10 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

गुजरात निराधार वृद्ध पेंशन योजना: 60+ बुजुर्गों को ₹1,000–₹1,250 मासिक सहायता, लाखों लाभार्थी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
गुजरात निराधार वृद्ध पेंशन योजना: 60+ बुजुर्गों को ₹1,000–₹1,250 मासिक सहायता, लाखों लाभार्थी

सारांश

गुजरात सरकार की निराधार वृद्ध पेंशन योजना लाखों असहाय बुजुर्गों को ₹1,000–₹1,250 मासिक सहायता दे रही है। बनासकांठा के हजारीमल जोशी जैसे लाभार्थियों के लिए यह सिर्फ पैसा नहीं — आत्मसम्मान के साथ जीने का ज़रिया है।

मुख्य बातें

गुजरात निराधार वृद्ध पेंशन योजना के तहत 60–79 वर्ष के बुजुर्गों को ₹1,000 और 80 वर्ष व अधिक आयु के बुजुर्गों को ₹1,250 प्रतिमाह दिए जाते हैं।
राशि DBT (प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण) के माध्यम से सीधे बैंक खाते में जमा होती है।
पालनपुर तालुका में अकेले 3,988 लाभार्थी इस योजना का लाभ उठा रहे हैं।
योजना ग्रामीण और शहरी — दोनों क्षेत्रों में लागू है; आवेदन ऑनलाइन (ग्राम पंचायत) और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से संभव।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग योजना का संचालन कर रहा है।

गुजरात सरकार की निराधार वृद्ध पेंशन योजना राज्य के लाखों असहाय बुजुर्गों के लिए आर्थिक आधार बनकर सामने आई है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग द्वारा संचालित इस योजना के तहत 60 से 79 वर्ष के वृद्धजनों को प्रतिमाह ₹1,000 और 80 वर्ष व उससे अधिक आयु के बुजुर्गों को ₹1,250 की सहायता सीधे बैंक खाते में दी जा रही है। यह योजना ग्रामीण और शहरी — दोनों क्षेत्रों में समान रूप से लागू है।

योजना की मुख्य विशेषताएँ

प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में जमा होती है, जिससे बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो गई है। आवेदन प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है — आवेदन फॉर्म जिलाधिकारी और मामलतदार कार्यालयों में निःशुल्क उपलब्ध हैं। इसके अलावा ग्राम पंचायत कार्यालयों के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी दी गई है।

लाभार्थी की आवाज़: हजारीमल जोशी की कहानी

बनासकांठा जिले की पालनपुर तालुका निवासी बुजुर्ग हजारीमल जोशी पिछले दस वर्षों से इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने बताया, 'हमें पिछले दस वर्षों से हर महीने एक हजार रुपए पेंशन मिल रही है। इससे काफी सहायता मिलती है और मेरा गुजारा चल जाता है। मैं मंदिर में पूजा करता हूं। कहीं आना-जाना हो या कोई सामान खरीदना हो, तो इस पैसे से मदद मिल जाती है।'

जोशी ने यह भी कहा कि अब उन्हें दवा और इलाज जैसे ज़रूरी खर्चों के लिए अपने बच्चों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। उनके शब्दों में, 'इस उम्र में सरकार की यह सहायता आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने का सहारा बनी है।' यह बयान उन हज़ारों बुजुर्गों की भावना का प्रतिनिधित्व करता है जो परिवार के सहारे के बिना जीवन यापन कर रहे हैं।

ज़मीनी क्रियान्वयन: पालनपुर तालुका की स्थिति

पालनपुर के मामलतदार एस.बी. प्रजापति ने बताया कि पालनपुर तालुका में वर्तमान में 3,988 लाभार्थियों को इस योजना के तहत आर्थिक सहायता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि योजना का उद्देश्य वृद्धजनों को आत्मनिर्भर बनाना है और इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। गौरतलब है कि बनासकांठा जैसे ग्रामीण-बहुल जिलों में इस तरह की योजनाओं की पहुँच विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है, जहाँ बुजुर्गों के लिए रोज़गार के अवसर सीमित हैं।

