एनएचआरसी सख्त: एटा में नाबालिगों से आपत्तिजनक वीडियो मामले में पुलिस, मेटा और MeitY को नोटिस
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने उत्तर प्रदेश के एटा जिले में एक कथित कोचिंग संस्थान द्वारा नाबालिग बच्चों से स्क्रिप्टेड, आपत्तिजनक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील सोशल मीडिया वीडियो बनवाने के मामले में कड़ा संज्ञान लेते हुए एटा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP), जिलाधिकारी, मेटा इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं कंट्री हेड तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव को नोटिस जारी किए हैं। सभी पक्षों से दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) तलब की गई है। यह सुनवाई एनएचआरसी सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली बेंच ने की।
मामले की पृष्ठभूमि
आयोग को मिली शिकायत के अनुसार, एटा जिले में एक तथाकथित कोचिंग संस्थान की आड़ में छोटे बच्चों को बार-बार सोशल मीडिया वीडियो में इस्तेमाल किया जा रहा था। इन वीडियो की सामग्री कथित तौर पर स्क्रिप्टेड, आपत्तिजनक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील बताई गई है। शिकायत में अभिभावकीय सहमति के बिना बच्चों के संभावित शोषण की भी गंभीर आशंका जताई गई थी।
आयोग ने इस मामले को बच्चों की गरिमा, निजता और मनोवैज्ञानिक सुरक्षा पर गंभीर खतरे के रूप में रेखांकित किया है। गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब भारत में नाबालिगों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर नीतिगत बहस तेज हो रही है।
एनएचआरसी के निर्देश
आयोग ने एटा पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि संबंधित बच्चों की पहचान कर, आवश्यकतानुसार उन्हें बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष प्रस्तुत किया जाए और उनकी सुरक्षा एवं काउंसलिंग सुनिश्चित की जाए। मामले में संज्ञेय अपराध पाए जाने पर एफआईआर (FIR) दर्ज कर नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
एनएचआरसी ने जांच एजेंसियों को यह भी स्पष्ट किया है कि जांच का मुख्य केंद्र उन वयस्कों और तत्वों की भूमिका की पहचान करना होना चाहिए, जो बच्चों से कंटेंट की स्क्रिप्टिंग, रिकॉर्डिंग और अपलोडिंग करवा रहे हैं या इस प्रक्रिया को बढ़ावा दे रहे हैं। साथ ही, बच्चों की पहचान, गरिमा और निजता की पूरी तरह रक्षा की जाए और उन्हें किसी भी प्रकार से प्रताड़ित न किया जाए।
मेटा इंडिया से सवाल
आयोग ने इस मामले में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही पर भी कड़े सवाल उठाए हैं। मेटा इंडिया से पूछा गया है कि नाबालिग बच्चों से संबंधित ऐसी सामग्री को बार-बार अपलोड और प्रसारित होने की अनुमति कैसे मिली। इसके अलावा, क्या ऐसे कंटेंट से किसी प्रकार का मोनेटाइजेशन या व्यावसायिक लाभ लिया गया, और संबंधित डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए कंपनी ने क्या कदम उठाए हैं — इन सभी बिंदुओं पर दो सप्ताह में स्पष्टीकरण माँगा गया है।
बच्चों के अधिकारों की रक्षा पर ज़ोर
एनएचआरसी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि इस पूरे मामले में बच्चों को मुख्यतः 'संरक्षण और सहायता की आवश्यकता वाले बच्चों' के रूप में देखा जाए। कार्रवाई का मुख्य लक्ष्य वे व्यक्ति होंगे जो बच्चों से स्क्रिप्ट लिखवाने, रिकॉर्डिंग, अपलोडिंग, नियंत्रण करने या व्यावसायिक शोषण में संलिप्त हैं।
सभी संबंधित पक्षों की ATR प्राप्त होने के बाद आयोग की अगली सुनवाई में आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यह मामला भारत में बाल अधिकार संरक्षण और डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही के व्यापक प्रश्नों को एक बार फिर केंद्र में ला खड़ा करता है।