3 अगस्त 2026
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मणिपुर में शांति बहाली की कोशिश जारी: सीएम युमनाम खेमचंद सिंह ने इंफाल में नशा-मुक्त अभियान का किया उद्घाटन

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मणिपुर में शांति बहाली की कोशिश जारी: सीएम युमनाम खेमचंद सिंह ने इंफाल में नशा-मुक्त अभियान का किया उद्घाटन

सारांश

मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने इंफाल में नशा-मुक्ति मेगा अभियान के मंच से शांति बहाली का संकल्प दोहराया। जिरीबाम और उखरुल के अपने दौरों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा — हर समुदाय शांति चाहता है, लेकिन स्वार्थी तत्व सुलह की राह में रोड़ा बन रहे हैं।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने 3 अगस्त को इंफाल के फीइडिंगा में 'नशा मुक्त भारत अभियान' और 'मिशन स्पंदन' का उद्घाटन किया।
अभियान का लक्ष्य 10 करोड़ लोगों को नशा-मुक्त रहने की शपथ दिलाना है।
सीएम ने कहा कि कुकी, मैतेई, हमार और पाइते समुदायों के विस्थापित लोग घर लौटकर शांति से रहना चाहते हैं।
जिरीबाम दौरे में विभिन्न समुदायों के लोगों का एक साथ भोजन करना सुलह की इच्छाशक्ति का प्रमाण बताया गया।
राजयोगिनी बीके नीलिमा को 'यूनिवर्सल पीस एंबेसडर अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया।
गृह मंत्री कोंथौजम गोविंदस सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने सोमवार, 3 अगस्त को इंफाल में स्पष्ट किया कि राज्य में चुनौतियाँ बरकरार हैं, लेकिन सरकार नागरिकों के सक्रिय सहयोग से स्थायी शांति बहाल करने की दिशा में ठोस प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि ज़मीनी स्तर पर सुधार के संकेत दिखने शुरू हो गए हैं।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्यमंत्री इंफाल के फीइडिंगा में आयोजित एक मेगा कार्यक्रम में शामिल हुए, जिसे ब्रह्माकुमारीज, मणिपुर ने अपनी मेडिकल विंग — राजयोग शिक्षा और अनुसंधान फाउंडेशन — के सहयोग से आयोजित किया। यह कार्यक्रम 'नशा मुक्त भारत अभियान' और 'मिशन स्पंदन' (नशीली दवाओं के दुरुपयोग के विरुद्ध आध्यात्मिक साझेदारी) के तहत 10 करोड़ लोगों को नशा-मुक्त रहने की शपथ दिलाने के उद्देश्य से आयोजित था। खेमचंद सिंह ने उद्घाटन समारोह में कैंपेन वाउचर भी लॉन्च किया।

शांति प्रक्रिया और सामुदायिक सद्भाव

मुख्यमंत्री ने राज्य के विभिन्न इलाकों के अपने दौरों के निजी अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे उखरुल जिले के लिटन जैसे दुर्गम क्षेत्रों में तब भी गए जब हालात अत्यंत कठिन थे। उन्होंने कहा कि जातीय हिंसा ने कुकी, मैतेई, हमार और पाइते समुदायों के हज़ारों लोगों को विस्थापित किया, और इन सभी की एकमात्र इच्छा अपने घरों में लौटकर शांति से जीना है।

खेमचंद सिंह ने जिरीबाम के एक दौरे का विशेष उल्लेख किया, जहाँ अलग-अलग समुदायों के लोग एक साथ बैठकर भोजन करते दिखे — जिसे उन्होंने सामाजिक सुलह की वास्तविक इच्छा का प्रमाण बताया। हालाँकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि हिंसा की बार-बार होने वाली घटनाओं ने सुलह की कोशिशों को कमज़ोर किया है।

हिंसा के पीछे स्वार्थी तत्व

शांति प्रक्रिया में बाधा डालने वाले तत्वों पर कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी घटनाओं से केवल वही लोग लाभ उठाते हैं जो संघर्ष को अपने निजी स्वार्थ के लिए जारी रखना चाहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये तत्व किसी विशेष समुदाय का प्रतिनिधित्व नहीं करते, बल्कि व्यक्तिगत हितों से प्रेरित हैं।

