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तिरुवल्लूर अमोनिया गैस लीक: 6 मजदूरों की मौत, ओडिशा की विशेष जांच टीम चेन्नई रवाना

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तिरुवल्लूर अमोनिया गैस लीक: 6 मजदूरों की मौत, ओडिशा की विशेष जांच टीम चेन्नई रवाना

सारांश

तमिलनाडु के तिरुवल्लूर में सीफूड फैक्ट्री से अमोनिया रिसाव ने 6 जिंदगियाँ लील लीं — मृतकों में असम, ओडिशा और झारखंड के प्रवासी मजदूर शामिल हैं। ओडिशा की विशेष टीम जाँच के लिए रवाना, मुख्यमंत्री ने 24 घंटे में रिपोर्ट माँगी।

मुख्य बातें

तिरुवल्लूर की सीफूड एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग यूनिट में रविवार, 22 जून को अमोनिया गैस लीक से कम से कम 6 मजदूरों की मौत , दर्जनों अस्पताल में भर्ती।
ओडिशा की विशेष जांच टीम चेन्नई रवाना; नेतृत्व श्रम और ईएसआई विभाग के विशेष सचिव राजेश अग्रवाल करेंगे।
घटना के समय फैक्ट्री में असम, ओडिशा और झारखंड की महिलाओं समेत करीब 120 प्रवासी कर्मचारी मौजूद थे।
करीब 130 कर्मचारियों को पास के सामुदायिक भवन में ठहराया गया, भोजन व जरूरी सुविधाएँ उपलब्ध।
जोसेफ विजय ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की; 24 घंटे में विस्तृत रिपोर्ट का निर्देश।
पुलिस ने मामला दर्ज किया; औद्योगिक सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की भी जांच जारी।

तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले में पेरियापलायम के निकट एक सीफूड एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग यूनिट में रविवार, 22 जून को अमोनिया गैस के रिसाव से कम से कम 6 मजदूरों की मौत हो गई और दर्जनों अन्य अस्पताल में भर्ती हैं। घटना की गंभीरता को देखते हुए ओडिशा सरकार की एक विशेष जांच टीम चेन्नई के लिए रवाना हो चुकी है।

जांच टीम की संरचना और जिम्मेदारी

ओडिशा की इस टीम का नेतृत्व श्रम और ईएसआई विभाग के विशेष सचिव राजेश अग्रवाल करेंगे। चेन्नई पहुँचने के बाद राजेश अग्रवाल और बीबी आचार्य सीधे तिरुवल्लूर जाएंगे, जहाँ घायल कर्मचारियों का इलाज चल रहा है और एक मृतक कर्मचारी का शव भी अभी वहीं रखा है।

टीम के सदस्य एमएम पाइक चेन्नई में ही रहेंगे ताकि वे श्रम विभाग के संयुक्त आयुक्त और सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधिकारियों के साथ पोस्टमार्टम और अन्य औपचारिकताओं के लिए समन्वय कर सकें। चेन्नई और तिरुवल्लूर दोनों स्थानों पर श्रम विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क स्थापित किया जा चुका है।

हादसे का विवरण और प्रभावित मजदूर

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, संदिग्ध अमोनिया रिसाव यूनिट के रेफ्रिजरेशन या प्रोसेसिंग सिस्टम से शुरू हुआ और तेजी से फैसिलिटी के कई हिस्सों में फैल गया। घटना के समय फैक्ट्री परिसर में असम, ओडिशा और झारखंड की महिलाओं समेत करीब 120 प्रवासी कर्मचारी मौजूद थे।

गैस के संपर्क में आने वाले मजदूरों को सांस लेने में तीव्र कठिनाई, चक्कर आना और जलन की शिकायत हुई। कुछ मजदूरों के मुँह और नाक से खून बहने की भी खबर है, जो गैस की विषाक्तता की गंभीरता को दर्शाता है। वर्तमान में करीब 130 कर्मचारियों को पास के एक सामुदायिक भवन में ठहराया गया है और उनके लिए भोजन व अन्य जरूरी व्यवस्थाएँ की गई हैं।

