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नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 27 किमी दायरे में लेजर और कृत्रिम रोशनी पर प्रतिबंध, उल्लंघन पर होगी कानूनी कार्रवाई

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नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 27 किमी दायरे में लेजर और कृत्रिम रोशनी पर प्रतिबंध, उल्लंघन पर होगी कानूनी कार्रवाई

सारांश

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 27 किमी दायरे में लेजर बीम और कृत्रिम रोशनी पर प्रतिबंध लागू — पायलटों की दृष्टि और विमान सुरक्षा की रक्षा के लिए। भारतीय वायुयान अधिनियम 2024 के तहत उल्लंघन पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई होगी।

मुख्य बातें

गौतमबुद्धनगर जिला प्रशासन ने 18 अगस्त 2026 को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 27 किमी दायरे में लेजर और कृत्रिम रोशनी पर प्रतिबंध लागू किया।
प्रतिबंध भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 और एयरक्राफ्ट रूल्स, 1937 के नियम 66(1) तथा अधिसूचना जीएसआर 733(ई) पर आधारित है।
लेजर बीम, लाइट-शो और आकाश की ओर निर्देशित कोई भी कृत्रिम रोशनी पूरी तरह वर्जित है।
व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं के साथ-साथ कार्यक्रम आयोजकों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर भी नियम लागू होंगे।
उल्लंघन पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान; प्रशासन द्वारा निरंतर निगरानी की जाएगी।

गौतमबुद्धनगर जिला प्रशासन ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 27 किलोमीटर के दायरे में लेजर बीम, लाइट-शो और अन्य कृत्रिम रोशनी के उपयोग पर सख्त प्रतिबंध लागू किए हैं, जिसका उद्देश्य विमानन सुरक्षा सुनिश्चित करना है। 18 अगस्त 2026 को जारी इन निर्देशों के तहत बिना अनुमति लेजर का इस्तेमाल करने पर जुर्माने सहित कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

प्रतिबंध का कानूनी आधार

जिलाधिकारी, गौतमबुद्धनगर ने स्पष्ट किया कि यह प्रतिबंध भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 तथा एयरक्राफ्ट रूल्स, 1937 के नियम 66(1) के अंतर्गत 10 अक्टूबर 2023 को जारी अधिसूचना संख्या जीएसआर 733(ई) के नियम 6(1) पर आधारित है। इन्हीं प्रावधानों के तहत एयरपोर्ट के इर्द-गिर्द 27 किलोमीटर का प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया गया है।

गौरतलब है कि भारत में एयरपोर्ट के आसपास लेजर और कृत्रिम प्रकाश को लेकर नियम पहले से विद्यमान हैं, किंतु नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के परिचालन को ध्यान में रखते हुए इन्हें स्थानीय स्तर पर लागू और सुदृढ़ किया गया है।

क्या-क्या है प्रतिबंधित

प्रशासन के अनुसार, 27 किमी के प्रतिबंधित क्षेत्र में निम्नलिखित पूरी तरह वर्जित हैं — लेजर बीम, लेजर शो, लाइट डिस्प्ले, और कोई भी ऐसी कृत्रिम रोशनी जो आकाश की दिशा में प्रक्षेपित हो और पायलटों की दृष्टि या एकाग्रता को प्रभावित कर सके। विशेष रूप से लेजर लाइट की तीव्र किरणें उड़ान के दौरान कॉकपिट तक पहुँचने पर पायलट का ध्यान भटका सकती हैं और कुछ परिस्थितियों में उनकी दृष्टि को भी प्रभावित कर सकती हैं, जिससे विमान के सुरक्षित संचालन पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।

यह प्रतिबंध केवल व्यक्तिगत उपयोग तक सीमित नहीं है — कार्यक्रमों, समारोहों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक आयोजनों के आयोजकों पर भी इन नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।

