हरदीप पुरी: वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद भारत में 4 साल 60 दिन से पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर

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हरदीप पुरी: वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद भारत में 4 साल 60 दिन से पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर

सारांश

वैश्विक ऊर्जा संकट, युद्ध और होर्मुज तनाव के बीच भारत ने 4 साल 60 दिनों तक पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाईं — जबकि पड़ोसी देशों में 66% तक बढ़ोतरी हुई। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सूरत में इसे सरकार की आर्थिक दृढ़ता का प्रमाण बताया।

Key Takeaways

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 1 मई 2026 को सूरत में VGRC सम्मेलन में कहा कि भारत में 4 साल 60 दिनों से पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बढ़ी हैं। पड़ोसी देशों में इसी दौरान ईंधन कीमतों में 39 से 66 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई, साथ ही राशनिंग और ईंधन कमी की समस्याएँ भी रहीं। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने बताया कि सूरत की L&T हजीरा इकाई में K9 वज्र तोप और चिनाब रेल ब्रिज में AM/NS स्टील का उपयोग हुआ। जनभागीदारी से 70 लाख से अधिक जल संरक्षण संरचनाएँ बनाई गईं, जिससे 2 अरब घन मीटर अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता विकसित हुई। सूरत नगर निगम ट्रीटेड पानी की बिक्री से सालाना ₹300 करोड़ से अधिक अर्जित करता है।

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार, 1 मई 2026 को सूरत में आयोजित वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस (VGRC) - साउथ गुजरात में घोषणा की कि युद्ध, सप्लाई चेन में बाधाओं और भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत ने पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों को लगातार 4 साल 60 दिनों से स्थिर बनाए रखा है। उन्होंने इसे मोदी सरकार की ऊर्जा नीति की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया।

वैश्विक संकट और भारत की स्थिरता

पुरी ने सम्मेलन में कहा कि वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य पिछले कुछ वर्षों में अत्यंत अस्थिर रहा है। होर्मुज स्ट्रेट पर तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन में व्यवधान के कारण दुनियाभर में ऊर्जा कीमतें आसमान छूती रहीं। इसके बावजूद भारत ने घरेलू ईंधन कीमतों को नियंत्रित रखा। उन्होंने कहा, ''सरकार ने घबराहट को नीति नहीं बनने दिया।''

यह ऐसे समय में उल्लेखनीय है जब पड़ोसी देशों में ईंधन की कीमतों में 39 से 66 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। कई देशों में ईंधन की कमी, राशनिंग और कामकाज के सीमित घंटों जैसी गंभीर समस्याएं भी सामने आईं।

आर्थिक स्थिरता और चुनावी दबाव

पुरी ने यह भी रेखांकित किया कि इस अवधि में कई चुनावी दौर आए, फिर भी सरकार ने लोकलुभावन दबावों में आकर ईंधन कीमतों के साथ कोई राजनीतिक छेड़छाड़ नहीं की। उन्होंने कहा कि ''कई चुनावी दौर के बावजूद आर्थिक स्थिरता बनाए रखी गई।'' गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय आया है जब विपक्ष लगातार ईंधन मूल्य नीति पर सवाल उठाता रहा है।

सूरत के औद्योगिक योगदान पर सी.आर. पाटिल

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने भी सम्मेलन को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय बुनियादी ढाँचे और रक्षा निर्माण में सूरत के औद्योगिक योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर में चिनाब रेल ब्रिज के निर्माण में AM/NS के स्टील का उपयोग हुआ है। इसके अलावा L&T की हजीरा इकाई में निर्मित K9 वज्र तोप प्रणाली भारत की रक्षा क्षमता को और मज़बूत कर रही है।

