महाराष्ट्र में AI आधारित कमांड-कंट्रोल सिस्टम से होगा आपदा प्रबंधन, CM फडणवीस ने दिए निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 22 मई 2026 को मुंबई में प्री-मानसून तैयारी समीक्षा बैठक में महाराष्ट्र के लिए AI आधारित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम विकसित करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए। यह प्रणाली पूरे राज्य में आपदा प्रबंधन और इमरजेंसी रिस्पॉन्स को एकीकृत करेगी। मानसून से पहले की इस तैयारी को राज्य सरकार ने सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।
मुख्य निर्देश और समयसीमा
फडणवीस ने सभी विभागों को अगले 15 दिनों के भीतर अपनी तैयारियों की समीक्षा कर परिचालन संबंधी कमियाँ दूर करने का आदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का सख्ती से पालन हो, समय पर चेतावनी जारी की जाए और राहत में किसी भी स्तर पर देरी स्वीकार्य नहीं होगी।
मंत्रालय, पुलिस, नगर निगमों और विभिन्न कंट्रोल रूम को एकीकृत रिस्पॉन्स सिस्टम से जोड़ने के भी निर्देश दिए गए, ताकि मानसून के दौरान समन्वय बेहतर हो और नागरिकों को तेज़ी से राहत मिल सके।
बाढ़ और बुनियादी ढाँचे पर ध्यान
आपदा प्रबंधन मंत्री गिरीश महाजन ने बताया कि बाँधों से पानी छोड़े जाने के दौरान निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनना एक बार-बार आने वाली समस्या है। उन्होंने कमज़ोर पुलों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने और असुरक्षित पाए जाने पर तत्काल यातायात रोकने के निर्देश दिए।
राहत पैकेज और मुआवज़ा
राहत एवं पुनर्वास मंत्री मकरंद पाटिल ने बताया कि राज्य सरकार ने फसल नुकसान, घरों की क्षति, पशुधन की मौत और जनहानि के लिए विशेष राहत पैकेज मंजूर किया है। इसके तहत:
खरीफ फसल नुकसान पर प्रति हेक्टेयर ₹10,000, बाढ़ में जमीन बह जाने पर ₹47,000 मुआवज़ा और रोज़गार गारंटी योजना के तहत ₹5,000 तक की सहायता दी जाएगी। राज्य सरकार 1.06 लाख किसानों के खातों में DBT के ज़रिए ₹16,224 करोड़ पहले ही जमा कर चुकी है।
इस बार पहली बार क्षतिग्रस्त कुओं के लिए प्रति कुआँ ₹30,000 मुआवज़ा मंजूर किया गया है, जिससे करीब 11,000 कुओं को लाभ मिलेगा। साथ ही राहत पात्रता सीमा 2 हेक्टेयर से बढ़ाकर 3 हेक्टेयर कर दी गई है।
बहु-एजेंसी समन्वय
बैठक में भारतीय सेना, नौसेना, वायुसेना, तटरक्षक बल, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), NDRF, SDRF, रेलवे, दूरसंचार विभाग, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) और मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) समेत दर्जनों एजेंसियों की तैयारियों की समीक्षा की गई। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र पिछले कई वर्षों से मानसून में बाढ़, भूस्खलन और शहरी जलभराव की गंभीर समस्याओं से जूझता रहा है।
आगे की राह
AI आधारित कमांड-कंट्रोल सिस्टम की विकास प्रक्रिया शुरू होने के साथ, राज्य का लक्ष्य है कि आने वाले मानसून सीज़न तक कम से कम एकीकृत निगरानी का ढाँचा तैयार हो जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रणाली समय पर क्रियान्वित हुई, तो यह महाराष्ट्र के आपदा प्रबंधन को राष्ट्रीय स्तर पर एक मॉडल बना सकती है।