उल्लंघन पर कार्रवाई

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना अनुमति लेजर या प्रतिबंधित कृत्रिम रोशनी का उपयोग विमानन सुरक्षा नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। दोषी व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध लागू कानून के तहत जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन द्वारा इन नियमों के पालन पर निरंतर निगरानी रखी जाएगी।

आम जनता और आयोजकों से अपील

जिलाधिकारी ने स्थानीय नागरिकों, सांस्कृतिक और व्यावसायिक आयोजकों, तथा संस्थानों से अपील की है कि वे 27 किमी के प्रतिबंधित क्षेत्र में किसी भी ऐसी गतिविधि से बचें जो विमानों की उड़ान और यात्रियों की सुरक्षा को जोखिम में डाल सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अपने परिचालन चरण की ओर बढ़ रहा है और एयरपोर्ट के आसपास का क्षेत्र तेज़ी से विकसित हो रहा है।

आगे क्या होगा

प्रशासन ने संकेत दिया है कि नियमों के अनुपालन की निगरानी के लिए एक व्यवस्था तैयार की जाएगी। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के परिचालन की शुरुआत के साथ इन प्रतिबंधों को और कड़ाई से लागू किए जाने की संभावना है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे नियम न केवल पायलटों की सुरक्षा के लिए, बल्कि हवाई यात्रियों की समग्र सुरक्षा के लिए भी अनिवार्य हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती क्रियान्वयन की है — खासकर तब जब एयरपोर्ट के आसपास का क्षेत्र घनी आबादी और तेज़ विकास की चपेट में है। देश के अन्य प्रमुख हवाई अड्डों के अनुभव बताते हैं कि ऐसे नियम कागज़ पर मज़बूत होते हैं, लेकिन ज़मीन पर लागू करना कठिन रहता है। प्रशासन को निगरानी तंत्र और जन-जागरूकता अभियान दोनों पर समान ज़ोर देना होगा, अन्यथा यह आदेश महज़ एक औपचारिकता बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
19 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास लेजर पर प्रतिबंध क्यों लगाया गया है?
लेजर की तीव्र किरणें उड़ान के दौरान कॉकपिट तक पहुँचने पर पायलट का ध्यान भटका सकती हैं और उनकी दृष्टि को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे विमान सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न होता है। इसी कारण गौतमबुद्धनगर जिला प्रशासन ने एयरपोर्ट के 27 किमी दायरे में यह प्रतिबंध लागू किया है।
नोएडा एयरपोर्ट के आसपास कितने किलोमीटर का क्षेत्र प्रतिबंधित है?
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के चारों ओर 27 किलोमीटर का दायरा प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया गया है। इस क्षेत्र में लेजर बीम, लाइट-शो और आकाश की ओर निर्देशित किसी भी कृत्रिम रोशनी का उपयोग वर्जित है।
इस प्रतिबंध का कानूनी आधार क्या है?
यह प्रतिबंध भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 और एयरक्राफ्ट रूल्स, 1937 के नियम 66(1) के अंतर्गत 10 अक्टूबर 2023 को जारी अधिसूचना संख्या जीएसआर 733(ई) के नियम 6(1) पर आधारित है। इन्हीं प्रावधानों के तहत प्रतिबंधित क्षेत्र अधिसूचित किया गया है।
नियम तोड़ने पर क्या कार्रवाई होगी?
बिना अनुमति लेजर या प्रतिबंधित कृत्रिम रोशनी का उपयोग विमानन सुरक्षा नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। दोषी व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध लागू कानून के तहत जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
क्या यह प्रतिबंध केवल व्यक्तिगत उपयोग पर लागू है या आयोजकों पर भी?
यह प्रतिबंध व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं के साथ-साथ कार्यक्रमों, समारोहों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक आयोजनों के आयोजकों पर भी समान रूप से लागू होता है। सभी को निर्धारित नियमों का पालन करना अनिवार्य है।
राष्ट्र प्रेस
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