10 अगस्त 2026
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एनसीसी की माउंट देव टिब्बा टीम ने हिमाचल के दुर्गम पहाड़ों में घायल ब्रिटिश नागरिक को बचाया

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एनसीसी की माउंट देव टिब्बा टीम ने हिमाचल के दुर्गम पहाड़ों में घायल ब्रिटिश नागरिक को बचाया

सारांश

हिमाचल प्रदेश के टेंटा क्षेत्र में पैराग्लाइडिंग दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल एक ब्रिटिश नागरिक को एनसीसी की माउंट देव टिब्बा टीम ने रात के अंधेरे में, अस्थायी हेलीपैड बनाकर और बहु-एजेंसी समन्वय से सुरक्षित निकाला — साहस और तत्परता की एक असाधारण मिसाल।

मुख्य बातें

एनसीसी की माउंट देव टिब्बा पर्वतारोहण टीम ने 10 जून को हिमाचल प्रदेश के टेंटा क्षेत्र में घायल ब्रिटिश नागरिक को बचाया।
दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को रीढ़ की हड्डी, गर्दन और सिर में गंभीर चोटें आई थीं।
विंग कमांडर कुणाल शर्मा के नेतृत्व में बचाव दल चिकित्सा सामग्री, ऑक्सीजन सिलेंडर और संचार उपकरण लेकर रवाना हुआ।
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण , नागरिक हेलीकॉप्टर सेवाओं और भारतीय वायु सेना के साथ बहु-एजेंसी समन्वय किया गया।
पर्वतीय क्षेत्र में अस्थायी हेलीपैड बनाकर सीमित रोशनी में भी अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) की माउंट देव टिब्बा पर्वतारोहण अभियान टीम ने 10 जून को हिमाचल प्रदेश के टेंटा क्षेत्र में एक घायल ब्रिटिश नागरिक की जान बचाई, जो पैराग्लाइडिंग दुर्घटना के बाद बेहद दुर्गम और ऊंचाई वाले इलाके में फंसा हुआ था। दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को रीढ़ की हड्डी, गर्दन और सिर में गंभीर चोटें आई थीं। यह बचाव अभियान साहस, त्वरित समन्वय और मानवीय संवेदनशीलता का उल्लेखनीय उदाहरण बनकर सामने आया है।

घटनाक्रम: कैसे मिली सूचना और कैसे हुई कार्रवाई

जानकारी के अनुसार, टेंटा क्षेत्र में तैनात एनसीसी की पर्वतारोहण टीम को सूचना मिली कि एक ब्रिटिश नागरिक पैराग्लाइडिंग के दौरान दुर्घटना का शिकार हो गया है। हादसा बेस कैंप के निकट एक अत्यंत दुर्गम और ऊंचाई वाले स्थान पर हुआ था, जहाँ पहुँचना भी चुनौतीपूर्ण था।

सूचना मिलते ही विंग कमांडर कुणाल शर्मा के नेतृत्व में बचाव दल तुरंत रवाना हुआ। टीम अपने साथ आवश्यक चिकित्सा सामग्री, ऑक्सीजन सिलेंडर और संचार उपकरण लेकर निकली। ऊबड़-खाबड़ रास्तों, खड़ी पहाड़ी ढलानों और कई जलधाराओं को पार करते हुए दल ने घायल तक पहुँचने का कठिन कार्य पूरा किया।

मौके पर प्राथमिक उपचार और बहु-एजेंसी समन्वय

घटनास्थल पर पहुँचते ही टीम ने घायल व्यक्ति को तत्काल प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराई। संचार उपकरणों के माध्यम से बेस कैंप में मौजूद डॉक्टरों से निरंतर संपर्क बनाए रखा गया ताकि घायल की स्थिति स्थिर रखी जा सके।

इसके साथ ही जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, नागरिक हेलीकॉप्टर सेवाओं और भारतीय वायु सेना के साथ भी लगातार समन्वय स्थापित किया गया, जिससे निकासी प्रक्रिया को गति मिल सके। यह ऐसे समय में आया जब पहाड़ी क्षेत्रों में बहु-एजेंसी बचाव समन्वय की क्षमता को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

