नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 27 किमी दायरे में लेजर और कृत्रिम रोशनी पर प्रतिबंध, उल्लंघन पर होगी कानूनी कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
गौतमबुद्धनगर जिला प्रशासन ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 27 किलोमीटर के दायरे में लेजर बीम, लाइट-शो और अन्य कृत्रिम रोशनी के उपयोग पर सख्त प्रतिबंध लागू किए हैं, जिसका उद्देश्य विमानन सुरक्षा सुनिश्चित करना है। 18 अगस्त 2026 को जारी इन निर्देशों के तहत बिना अनुमति लेजर का इस्तेमाल करने पर जुर्माने सहित कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
प्रतिबंध का कानूनी आधार
जिलाधिकारी, गौतमबुद्धनगर ने स्पष्ट किया कि यह प्रतिबंध भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 तथा एयरक्राफ्ट रूल्स, 1937 के नियम 66(1) के अंतर्गत 10 अक्टूबर 2023 को जारी अधिसूचना संख्या जीएसआर 733(ई) के नियम 6(1) पर आधारित है। इन्हीं प्रावधानों के तहत एयरपोर्ट के इर्द-गिर्द 27 किलोमीटर का प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया गया है।
गौरतलब है कि भारत में एयरपोर्ट के आसपास लेजर और कृत्रिम प्रकाश को लेकर नियम पहले से विद्यमान हैं, किंतु नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के परिचालन को ध्यान में रखते हुए इन्हें स्थानीय स्तर पर लागू और सुदृढ़ किया गया है।
क्या-क्या है प्रतिबंधित
प्रशासन के अनुसार, 27 किमी के प्रतिबंधित क्षेत्र में निम्नलिखित पूरी तरह वर्जित हैं — लेजर बीम, लेजर शो, लाइट डिस्प्ले, और कोई भी ऐसी कृत्रिम रोशनी जो आकाश की दिशा में प्रक्षेपित हो और पायलटों की दृष्टि या एकाग्रता को प्रभावित कर सके। विशेष रूप से लेजर लाइट की तीव्र किरणें उड़ान के दौरान कॉकपिट तक पहुँचने पर पायलट का ध्यान भटका सकती हैं और कुछ परिस्थितियों में उनकी दृष्टि को भी प्रभावित कर सकती हैं, जिससे विमान के सुरक्षित संचालन पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
यह प्रतिबंध केवल व्यक्तिगत उपयोग तक सीमित नहीं है — कार्यक्रमों, समारोहों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक आयोजनों के आयोजकों पर भी इन नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।
उल्लंघन पर कार्रवाई
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना अनुमति लेजर या प्रतिबंधित कृत्रिम रोशनी का उपयोग विमानन सुरक्षा नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। दोषी व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध लागू कानून के तहत जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन द्वारा इन नियमों के पालन पर निरंतर निगरानी रखी जाएगी।
आम जनता और आयोजकों से अपील
जिलाधिकारी ने स्थानीय नागरिकों, सांस्कृतिक और व्यावसायिक आयोजकों, तथा संस्थानों से अपील की है कि वे 27 किमी के प्रतिबंधित क्षेत्र में किसी भी ऐसी गतिविधि से बचें जो विमानों की उड़ान और यात्रियों की सुरक्षा को जोखिम में डाल सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अपने परिचालन चरण की ओर बढ़ रहा है और एयरपोर्ट के आसपास का क्षेत्र तेज़ी से विकसित हो रहा है।
आगे क्या होगा
प्रशासन ने संकेत दिया है कि नियमों के अनुपालन की निगरानी के लिए एक व्यवस्था तैयार की जाएगी। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के परिचालन की शुरुआत के साथ इन प्रतिबंधों को और कड़ाई से लागू किए जाने की संभावना है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे नियम न केवल पायलटों की सुरक्षा के लिए, बल्कि हवाई यात्रियों की समग्र सुरक्षा के लिए भी अनिवार्य हैं।