग के दौरान दुर्घटना का शिकार हो गया है। हादसा बेस कैंप के निकट एक अत्यंत दुर्गम और ऊंचाई वाले स्थान पर हुआ था, जहाँ पहुँचना भी चुनौतीपूर्ण था।
सूचना मिलते ही विंग कमांडर कुणाल शर्मा के नेतृत्व में बचाव दल तुरंत रवाना हुआ। टीम अपने साथ आवश्यक चिकित्सा सामग्री, ऑक्सीजन सिलेंडर और संचार उपकरण लेकर निकली। ऊबड़-खाबड़ रास्तों, खड़ी पहाड़ी ढलानों और कई जलधाराओं को पार करते हुए दल ने घायल तक पहुँचने का कठिन कार्य पूरा किया।
मौके पर प्राथमिक उपचार और बहु-एजेंसी समन्वय
घटनास्थल पर पहुँचते ही टीम ने घायल व्यक्ति को तत्काल प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराई। संचार उपकरणों के माध्यम से बेस कैंप में मौजूद डॉक्टरों से निरंतर संपर्क बनाए रखा गया ताकि घायल की स्थिति स्थिर रखी जा सके।
इसके साथ ही जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, नागरिक हेलीकॉप्टर सेवाओं और भारतीय वायु सेना के साथ भी लगातार समन्वय स्थापित किया गया, जिससे निकासी प्रक्रिया को गति मिल सके। यह ऐसे समय में आया जब पहाड़ी क्षेत्रों में बहु-एजेंसी बचाव समन्वय की क्षमता को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
अस्थायी हेलीपैड और सीमित रोशनी में ऑपरेशन
बचाव अभियान के दौरान टीम ने पर्वतीय क्षेत्र में अस्थायी हेलीपैड तैयार किया और हेलीकॉप्टर संचालन के लिए आवश्यक संपर्क स्थापित किए। गौरतलब है कि यह पूरा अभियान सीमित रोशनी की परिस्थितियों में भी सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। अंततः घायल ब्रिटिश नागरिक को सुरक्षित निकाल लिया गया।
रात्रि में वापसी और अभियान की सफलता
मिशन पूरा होने के बाद एनसीसी टीम ने रात के समय कठिन पहाड़ी रास्तों से वापसी की। इस सफल अभियान ने एनसीसी की परिचालन क्षमता और आपातकालीन तैयारी को रेखांकित किया है। यह अभियान केवल एक बचाव कार्य नहीं, बल्कि अनुशासन, नेतृत्व और निस्वार्थ सेवा का जीवंत प्रमाण है।
आगे की राह
इस घटना के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी पर्यटन और साहसिक खेल क्षेत्रों में आपातकालीन बचाव प्रोटोकॉल को और मज़बूत किया जाएगा। एनसीसी के इस अभियान को रक्षा एवं युवा मामलों के विभाग द्वारा आदर्श बचाव मॉडल के रूप में दर्ज किए जाने की संभावना है।