सरकार की प्रतिक्रिया

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने घटना पर गहरी चिंता जताई और अधिकारियों को प्रभावित मजदूरों को सभी जरूरी चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। उन्होंने लीक के कारणों की पड़ताल के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति गठित करने का भी आदेश दिया।

मुख्यमंत्री ने पैनल को तत्काल निरीक्षण करने और 24 घंटे के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। जांच में सुरक्षा प्रोटोकॉल, रखरखाव प्रक्रियाओं और फैसिलिटी में संभावित खामियों की पड़ताल होने की उम्मीद है।

पुलिस जांच और कानूनी कार्रवाई

पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच जारी है। अधिकारी यह भी पता लगा रहे हैं कि क्या औद्योगिक सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के कारण यह हादसा हुआ। गौरतलब है कि यह फैसिलिटी बड़ी संख्या में अंतर-राज्यीय प्रवासी श्रमिकों को रोजगार देती थी, जिससे श्रमिक सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

यह हादसा ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में औद्योगिक सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं। जांच के नतीजे और जिम्मेदारी तय होना अभी बाकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि अंतर-राज्यीय प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा की व्यवस्थागत अनदेखी का आईना है — जहाँ असम, ओडिशा और झारखंड से आई महिलाएँ तमिलनाडु की एक फैसिलिटी में काम कर रही थीं, जिसके रेफ्रिजरेशन सिस्टम पर पर्याप्त निगरानी के सवाल अब उठ रहे हैं। ओडिशा की जांच टीम का भेजा जाना स्वागत योग्य कदम है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि 24 घंटे की रिपोर्ट महज औपचारिकता बनती है या जवाबदेही तय करती है। देश में बार-बार होने वाले ऐसे हादसे संकेत देते हैं कि औद्योगिक सुरक्षा निरीक्षण तंत्र या तो कमजोर है या लागू नहीं हो रहा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तिरुवल्लूर गैस लीक हादसा क्या है?
तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले में पेरियापलायम के पास एक सीफूड एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग यूनिट में 22 जून को अमोनिया गैस रिसाव हुआ, जिसमें कम से कम 6 मजदूरों की मौत हो गई और दर्जनों अन्य अस्पताल में भर्ती हैं। रिसाव यूनिट के रेफ्रिजरेशन या प्रोसेसिंग सिस्टम से शुरू हुआ बताया जा रहा है।
ओडिशा की जांच टीम तिरुवल्लूर क्यों जा रही है?
मृतकों और घायलों में ओडिशा के प्रवासी मजदूर शामिल हैं, इसलिए ओडिशा सरकार ने श्रम और ईएसआई विभाग के विशेष सचिव राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में एक विशेष टीम भेजी है। यह टीम पोस्टमार्टम, घायलों के इलाज और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय सुनिश्चित करेगी।
हादसे में कितने और किन राज्यों के मजदूर प्रभावित हुए?
घटना के समय फैक्ट्री में असम, ओडिशा और झारखंड की महिलाओं समेत करीब 120 प्रवासी कर्मचारी मौजूद थे। करीब 130 कर्मचारियों को पास के सामुदायिक भवन में ठहराया गया है और उनके लिए भोजन व जरूरी सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं।
तमिलनाडु सरकार ने इस हादसे पर क्या कदम उठाए हैं?
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है और 24 घंटे के भीतर विस्तृत रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और औद्योगिक सुरक्षा नियमों के संभावित उल्लंघन की भी जांच की जा रही है।
अमोनिया गैस लीक से मजदूरों पर क्या असर हुआ?
गैस के संपर्क में आने वाले मजदूरों को सांस लेने में तीव्र कठिनाई, चक्कर और जलन हुई। कुछ मजदूरों के मुँह और नाक से खून बहने की भी खबर है, जो गैस की उच्च विषाक्तता को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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