मेगा डीएससी में कोई नियम उल्लंघन नहीं, 148 दिनों में 15,941 शिक्षक नियुक्त: सीएम चंद्रबाबू नायडू
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने सोमवार, 17 अगस्त को विधानसभा में स्पष्ट किया कि मेगा डीएससी शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में नियमों का कोई उल्लंघन नहीं हुआ और पूरी चयन प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से ऑनलाइन संपन्न की गई। उन्होंने दावा किया कि 15,941 शिक्षकों की नियुक्ति महज 148 दिनों के भीतर पूरी कर ली गई, जो सरकार की प्रशासनिक क्षमता का प्रमाण है।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री नायडू ने विधानसभा में बताया कि पद संभालते ही उनके पहले हस्ताक्षर से मेगा डीएससी की प्रक्रिया शुरू की गई। परीक्षा 154 केंद्रों पर कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित हुई, जिसमें 13 विषयों में 42,000 प्रश्न तैयार किए गए। उन्होंने कहा, 'पूरी तरह से मेरिट के आधार पर 15,941 उम्मीदवारों को चुना गया और नियुक्त किया गया। शिकायतों के समाधान के लिए जोनल-लेवल कमेटी, स्टेट-लेवल कमेटी और एक अपीलेट अथॉरिटी बनाई गई थी।'
पिछली सरकार पर आरोप
नायडू ने वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि 2019 से 2024 के बीच सत्ता में रही पिछली सरकार ने पाँच वर्षों में एक भी शिक्षक की भर्ती नहीं की, जबकि शिक्षा क्षेत्र में बड़े-बड़े दावे किए गए। उन्होंने कहा कि अब तक हुई 14 डीएससी परीक्षाओं में से 11 परीक्षाएँ तेलुगु देशम पार्टी (TDP) और NDA सरकारों के कार्यकाल में आयोजित हुईं और इनमें भ्रष्टाचार की एक भी शिकायत दर्ज नहीं हुई।
विपक्ष पर 'हिट-एंड-रन' राजनीति का आरोप
मुख्यमंत्री ने YSRCP नेताओं पर 'हिट-एंड-रन' की राजनीति के जरिए झूठा अभियान चलाने का आरोप लगाया। उनके अनुसार, आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी होने के बाद भी विपक्ष रोज़ाना नई साजिशें रचता रहा और ओडिशा के मज़दूरों तथा 90 वर्ष के बुज़ुर्गों को विरोध प्रदर्शनों में शामिल कराया। उन्होंने यह भी बताया कि एक सेवानिवृत्त IAS अधिकारी और एक पूर्व मंत्री मनमाने बयान दे रहे हैं, जो भर्ती अधिसूचना की वास्तविकता से मेल नहीं खाते।
शिक्षकों का जवाबी प्रदर्शन
नायडू ने बताया कि नियुक्त शिक्षक खुद सड़कों पर उतर आए हैं। बड़ी संख्या में शिक्षकों ने कुरनूल और विजयवाड़ा में मेगा डीएससी के विरुद्ध चलाए जा रहे झूठे प्रचार की निंदा करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष की ओर से न्यायालय में भी याचिकाएँ दायर की जा रही हैं।
सरकार की चुनौती
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार जनता के प्रति जवाबदेह है, न कि साजिश रचने वाले दलों के प्रति। उन्होंने विपक्ष को खुली चुनौती दी कि यदि उनमें साहस है, तो वे विधानसभा में आकर इस मुद्दे पर सार्वजनिक बहस करें। गौरतलब है कि TET और डीएससी अधिसूचना के साथ-साथ क्षैतिज और लंबवत आरक्षण प्रक्रियाओं को सख्ती से लागू किया गया और स्पोर्ट्स कोटा के लिए केंद्र सरकार के नियमों का पालन किया गया।