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क्या सुभाष चन्द्र बोस भारत के एकमात्र सच्चे राजनीतिक-सैन्य नेता थे?: सीडीएस

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क्या सुभाष चन्द्र बोस भारत के एकमात्र सच्चे राजनीतिक-सैन्य नेता थे?: सीडीएस

सारांश

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के योगदान पर जनरल अनिल चौहान का विचार, जो उनके अद्वितीय नेतृत्व को उजागर करता है। आईएनए की उपलब्धियों का विश्लेषण और आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाए जा रहे कदमों पर चर्चा। क्या ये बातें हमें आज के समय में प्रेरित करती हैं?

मुख्य बातें

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस एक सच्चे राजनीतिक-सैन्य नेता थे।
आईएनए की सैन्य उपलब्धियों का महत्व समझें।
आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाए गए कदम महत्वपूर्ण हैं।
युवाओं को नई सोच अपनाने की आवश्यकता है।
राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में नवाचार की आवश्यकता है।

नई दिल्ली, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को भारत का एकमात्र सच्चा राजनीतिक-सैन्य नेता माना जाता है। वे एक दृष्टिकोण रखने वाले राजनेता और एक साहसी एवं कुशल सैन्य कमांडर थे, जिनका योगदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अतुलनीय है। नेताजी की जयंती के अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने यह बात जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में कही।

सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने शुक्रवार को जेएनयू में आयोजित कार्यक्रम में नेताजी को भारत का एकमात्र सच्चा राजनीतिक-सैन्य नेता बताते हुए कहा कि नेताजी न केवल एक दूरदर्शी राजनेता थे, बल्कि एक साहसी और कुशल सैन्य कमांडर भी थे, जिनका योगदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अद्वितीय है।

सीडीएस ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा स्थापित इंडियन नेशनल आर्मी (आईएनए) पर चर्चा की। उन्होंने आईएनए की उन सैन्य उपलब्धियों को उजागर किया, जिनका उल्लेख कम किया जाता है। जनरल चौहान ने कहा कि आईएनए ने तोपखाने, बख्तरबंद वाहन और पारंपरिक सैन्य समर्थन की कमी के बावजूद महत्वपूर्ण सफलता हासिल की। यह सफलता केवल सैनिकों की अटूट देशभक्ति, दृढ़ संकल्प और मातृभूमि के प्रति निस्वार्थ समर्पण का परिणाम थी। इसे नेताजी के प्रेरक नेतृत्व और संगठनात्मक क्षमता का जीवंत उदाहरण बताया गया।

अपने व्याख्यान में जनरल चौहान ने राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति, उपनिवेशवाद, औपनिवेशिक मानसिकता और कॉग्निटिव कॉलोनियलिज्म जैसे विषयों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज के समय में केवल भौतिक नवाचार ही नहीं, बल्कि सोच और दृष्टिकोण में नवाचार भी आवश्यक है। इस संदर्भ में उन्होंने नेताजी के विचारों और दृष्टि को प्रासंगिक बताते हुए युवाओं और नीति-निर्माताओं से पारंपरिक सोच से आगे बढ़ने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य, युद्ध के नए क्षेत्र, विघटनकारी प्रौद्योगिकियां और उनसे निपटने के लिए अपनाई जा रही आधुनिक रणनीतियों पर चर्चा की गई। यह बात भी महत्वपूर्ण है कि भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए एकता, तकनीकी क्षमता और रणनीतिक सोच का समन्वय अत्यंत आवश्यक है।

एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, आत्मनिर्भर भारत के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए भारतीय सेना ने भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बेंगलुरु के साथ एक समझौता किया है। इस समझौते के तहत उभरते डिजिटल सूचना परिदृश्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह से स्वदेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित प्रणाली विकसित की जाएगी।

यह पहल सहयोगात्मक अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से साकार की जाएगी। इस परियोजना में एक स्वदेशी स्टार्टअप इंडी एस्ट्रा की भी भागीदारी होगी। इसका मुख्य उद्देश्य आत्मनिर्भरता और क्षमता विकास को मजबूती देना है। यह पहल भारत की रक्षा तैयारियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए और भी सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह आज की समस्याओं के समाधान में भी प्रासंगिक है। हमें उनके विचारों से प्रेरणा लेकर अपने दृष्टिकोण को विस्तृत करना चाहिए।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का योगदान क्या है?
नेताजी का योगदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अद्वितीय था, उन्होंने इंडियन नेशनल आर्मी का गठन किया और देश को स्वतंत्रता दिलाने के लिए संघर्ष किया।
आईएनए की उपलब्धियाँ क्या थीं?
आईएनए ने कई सैन्य सफलताएं हासिल की, भले ही उनके पास संसाधनों की कमी थी, यह केवल सैनिकों की देशभक्ति और नेताजी के नेतृत्व का परिणाम था।
राष्ट्र प्रेस
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