तमिलनाडु अमोनिया गैस लीक: मृतकों की संख्या 10 हुई, 68 कर्मचारी अभी भी अस्पताल में
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले में पेरियापालयम के निकट स्थित एक सीफूड प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट यूनिट में 21 जून 2025 को हुई अमोनिया गैस लीक में मरने वालों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग द्वारा 24 जून को जारी नवीनतम बुलेटिन के अनुसार, चेन्नई और आसपास के अस्पतालों में अभी भी 68 कर्मचारी उपचाराधीन हैं।
हादसे का घटनाक्रम
21 जून को कनिगईपैर-मंजंगरानाई स्थित सीफूड प्रोसेसिंग इकाई में रोज़मर्रा के कामकाज के दौरान बड़ी मात्रा में जहरीली अमोनिया गैस रिसाव हुआ। कई कर्मचारियों को तत्काल सांस लेने में कठिनाई, आँखों में तीव्र जलन और लगातार खाँसी की शिकायत हुई, जिसके बाद बड़े पैमाने पर आपातकालीन बचाव अभियान शुरू किया गया। गैस लीक की रात ही दो कर्मचारियों की मौत हो गई थी; अगले दिन तक यह आँकड़ा आठ पर पहुँच गया। 23 जून को एक और मृत्यु दर्ज की गई और 24 जून को एक और, जिससे कुल मृतक संख्या 10 हो गई।
पीड़ितों की स्थिति
अधिकारियों के अनुसार इस दुर्घटना में कुल 83 कर्मचारी प्रभावित हुए। इनमें से पाँच स्वस्थ होकर अस्पताल से छुट्टी पा चुके हैं, जबकि 68 अभी भी भर्ती हैं। भर्ती मरीज़ों में से 17 वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं और 21 को ऑक्सीजन थेरेपी दी जा रही है। शेष 30 कर्मचारियों की स्थिति स्थिर बताई गई है और उन्हें निगरानी में रखा गया है।
घायल कर्मचारियों का उपचार वेल्स हॉस्पिटल, वेंकटेश्वर हॉस्पिटल, राजीव गांधी गवर्नमेंट जनरल हॉस्पिटल और गवर्नमेंट स्टेनली मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में किया जा रहा है।
प्रवासी कर्मचारी सबसे अधिक प्रभावित
स्वास्थ्य अधिकारियों ने पुष्टि की है कि सभी 10 मृतक महिलाएँ थीं — इनमें से आठ ओडिशा की और दो असम की निवासी थीं। प्रभावित कर्मचारियों में तमिलनाडु के स्थानीय कामगारों के अलावा ओडिशा, असम, झारखंड, केरल और पश्चिम बंगाल के प्रवासी मज़दूर भी शामिल हैं। सर्वाधिक प्रभावित ओडिशा के 33 कर्मचारी अभी भी अस्पताल में हैं; असम के 16 और झारखंड के 9 मज़दूरों का भी उपचार जारी है। अधिकारियों ने बताया कि पाँच शव पहले ही एयरलिफ्ट कर ओडिशा भेजे जा चुके हैं, जबकि शेष शवों को कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनके गृह राज्यों को भेजा जाएगा।
सरकार की प्रतिक्रिया और जाँच
तमिलनाडु सरकार ने इस घटना की विस्तृत जाँच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों के अनुसार प्रभावित कर्मचारियों की चिकित्सीय निगरानी, फैक्ट्री परिसर की पर्यावरणीय जाँच और औद्योगिक सुरक्षा प्रक्रियाओं की समीक्षा एक साथ चल रही है। आपातकालीन चिकित्सा दल, पुलिस, अग्निशमन एवं बचाव कर्मी तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारी राहत एवं निगरानी कार्यों में सक्रिय हैं।
आगे क्या
यह हादसा ऐसे समय में आया है जब प्रवासी औद्योगिक कामगारों की सुरक्षा को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। 17 मरीज़ों का वेंटिलेटर पर होना इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में मृतक संख्या में और बढ़ोतरी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। जाँच के नतीजे और फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवालों के जवाब ही तय करेंगे कि इस त्रासदी की ज़िम्मेदारी किस पर आएगी।