तिरुवल्लूर अमोनिया गैस रिसाव: एनएचआरसी ने लिया स्वतः संज्ञान, 9 मौतों पर तमिलनाडु सरकार को 2 हफ्ते में रिपोर्ट देने का निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मंगलवार, 23 जून 2026 को तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले में एक निजी समुद्री खाद्य प्रसंस्करण इकाई में हुए अमोनिया गैस रिसाव मामले का स्वतः संज्ञान लिया, जिसमें 9 श्रमिकों की मौत हो चुकी है और 70 से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती हैं। आयोग ने तमिलनाडु के मुख्य सचिव एम. साई कुमार और पुलिस महानिदेशक महेश कुमार अग्रवाल को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
हादसे का घटनाक्रम
रिपोर्टों के अनुसार, यह दुर्घटना तिरुवल्लूर जिले में स्थित एक निजी समुद्री खाद्य प्रसंस्करण एवं निर्यात इकाई में उस समय हुई जब बड़ी संख्या में श्रमिक फैक्ट्री परिसर के निकट एक कमरे में विश्राम कर रहे थे। इकाई से अचानक अमोनिया गैस का रिसाव हुआ और श्रमिक जहरीले धुएं की चपेट में आ गए। मृतक और प्रभावित लोग कथित तौर पर इस इकाई में कार्यरत प्रवासी श्रमिक थे, जिनमें अधिकांश महिलाएं बताई जा रही हैं।
राहत एवं बचाव अभियान
घटना के तुरंत बाद बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया। सांस लेने में कठिनाई और अमोनिया गैस के दुष्प्रभाव से पीड़ित 70 से अधिक श्रमिकों को चेन्नई और तिरुवल्लूर के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया। अधिकारियों के अनुसार प्रभावित श्रमिकों को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।
एनएचआरसी ने क्या माँगा
आयोग ने राज्य सरकार से कई बिंदुओं पर जानकारी माँगी है — गैस रिसाव के कारण, प्रशासन द्वारा उठाए गए तत्काल कदम, प्रभावित श्रमिकों की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति, मृतकों के परिजनों को दिए जाने वाले मुआवजे की स्थिति, और राहत राशि के वितरण का ब्यौरा। एनएचआरसी ने स्पष्ट किया है कि इस दुर्घटना से मानवाधिकारों और कार्यस्थल सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं।
तमिलनाडु सरकार की प्रतिक्रिया
तमिलनाडु सरकार ने दुर्घटना की औपचारिक जाँच के आदेश देते हुए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति को संभावित लापरवाही की पहचान करने, जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपाय सुझाने का दायित्व दिया गया है। गौरतलब है कि यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब औद्योगिक इकाइयों में खतरनाक रसायनों के प्रबंधन को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं।
आगे क्या होगा
एनएचआरसी ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार से रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद वह उसका विस्तृत अध्ययन करेगा और आगे की कार्रवाई तय करेगा। यह मामला न केवल औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है, बल्कि प्रवासी श्रमिकों के अधिकारों और उनकी कार्यस्थल सुरक्षा की जवाबदेही पर भी राष्ट्रीय ध्यान केंद्रित करता है।