नीट-पीजी 2025 कट-ऑफ घटाने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, 2027 से रैंक-आधारित प्रणाली का प्रस्ताव
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 3 नवंबर 2025 को नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट - पोस्टग्रेजुएट (नीट-पीजी) 2025 परीक्षा के क्वालीफाइंग कट-ऑफ पर्सेंटाइल को घटाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की। इस सुनवाई में 12 सदस्यों वाली विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत की गई, जिसमें परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव का प्रस्ताव शामिल है।
विशेषज्ञ समिति का प्रस्ताव
विशेषज्ञ समिति ने अदालत को बताया कि 2027 से नीट-पीजी और नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट - सुपर स्पेशियलिटी (नीट-एसएस) के लिए मौजूदा पर्सेंटाइल-आधारित प्रणाली को रैंक-आधारित प्रणाली से बदला जाए। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है, हालाँकि नियमों को अभी अंतिम रूप दिया जाना शेष है।
न्यूनतम योग्यता मानकों पर जोर
समिति की चर्चाओं में यह स्पष्ट रूप से कहा गया कि केवल खाली सीटें भरने के उद्देश्य से पोस्टग्रेजुएट मेडिकल शिक्षा के न्यूनतम योग्यता मानकों में ढील नहीं दी जानी चाहिए। यह टिप्पणी उन आशंकाओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, जिनमें कहा गया था कि कट-ऑफ घटाने से उन सीटों पर अपेक्षाकृत कम योग्य अभ्यर्थियों को प्रवेश मिल सकता है, जो अन्यथा खाली रह जातीं। गौरतलब है कि चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता और उपलब्धता के बीच यह तनाव नया नहीं है — पिछले कई वर्षों से पीजी सीटें खाली रहने की समस्या चर्चा में रही है।
अदालत के निर्देश और आगे की प्रक्रिया
सर्वोच्च न्यायालय ने समिति की रिपोर्ट सभी पक्षों को सौंपने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ता अब इस रिपोर्ट पर अपना जवाब दाखिल करेंगे, जिसके बाद अगली सुनवाई में इस विषय पर आगे विचार किया जाएगा।
नीट-पीजी 2025 परीक्षा की मुख्य जानकारी
नीट-पीजी 2025 की परीक्षा नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (एनबीईएमएस) द्वारा कंप्यूटर आधारित टेस्ट (सीबीटी) मोड में 3 अगस्त 2025 को एकल शिफ्ट में सुबह 9 बजे से दोपहर 12.30 बजे तक आयोजित की गई थी। परीक्षा का परिणाम 3 सितंबर 2025 को घोषित किया गया, जबकि एडमिट कार्ड 31 जुलाई 2025 को जारी किए गए थे। परीक्षा शहर चुनने और उसमें सुधार की विंडो 13 से 17 जून 2025 तक आधिकारिक पोर्टल पर सक्रिय रही थी।
नीट-पीजी का उद्देश्य और महत्व
एनबीईएमएस द्वारा आयोजित यह परीक्षा देश के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में एमडी (डॉक्टर ऑफ मेडिसिन), एमएस (मास्टर ऑफ सर्जरी) और पीजी डिप्लोमा जैसे पोस्टग्रेजुएट चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अभ्यर्थियों की पात्रता और रैंकिंग तय करती है। यह परीक्षा लाखों मेडिकल स्नातकों के करियर को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है। अब सभी की निगाहें याचिकाकर्ताओं के जवाब और अदालत की अगली सुनवाई पर टिकी हैं।