हरदीप पुरी: वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद भारत में 4 साल 60 दिन से पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर
सारांश
Key Takeaways
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार, 1 मई 2026 को सूरत में आयोजित वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस (VGRC) - साउथ गुजरात में घोषणा की कि युद्ध, सप्लाई चेन में बाधाओं और भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत ने पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों को लगातार 4 साल 60 दिनों से स्थिर बनाए रखा है। उन्होंने इसे मोदी सरकार की ऊर्जा नीति की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया।
वैश्विक संकट और भारत की स्थिरता
पुरी ने सम्मेलन में कहा कि वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य पिछले कुछ वर्षों में अत्यंत अस्थिर रहा है। होर्मुज स्ट्रेट पर तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन में व्यवधान के कारण दुनियाभर में ऊर्जा कीमतें आसमान छूती रहीं। इसके बावजूद भारत ने घरेलू ईंधन कीमतों को नियंत्रित रखा। उन्होंने कहा, ''सरकार ने घबराहट को नीति नहीं बनने दिया।''
यह ऐसे समय में उल्लेखनीय है जब पड़ोसी देशों में ईंधन की कीमतों में 39 से 66 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। कई देशों में ईंधन की कमी, राशनिंग और कामकाज के सीमित घंटों जैसी गंभीर समस्याएं भी सामने आईं।
आर्थिक स्थिरता और चुनावी दबाव
पुरी ने यह भी रेखांकित किया कि इस अवधि में कई चुनावी दौर आए, फिर भी सरकार ने लोकलुभावन दबावों में आकर ईंधन कीमतों के साथ कोई राजनीतिक छेड़छाड़ नहीं की। उन्होंने कहा कि ''कई चुनावी दौर के बावजूद आर्थिक स्थिरता बनाए रखी गई।'' गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय आया है जब विपक्ष लगातार ईंधन मूल्य नीति पर सवाल उठाता रहा है।
सूरत के औद्योगिक योगदान पर सी.आर. पाटिल
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने भी सम्मेलन को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय बुनियादी ढाँचे और रक्षा निर्माण में सूरत के औद्योगिक योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर में चिनाब रेल ब्रिज के निर्माण में AM/NS के स्टील का उपयोग हुआ है। इसके अलावा L&T की हजीरा इकाई में निर्मित K9 वज्र तोप प्रणाली भारत की रक्षा क्षमता को और मज़बूत कर रही है।
जल प्रबंधन: 70 लाख संरचनाएँ, 2 अरब घन मीटर क्षमता
पाटिल ने जल संरक्षण पर विस्तार से बताया कि जनभागीदारी के ज़रिए देशभर में 70 लाख से अधिक जल संरक्षण संरचनाएँ बनाई गई हैं, जिससे लगभग 2 अरब घन मीटर अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता विकसित हुई है। उन्होंने जल उपयोग के आँकड़े साझा करते हुए कहा कि देश में 83 फीसदी पानी कृषि, 14 फीसदी घरेलू ज़रूरतों और 2.5 फीसदी उद्योगों में उपयोग होता है।
उन्होंने उद्योगों से टिकाऊ जल उपयोग के तरीके अपनाने और भूजल के अत्यधिक दोहन को रोकने का आग्रह किया। उल्लेखनीय है कि सूरत नगर निगम शोधित (ट्रीटेड) पानी की बिक्री से हर साल ₹300 करोड़ से अधिक की कमाई करता है और शहर ने अगले 50 वर्षों की जल ज़रूरतों को ध्यान में रखकर दीर्घकालिक योजना तैयार की है।
आगे की राह
VGRC जैसे मंचों पर केंद्रीय मंत्रियों की सक्रिय भागीदारी यह संकेत देती है कि सरकार क्षेत्रीय औद्योगिक विस्तार और ऊर्जा सुरक्षा को एक साथ आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। ईंधन मूल्य स्थिरता की यह नीति आने वाले समय में भी जारी रहेगी या नहीं, यह वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगा।