कोझिकोड में निपाह वायरस की पुष्टि: 43 वर्षीय व्यक्ति आइसोलेशन में, केरल स्वास्थ्य विभाग हाई अलर्ट पर
सारांश
मुख्य बातें
केरल के कोझिकोड जिले के फारूक इलाके में रहने वाले एक 43 वर्षीय व्यक्ति में निपाह वायरस संक्रमण की प्रारंभिक पुष्टि हुई है, जिसके बाद राज्य स्वास्थ्य विभाग ने 11 जून 2026 को आपातकालीन रोकथाम प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए हैं। मरीज को कोझिकोड मेडिकल कॉलेज अस्पताल के विशेष आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है, जबकि अंतिम पुष्टि के लिए नमूने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV), पुणे भेजे गए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
मेडिकल कॉलेज की प्रयोगशाला में संक्रमण की पहचान होते ही मरीज को आधी रात के आसपास विशेष आइसोलेशन सुविधा में स्थानांतरित किया गया। पुरानी इमारतों की सफाई का काम करने वाले इस व्यक्ति को संदेह है कि फारूक में चमगादड़ों की भारी उपस्थिति वाली एक इमारत में काम के दौरान वह वायरस की चपेट में आया। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार चमगादड़ की बीट या दूषित सतहों के संपर्क से यह संक्रमण फैल सकता है।
निदान में देरी और बढ़ी हुई संपर्क सूची
मरीज शुरू में तेज बुखार के साथ चिकित्सकों के पास पहुँचा था, किंतु बाद में भ्रम और व्यवहार में असामान्य बदलाव जैसे गंभीर लक्षण सामने आए। परिजनों ने इन लक्षणों को अल्कोहल विड्रॉल का परिणाम समझा, जिसके कारण मरीज को पहले एक नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती कराया गया, जहाँ वह कई दिनों तक रहा। हालत बिगड़ने पर उसे एक बड़े निजी अस्पताल में स्थानांतरित किया गया। इस देरी के चलते केंद्र के अन्य मरीज, स्टाफ और परिजन — सभी संभावित संपर्क सूची में आ गए हैं।
रोकथाम और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग
स्वास्थ्य अधिकारियों ने मरीज की गतिविधियों का विस्तृत विवरण तैयार करना और सभी निकट-संपर्कों की पहचान करना शुरू कर दिया है। कोझिकोड मेडिकल कॉलेज के एसडीएस ब्लॉक में प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है — बैरिकेड लगाए गए हैं और आसपास की पार्किंग सुविधा बंद की गई है। संपर्क सूची में आए सभी व्यक्तियों को कड़ी निगरानी में रखा जाएगा।
केरल की तैयारी पर उठते सवाल
यह ताज़ा मामला केरल में बार-बार आने वाले निपाह प्रकोप के संदर्भ में राज्य की तैयारियों पर बहस फिर से छेड़ता है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य को निपाह प्रबंधन में एक मॉडल राज्य के रूप में देखा जाता रहा है। गौरतलब है कि अंतिम पुष्टि के लिए अब भी नमूने पुणे भेजने पड़ रहे हैं, जो वायरस की उन्नत जाँच के लिए राज्य की बाहरी सुविधाओं पर निर्भरता को उजागर करता है। आलोचकों का कहना है कि केरल में निपाह अनुसंधान के लिए कोई समर्पित उन्नत प्रयोगशाला न होना एक गंभीर खामी है।
निपाह वायरस: क्या जानना ज़रूरी है
निपाह एक जूनोटिक वायरस है जो मुख्यतः चमगादड़ों से मनुष्यों में फैलता है। संक्रमण के 4 से 14 दिन बाद लक्षण प्रकट होते हैं, जिनमें तेज बुखार, साँस लेने में कठिनाई, उल्टी, न्यूरोलॉजिकल जटिलताएँ और मस्तिष्क में सूजन शामिल हैं। NIV पुणे से अंतिम परीक्षण रिपोर्ट की प्रतीक्षा है और अगले कुछ दिन कोझिकोड व आसपास के क्षेत्रों के लिए अत्यंत निर्णायक माने जा रहे हैं।