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मानसून 2026: NDRF की 5वीं वाहिनी ने महाराष्ट्र-गोवा के 12 जिलों में की पूर्व तैनाती

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मानसून 2026: NDRF की 5वीं वाहिनी ने महाराष्ट्र-गोवा के 12 जिलों में की पूर्व तैनाती

सारांश

मानसून 2026 से पहले NDRF की 5वीं वाहिनी ने महाराष्ट्र और गोवा के 12 संवेदनशील जिलों में 1 जुलाई से टीमें तैनात कर दी हैं। IMD की भारी बारिश की चेतावनी और पिछले वर्षों के बाढ़ अनुभव को देखते हुए यह तैयारी पहले से की गई है।

मुख्य बातें

NDRF की 5वीं वाहिनी ने 1 जुलाई 2026 से महाराष्ट्र और गोवा के 12 जिलों में मानसून पूर्व-तैनाती शुरू की।
तैनाती में सतारा, सांगली, कोल्हापुर, धाराशिव, रायगढ़, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, ठाणे, पालघर, मुंबई, नागपुर और उत्तर गोवा शामिल हैं।
तैनाती SDMA महाराष्ट्र और NDRF मुख्यालय के साथ समन्वय कर IMD के पूर्वानुमानों के आधार पर की गई।
कमांडेंट संतोष बहादुर सिंह के अनुसार, पूर्व-तैनाती से आपदा प्रतिक्रिया समय में उल्लेखनीय कमी आती है।
सभी टीमें अत्याधुनिक खोज-बचाव उपकरण और बाढ़ राहत संसाधनों से लैस हैं।

राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की पुणे स्थित 5वीं वाहिनी ने मानसून 2026 के मद्देनजर 1 जुलाई 2026 से ही महाराष्ट्र और गोवा के 12 संवेदनशील जिलों में अपनी टीमें पूर्व-तैनात कर दी हैं। यह कदम संभावित बाढ़ और आपदाओं से समय रहते निपटने की तैयारी के तहत उठाया गया है।

तैनाती का दायरा और क्षेत्र

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA), महाराष्ट्र तथा NDRF मुख्यालय के साथ समन्वय स्थापित कर यह तैनाती सतारा, सांगली, कोल्हापुर, धाराशिव, रायगढ़, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, ठाणे, पालघर, मुंबई, नागपुर और उत्तर गोवा में की गई है। ये टीमें पूरे मानसून सीजन तक इन जिलों में तैनात रहेंगी।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र और गोवा, 5वीं वाहिनी का प्राथमिक कार्यक्षेत्र है। प्रत्येक जिले का चयन उस क्षेत्र की भौगोलिक संवेदनशीलता, पिछले वर्षों के आपदा अनुभव और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मौसम पूर्वानुमानों के आधार पर किया गया है।

कमांडेंट ने क्या कहा

5वीं वाहिनी के कमांडेंट संतोष बहादुर सिंह ने बताया कि रणनीतिक पूर्व-तैनाती से आपदा की स्थिति में प्रतिक्रिया समय में उल्लेखनीय कमी आती है, जिससे बचाव एवं राहत कार्य शीघ्र शुरू किए जा सकते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि NDRF प्राकृतिक और मानव-निर्मित, दोनों प्रकार की आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।

उपकरण और तैयारी

सभी तैनात टीमें अत्याधुनिक खोज एवं बचाव उपकरणों, बाढ़ राहत संसाधनों तथा प्रशिक्षित कार्मिकों से सुसज्जित हैं। ये टीमें जिला प्रशासन सहित अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ निरंतर समन्वय बनाए हुए हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब IMD ने महाराष्ट्र के कोंकण तट और पश्चिमी घाट क्षेत्र में भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की चेतावनी जारी की है। कोल्हापुर, सांगली और सतारा जैसे जिले पिछले कई वर्षों से मानसून के दौरान गंभीर बाढ़ की चपेट में आते रहे हैं।

आम जनता पर असर

NDRF की इस पूर्व-तैनाती से महाराष्ट्र और गोवा के लाखों नागरिकों को राहत मिलने की उम्मीद है, विशेषकर उन इलाकों में जो बाढ़-प्रवण हैं। कमांडेंट सिंह ने आश्वस्त किया कि बल नागरिकों की सुरक्षा और समयबद्ध राहत एवं बचाव कार्यों के लिए सदैव प्रतिबद्ध है।

आने वाले हफ्तों में मानसून की तीव्रता के साथ NDRF की तैयारियों की असली परीक्षा होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या 12 जिलों के लिए टीमों की संख्या पर्याप्त है — विशेषकर जब कोंकण तट और पश्चिमी घाट एक साथ प्रभावित होते हैं। 2021 और 2023 में महाराष्ट्र में आई विनाशकारी बाढ़ ने दिखाया था कि प्रतिक्रिया समय और संसाधनों की कमी दोनों जानलेवा साबित हुई थीं। पूर्व-तैनाती सही दिशा में कदम है, लेकिन जब तक जिला प्रशासन के साथ वास्तविक समय में समन्वय और स्थानीय स्तर पर संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं होती, तब तक यह तैयारी कागज़ पर ही रह सकती है।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

NDRF की 5वीं वाहिनी ने मानसून 2026 के लिए कहाँ-कहाँ टीमें तैनात की हैं?
NDRF की 5वीं वाहिनी ने सतारा, सांगली, कोल्हापुर, धाराशिव, रायगढ़, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, ठाणे, पालघर, मुंबई, नागपुर और उत्तर गोवा — कुल 12 जिलों में टीमें तैनात की हैं। यह तैनाती 1 जुलाई 2026 से प्रभावी है और पूरे मानसून सीजन तक जारी रहेगी।
NDRF ने मानसून से पहले पूर्व-तैनाती क्यों की?
पूर्व-तैनाती का उद्देश्य आपदा की स्थिति में प्रतिक्रिया समय को कम करना है ताकि बचाव और राहत कार्य तुरंत शुरू किए जा सकें। तैनाती IMD के मौसम पूर्वानुमानों, क्षेत्रों की भौगोलिक संवेदनशीलता और पिछले वर्षों के आपदा अनुभव के आधार पर की गई है।
NDRF की टीमें किन उपकरणों से लैस हैं?
सभी तैनात टीमें अत्याधुनिक खोज एवं बचाव उपकरणों, बाढ़ राहत संसाधनों और प्रशिक्षित कार्मिकों से सुसज्जित हैं। ये टीमें जिला प्रशासन और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ निरंतर समन्वय में हैं।
5वीं वाहिनी का कार्यक्षेत्र कौन-सा है?
पुणे स्थित NDRF की 5वीं वाहिनी का प्राथमिक कार्यक्षेत्र महाराष्ट्र और गोवा है। इसके कमांडेंट संतोष बहादुर सिंह के नेतृत्व में बल प्राकृतिक और मानव-निर्मित, दोनों प्रकार की आपदाओं से निपटने के लिए तैयार है।
क्या NDRF की यह तैनाती हर साल होती है?
हाँ, NDRF हर मानसून सीजन से पहले संवेदनशील जिलों में पूर्व-तैनाती करती है। 2026 में यह प्रक्रिया 1 जुलाई से शुरू की गई है, जो पिछले वर्षों के अनुभव और IMD के पूर्वानुमानों के आधार पर तय की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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