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क्या नोएडा में वायरल पोस्टर ने सियासी संग्राम को तेज कर दिया?

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क्या नोएडा में वायरल पोस्टर ने सियासी संग्राम को तेज कर दिया?

सारांश

नोएडा में विजयदशमी पर वायरल हुए एक पोस्टर ने राजनीतिक वातावरण को गरमा दिया है। सपा कार्यकर्ताओं ने थाने के सामने विरोध किया और सरकार से कार्रवाई की मांग की है। जानिए इस विवाद की पूरी कहानी और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं।

मुख्य बातें

सपा कार्यकर्ताओं ने थाने के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।
पोस्टर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विपक्षी नेताओं का अपमान किया गया।
पुलिस ने मामले की जांच का आश्वासन दिया।
सपा ने कड़ी कार्रवाई की मांग की।
राजनीतिक मतभेदों के बावजूद मर्यादा का पालन आवश्यक है।

नोएडा, 2 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। विजयदशमी के मौके पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक वायरल पोस्टर ने राजनीतिक स्थिति को गरमा दिया है।

समाजवादी पार्टी (सपा) ने इस पोस्टर को अत्यधिक आपत्तिजनक मानते हुए थाना सेक्टर-24 में विरोध दर्ज कराया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने थाने के बाहर नारेबाजी की और आरोपी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर पुलिस को शिकायती पत्र सौंपा। यह मामला एक ऐसे पोस्टर से संबंधित है जो ‘एक्स’ पर तेजी से फैल रहा है। पोस्टर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हवन करते हुए दिखाया गया है, जबकि उसके शीर्ष पर लिखा है, “जब-जब धर्म की स्थापना होती है, तब-तब असुरों को परेशानी होती है।”

पोस्टर के ऊपरी हिस्से में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तस्वीरों को कथित तौर पर ‘राक्षस रूप’ में प्रदर्शित किया गया है। जैसे ही यह पोस्टर सामने आया, सपा कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश फैल गया। सपा के जिला अध्यक्ष के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल थाना सेक्टर-24 पहुंचा।

कार्यकर्ताओं ने पुलिस स्टेशन के बाहर जोरदार नारेबाजी की और कहा कि इस प्रकार के पोस्टर समाज में नफरत फैलाने का कार्य करते हैं। यह न केवल विपक्षी नेताओं का अपमान है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी हमला है। सपा नेताओं ने पुलिस को सौंपे गए ज्ञापन में बताया कि यह पोस्टर कथित तौर पर नोएडा के चौड़ा गांव निवासी एक युवक द्वारा बनाया और साझा किया गया है।

शिकायत पत्र में लिखा गया है कि यह कृत्य जानबूझकर शहर का माहौल खराब करने और राजनीतिक द्वेष फैलाने के उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने मांग की कि उक्त व्यक्ति के खिलाफ तुरंत मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए। सपा कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो वे व्यापक आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

उनका कहना है कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन मर्यादा का उल्लंघन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस अधिकारियों ने शिकायत पत्र लेकर मामले की जांच का आश्वासन दिया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सभी पक्षों को यह समझना चाहिए कि व्यक्तिगत अपमान और नफरत भड़काने वाली गतिविधियों से लोकतंत्र को खतरा होता है। हमें सकारात्मक राजनीति की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता है।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह पोस्टर किसके खिलाफ है?
यह पोस्टर मुख्य रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ है, जिसमें विपक्षी नेताओं को अपमानित किया गया है।
सपा ने विरोध क्यों किया?
सपा ने इसे समाज में नफरत फैलाने वाला और लोकतांत्रिक मूल्यों का उल्लंघन मानते हुए विरोध किया।
क्या पुलिस ने कार्रवाई की है?
पुलिस ने शिकायत पत्र ले लिया है और मामले की जांच का आश्वासन दिया है।
क्या यह मामला राजनीतिक द्वेष का है?
हां, यह मामला राजनीतिक द्वेष फैलाने के उद्देश्य से किया गया प्रतीत होता है।
सपा ने क्या मांग की है?
सपा ने आरोपी के खिलाफ तुरंत मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
राष्ट्र प्रेस
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