व्यापक सामाजिक संदर्भ

भारत में वृद्ध जनसंख्या तेज़ी से बढ़ रही है। आँकड़ों के अनुसार, देश में 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की संख्या वर्तमान में कुल जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा है और यह अनुपात आने वाले दशकों में और बढ़ेगा। ऐसे में राज्य सरकारों की पेंशन योजनाएँ सामाजिक सुरक्षा के ढाँचे की रीढ़ बनती जा रही हैं। यह योजना ऐसे समय में और प्रासंगिक हो जाती है जब एकल परिवारों की बढ़ती संख्या के कारण बुजुर्गों को पारिवारिक सहारा कम मिल रहा है।

आगे की राह

सरकार की ओर से योजना के दायरे और लाभार्थियों की संख्या में निरंतर विस्तार का संकेत दिया गया है। DBT प्रणाली के ज़रिए पारदर्शी वितरण और सरलीकृत आवेदन प्रक्रिया इसे राज्य की सबसे सुलभ कल्याण योजनाओं में से एक बनाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि पेंशन राशि की समय-समय पर समीक्षा और मुद्रास्फीति के अनुरूप संशोधन इस योजना की दीर्घकालिक प्रभावशीलता के लिए आवश्यक होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 की मासिक पेंशन एक बुजुर्ग की बुनियादी ज़रूरतों के लिए पर्याप्त है या नहीं — यह सवाल इस योजना की असली कसौटी है, खासकर तब जब खुदरा महँगाई दर लगातार दबाव में है। पालनपुर जैसे एक तालुका में 3,988 लाभार्थी यह दर्शाते हैं कि माँग व्यापक है, लेकिन पेंशन राशि में पिछले कई वर्षों से कोई उल्लेखनीय संशोधन नहीं हुआ है। DBT प्रणाली पारदर्शिता के लिहाज़ से सराहनीय है, फिर भी ग्रामीण बुजुर्गों में बैंकिंग पहुँच और डिजिटल साक्षरता की सीमाएँ अभी भी एक अनदेखी चुनौती बनी हुई हैं।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात निराधार वृद्ध पेंशन योजना क्या है?
यह गुजरात सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग द्वारा संचालित एक कल्याण योजना है, जिसके तहत 60 वर्ष व उससे अधिक आयु के असहाय बुजुर्गों को मासिक पेंशन दी जाती है। 60–79 वर्ष के लाभार्थियों को ₹1,000 और 80 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को ₹1,250 प्रतिमाह DBT के माध्यम से सीधे बैंक खाते में मिलते हैं।
इस योजना के लिए आवेदन कैसे करें?
आवेदन फॉर्म जिलाधिकारी और मामलतदार कार्यालयों में निःशुल्क उपलब्ध हैं। ग्राम पंचायत कार्यालयों के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन भी किया जा सकता है। यह सुविधा ग्रामीण और शहरी — दोनों क्षेत्रों के निवासियों के लिए उपलब्ध है।
पालनपुर तालुका में कितने लोगों को इस योजना का लाभ मिल रहा है?
पालनपुर के मामलतदार एस.बी. प्रजापति के अनुसार, पालनपुर तालुका में वर्तमान में 3,988 लाभार्थियों को निराधार वृद्ध पेंशन योजना के तहत आर्थिक सहायता दी जा रही है।
क्या यह योजना केवल ग्रामीण क्षेत्रों के लिए है?
नहीं, यह योजना ग्रामीण और शहरी — दोनों क्षेत्रों में समान रूप से लागू है। पात्र बुजुर्ग चाहे गाँव में रहते हों या शहर में, DBT के ज़रिए सीधे बैंक खाते में पेंशन प्राप्त कर सकते हैं।
इस योजना से बुजुर्गों के जीवन पर क्या असर पड़ रहा है?
बनासकांठा के हजारीमल जोशी जैसे लाभार्थियों के अनुसार, यह पेंशन उन्हें दैनिक खर्चों, दवाओं और आवागमन के लिए परिवार पर निर्भर नहीं रहने देती। उनका कहना है कि इस उम्र में यह सहायता आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने का सहारा बनी है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 घंटे पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 4 सप्ताह पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले