नेपाल से श्रीलंका तक ड्रग तस्करी मार्ग फिर से सक्रिय, सुरक्षा एजेंसियों की चिंता
सारांश
Key Takeaways
- नेपाल से श्रीलंका तक ड्रग तस्करी मार्ग फिर से सक्रिय हो रहा है।
- एनसीबी द्वारा 10 करोड़ रुपये मूल्य की ड्रग्स जब्त की गईं।
- श्रीलंका में ड्रग्स की मांग में तेजी आई है।
- तस्करों ने दक्षिण भारत को ट्रांजिट पॉइंट बना लिया है।
- भारतीय एजेंसियां आपसी समन्वय में काम कर रही हैं।
नई दिल्ली, 7 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। नेपाल से श्रीलंका तक भारत के मार्ग से ड्रग्स की तस्करी का रास्ता फिर से सुरक्षा एजेंसियों के ध्यान में आ गया है। यह मार्ग, जो कुछ समय से अपेक्षाकृत शांत था, अब पुनः सक्रिय हो गया है। इसका इस्तेमाल हशीश ऑयल और चरस की तस्करी के लिए किया जा रहा है।
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की चेन्नई और हैदराबाद जोनल इकाइयों द्वारा चलाए गए बहु-राज्यीय अभियान में लगभग 10 करोड़ रुपये मूल्य की हशीश ऑयल और चरस बरामद की गई है।
यह अभियान केंद्र सरकार की पहल नशामुक्त भारत अभियान के तहत चलाया गया। एक अधिकारी ने बताया कि श्रीलंका में हशीश और चरस की मांग अत्यधिक बढ़ गई है। हाल के वर्षों में श्रीलंका में ड्रग्स के दुरुपयोग के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी गई है, जिसके चलते नशीले पदार्थों की मांग और ड्रग कार्टेल द्वारा आपूर्ति दोनों बढ़ गई हैं।
अधिकारियों के अनुसार, श्रीलंका, जो हिंद महासागर में स्थित है, ड्रग तस्करी के लिए एक रणनीतिक ट्रांजिट पॉइंट बन गया है। ड्रग्स केवल नेपाल से नहीं, बल्कि अफगानिस्तान से भी लाई जाती हैं, जिन्हें पाकिस्तान और ईरान के रास्ते भेजा जाता है।
तस्करों ने दक्षिण भारत को इन ड्रग्स का ट्रांजिट पॉइंट बना लिया है। आमतौर पर, तस्करी की खेप थूथुकुडी या कोडिक्कराई के तट तक पहुंचती है। इसके बाद, एक नेटवर्क के माध्यम से समुद्र में श्रीलंकाई सहयोगियों को यह खेप सौंप दी जाती है।
अधिकारियों ने बताया कि ये लैंडिंग पॉइंट नए नहीं हैं, बल्कि लंबे समय से उपयोग में हैं। पहले यहां अफीम जैसी ड्रग्स लाई जाती थीं और श्रीलंका के तस्कर इसके बदले बीड़ी का लेन-देन करते थे।
एनसीबी अधिकारियों के अनुसार, त्रिंकोमाली और गाले तथा कोलंबो श्रीलंका में ड्रग्स के प्रवेश और निकासी के प्रमुख बिंदु हैं।
ड्रग तस्करी का कारोबार कई गुना बढ़ गया है। पहले दो-तीन महीनों में एक-दो मामले सामने आते थे, लेकिन अब स्थिति यह है कि केवल 2024 में श्रीलंका में 35,000 ड्रग्स जब्ती के मामले दर्ज किए गए हैं।
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि श्रीलंका में केवल मारिजुआना, हशीश या चरस ही नहीं, बल्कि मेथामफेटामिन की मांग भी 2019 के बाद से तेजी से बढ़ी है।
जब ड्रग्स श्रीलंका पहुंचते हैं, तो तस्कर वहां के कुछ स्थानीय लोगों, जिनमें अपराधी, मछुआरे और संगठित गिरोह शामिल हैं, के साथ मिलकर इन्हें पैक करते हैं और अन्य हिस्सों में वितरित करते हैं।
इंटेलीजेंस ब्यूरो के अधिकारियों के अनुसार, हाल के महीनों में नेपाल से श्रीलंका तक का मार्ग अधिकतम उपयोग में लाया जा रहा है। इसका एक कारण जम्मू-कश्मीर और पंजाब में पाकिस्तान सीमा पर कड़ी सुरक्षा भी है।
यह मार्ग नया नहीं है, लेकिन चिंता की बात यह है कि अब इसका उपयोग पहले से ज्यादा किया जा रहा है। भारतीय एजेंसियां इस तस्करी को रोकने के लिए नेपाल और श्रीलंका की एजेंसियों के साथ करीबी समन्वय में काम कर रही हैं।
इस बीच, इंडियन कोस्ट गार्ड भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है और दक्षिण भारत से निकलने वाली मछली पकड़ने वाली नौकाओं (फिशिंग ट्रॉलर) को रोककर जांच कर रही है।
एक अधिकारी ने बताया कि नेपाल से संचालित यह रैकेट एक श्रीलंकाई नागरिक द्वारा नियंत्रित किया जा रहा है, जो पाकिस्तान, अफगानिस्तान और नेपाल में मौजूद अपने सहयोगियों के साथ समन्वय कर ड्रग्स को दक्षिण भारत तक पहुंचाता है।
उसने तमिलनाडु में भी एक नेटवर्क तैयार कर लिया है, जिससे ड्रग्स को आसानी से श्रीलंकाई जलक्षेत्र तक पहुंचाया जा सके।
अधिकारियों के अनुसार, यह लगातार चल रहा अभियान है और एजेंसियां उन सभी संभावित खामियों की पहचान कर रही हैं, जिनका फायदा उठाकर तस्कर अपने नेटवर्क को आगे बढ़ा रहे हैं।