अस्थायी हेलीपैड और सीमित रोशनी में ऑपरेशन

बचाव अभियान के दौरान टीम ने पर्वतीय क्षेत्र में अस्थायी हेलीपैड तैयार किया और हेलीकॉप्टर संचालन के लिए आवश्यक संपर्क स्थापित किए। गौरतलब है कि यह पूरा अभियान सीमित रोशनी की परिस्थितियों में भी सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। अंततः घायल ब्रिटिश नागरिक को सुरक्षित निकाल लिया गया।

रात्रि में वापसी और अभियान की सफलता

मिशन पूरा होने के बाद एनसीसी टीम ने रात के समय कठिन पहाड़ी रास्तों से वापसी की। इस सफल अभियान ने एनसीसी की परिचालन क्षमता और आपातकालीन तैयारी को रेखांकित किया है। यह अभियान केवल एक बचाव कार्य नहीं, बल्कि अनुशासन, नेतृत्व और निस्वार्थ सेवा का जीवंत प्रमाण है।

आगे की राह

इस घटना के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी पर्यटन और साहसिक खेल क्षेत्रों में आपातकालीन बचाव प्रोटोकॉल को और मज़बूत किया जाएगा। एनसीसी के इस अभियान को रक्षा एवं युवा मामलों के विभाग द्वारा आदर्श बचाव मॉडल के रूप में दर्ज किए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक बड़े सवाल की ओर भी इशारा करता है — हिमाचल प्रदेश के साहसिक पर्यटन क्षेत्र में आपातकालीन बुनियादी ढाँचा कितना तैयार है? पैराग्लाइडिंग जैसे उच्च-जोखिम वाले खेलों के लिए समर्पित बचाव दल और स्पष्ट प्रोटोकॉल की कमी बार-बार सामने आती है। यह पहली बार नहीं है जब सैन्य या अर्धसैनिक बलों को नागरिक पर्यटकों की जान बचाने के लिए आगे आना पड़ा हो। राज्य सरकार को इस घटना को साहसिक पर्यटन नीति की समीक्षा के अवसर के रूप में देखना चाहिए।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनसीसी की माउंट देव टिब्बा टीम ने किसे और कहाँ बचाया?
एनसीसी की माउंट देव टिब्बा पर्वतारोहण टीम ने हिमाचल प्रदेश के टेंटा क्षेत्र में एक घायल ब्रिटिश नागरिक को बचाया, जो पैराग्लाइडिंग दुर्घटना के बाद दुर्गम ऊंचाई वाले इलाके में फंसा था। दुर्घटना में उसे रीढ़ की हड्डी, गर्दन और सिर में गंभीर चोटें आई थीं।
बचाव अभियान का नेतृत्व किसने किया?
बचाव अभियान का नेतृत्व विंग कमांडर कुणाल शर्मा ने किया। उनके नेतृत्व में टीम चिकित्सा सामग्री, ऑक्सीजन सिलेंडर और संचार उपकरण लेकर तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना हुई।
बचाव में किन-किन एजेंसियों ने सहयोग किया?
बचाव अभियान में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, नागरिक हेलीकॉप्टर सेवाओं और भारतीय वायु सेना के साथ समन्वय स्थापित किया गया। इसके अलावा बेस कैंप के डॉक्टरों से भी संचार उपकरणों के ज़रिए निरंतर संपर्क बनाए रखा गया।
इतने दुर्गम क्षेत्र में हेलीकॉप्टर कैसे उतरा?
एनसीसी टीम ने पर्वतीय क्षेत्र में खुद अस्थायी हेलीपैड तैयार किया और हेलीकॉप्टर संचालन के लिए आवश्यक संपर्क स्थापित किए। यह कार्य सीमित रोशनी की परिस्थितियों में भी सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।
इस घटना से हिमाचल प्रदेश के साहसिक पर्यटन पर क्या असर पड़ेगा?
इस घटना ने हिमाचल प्रदेश में पैराग्लाइडिंग जैसे उच्च-जोखिम वाले साहसिक खेलों के लिए समर्पित बचाव ढाँचे की आवश्यकता को फिर से रेखांकित किया है। उम्मीद जताई जा रही है कि राज्य प्रशासन आपातकालीन बचाव प्रोटोकॉल को और मज़बूत करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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