जल प्रबंधन: 70 लाख संरचनाएँ, 2 अरब घन मीटर क्षमता

पाटिल ने जल संरक्षण पर विस्तार से बताया कि जनभागीदारी के ज़रिए देशभर में 70 लाख से अधिक जल संरक्षण संरचनाएँ बनाई गई हैं, जिससे लगभग 2 अरब घन मीटर अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता विकसित हुई है। उन्होंने जल उपयोग के आँकड़े साझा करते हुए कहा कि देश में 83 फीसदी पानी कृषि, 14 फीसदी घरेलू ज़रूरतों और 2.5 फीसदी उद्योगों में उपयोग होता है।

उन्होंने उद्योगों से टिकाऊ जल उपयोग के तरीके अपनाने और भूजल के अत्यधिक दोहन को रोकने का आग्रह किया। उल्लेखनीय है कि सूरत नगर निगम शोधित (ट्रीटेड) पानी की बिक्री से हर साल ₹300 करोड़ से अधिक की कमाई करता है और शहर ने अगले 50 वर्षों की जल ज़रूरतों को ध्यान में रखकर दीर्घकालिक योजना तैयार की है।

आगे की राह

VGRC जैसे मंचों पर केंद्रीय मंत्रियों की सक्रिय भागीदारी यह संकेत देती है कि सरकार क्षेत्रीय औद्योगिक विस्तार और ऊर्जा सुरक्षा को एक साथ आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। ईंधन मूल्य स्थिरता की यह नीति आने वाले समय में भी जारी रहेगी या नहीं, यह वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगा।

Point of View

लेकिन यह पूरी तस्वीर नहीं है — मार्च 2024 में चुनाव से ठीक पहले पेट्रोल-डीजल की कीमतों में ₹2 प्रति लीटर की कटौती की गई थी, जो राजनीतिक समय की दृष्टि से उल्लेखनीय है। यह भी सच है कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें 2022 के शिखर से काफी नीचे आ चुकी हैं, जिससे स्थिरता बनाए रखना अपेक्षाकृत आसान रहा। असली सवाल यह है कि क्या सरकारी तेल कंपनियाँ — जो इस दौरान भारी घाटे में रहीं — इस नीति की असली कीमत चुका रही हैं, और यह बोझ अंततः करदाताओं पर पड़ेगा या नहीं।
NationPress
01/05/2026

Frequently Asked Questions

भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें कितने समय से नहीं बढ़ी हैं?
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, भारत में खुदरा ईंधन कीमतों में 4 साल 60 दिनों से कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। यह बयान उन्होंने 1 मई 2026 को सूरत में VGRC सम्मेलन में दिया।
पड़ोसी देशों में ईंधन की कीमतें कितनी बढ़ीं?
पुरी के अनुसार, पड़ोसी देशों में ईंधन की कीमतों में 39 से 66 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई। इन देशों में ईंधन की कमी, राशनिंग और कामकाज के सीमित घंटों जैसी समस्याएँ भी देखने को मिलीं।
वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस (VGRC) क्या है?
VGRC वाइब्रेंट गुजरात पहल के तहत आयोजित क्षेत्रीय विस्तार सम्मेलन है। 1 मई 2026 को सूरत में आयोजित इस सम्मेलन में केंद्र और राज्य के मंत्री, राजनयिक और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल हुए।
सूरत का रक्षा और बुनियादी ढाँचे में क्या योगदान है?
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल के अनुसार, L&T की हजीरा इकाई में K9 वज्र तोप प्रणाली बनाई जा रही है और चिनाब रेल ब्रिज में AM/NS का स्टील उपयोग हुआ है। ये दोनों देश की ऐतिहासिक परियोजनाओं में सूरत के औद्योगिक योगदान के उदाहरण हैं।
सूरत नगर निगम पानी की बिक्री से कितनी कमाई करता है?
सूरत नगर निगम शोधित (ट्रीटेड) पानी की बिक्री से हर साल ₹300 करोड़ से अधिक की कमाई करता है। शहर ने अगले 50 वर्षों की जल ज़रूरतों को ध्यान में रखकर दीर्घकालिक जल प्रबंधन योजना भी तैयार की है।
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