सरकार की प्रतिक्रिया और प्राथमिकताएँ

खेमचंद सिंह ने दोहराया कि शांति बहाली राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और दोषियों के विरुद्ध न्याय सुनिश्चित करने में कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत 2047' के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि यह लक्ष्य तभी हासिल होगा जब देश के युवा नशीली दवाओं से दूर रहें।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने आध्यात्मिक सेवा और समाज कल्याण में उल्लेखनीय योगदान के लिए मणिपुर में ब्रह्माकुमारीज की इंचार्ज राजयोगिनी बीके नीलिमा को 'यूनिवर्सल पीस एंबेसडर अवॉर्ड' से सम्मानित किया। राज्य के गृह मंत्री कोंथौजम गोविंदस सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

आगे क्या

यह कार्यक्रम ऐसे समय में आयोजित हुआ जब मणिपुर में जातीय तनाव के बीच सामान्य स्थिति बहाल करने के प्रयास जारी हैं। मुख्यमंत्री की अपील और नशा-मुक्ति अभियान जैसे सामाजिक कार्यक्रम राज्य में विश्वास बहाली की व्यापक रणनीति का हिस्सा प्रतीत होते हैं। आने वाले हफ्तों में सरकार की ज़मीनी कार्रवाई यह तय करेगी कि शांति की यह उम्मीद कितनी टिकाऊ साबित होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

आशावादी है — लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे कहीं अधिक जटिल है। मणिपुर में जातीय हिंसा दो वर्षों से अधिक समय से जारी है और विस्थापित लोगों की वापसी अभी भी अनिश्चित है। नशा-मुक्ति जैसे सामाजिक अभियान ज़रूरी हैं, लेकिन ये राजनीतिक और सुरक्षा विफलताओं का विकल्प नहीं हो सकते। असली कसौटी यह है कि सरकार 'स्वार्थी तत्वों' के खिलाफ जिस कार्रवाई की बात करती है, वह सार्वजनिक रूप से सत्यापन-योग्य परिणामों में कब तब्दील होगी।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मणिपुर के सीएम युमनाम खेमचंद सिंह ने शांति को लेकर क्या कहा?
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने कहा कि चुनौतियों के बावजूद सरकार नागरिकों के सहयोग से स्थायी शांति बहाल करने की कोशिश कर रही है और सुधार के संकेत दिखने लगे हैं। उन्होंने जिरीबाम और उखरुल जैसे इलाकों के दौरों का हवाला देते हुए कहा कि हर समुदाय शांति से जीना चाहता है।
'मिशन स्पंदन' और 'नशा मुक्त भारत अभियान' क्या है?
'मिशन स्पंदन' नशीली दवाओं के दुरुपयोग के विरुद्ध एक आध्यात्मिक साझेदारी कार्यक्रम है, जिसे ब्रह्माकुमारीज ने 'नशा मुक्त भारत अभियान' के तहत आयोजित किया। इसका लक्ष्य 10 करोड़ लोगों को नशा-मुक्त रहने की शपथ दिलाना है।
मणिपुर में जातीय हिंसा से कौन-से समुदाय प्रभावित हुए हैं?
मणिपुर में जातीय हिंसा से मुख्य रूप से कुकी, मैतेई, हमार और पाइते समुदायों के लोग विस्थापित हुए हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, इन सभी समुदायों के लोग अपने घरों में वापस लौटकर शांति से रहना चाहते हैं।
शांति प्रक्रिया में बाधा डालने वाले तत्वों पर सरकार का क्या रुख है?
मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने कहा कि हिंसा की घटनाओं से केवल वे लोग लाभ उठाते हैं जो निजी स्वार्थ के लिए संघर्ष जारी रखना चाहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई में कोई समझौता नहीं होगा।
कार्यक्रम में 'यूनिवर्सल पीस एंबेसडर अवॉर्ड' किसे दिया गया?
मणिपुर में ब्रह्माकुमारीज की इंचार्ज राजयोगिनी बीके नीलिमा को आध्यात्मिक सेवा और समाज कल्याण में योगदान के लिए 'यूनिवर्सल पीस एंबेसडर अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया। यह सम्मान मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने उद्घाटन समारोह के दौरान प्रदान किया।
राष्ट्र प्रेस
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