एनपीएस वात्सल्य: मात्र ₹250 से बच्चे का भविष्य सुरक्षित, अगस्त 2026 तक 4 लाख खाते खुले
सारांश
मुख्य बातें
एनपीएस वात्सल्य योजना में निवेशकों की रुचि तेज़ी से बढ़ रही है — अगस्त 2026 तक इस योजना से जुड़े खातों की संख्या 4 लाख के पार पहुँच गई है। मात्र ₹250 प्रति माह की न्यूनतम निवेश राशि से शुरू होने वाली यह योजना माता-पिता को अपने नाबालिग बच्चों के नाम पर दीर्घकालिक निवेश कोष बनाने का अवसर देती है। नई दिल्ली से उपलब्ध आँकड़े बताते हैं कि यह भारत की सबसे तेज़ी से बढ़ती बाल-केंद्रित पेंशन-आधारित बचत योजनाओं में से एक बन चुकी है।
खातों में तेज़ वृद्धि के आँकड़े
उद्योग से जुड़े आँकड़ों के अनुसार, मार्च 2025 में योजना से जुड़े बच्चों की संख्या लगभग 1.07 लाख थी, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 2.15 लाख हो गई। यानी केवल एक वर्ष में यह संख्या दोगुनी से भी अधिक हो गई। इसके बाद अगले पाँच महीनों में ही यह आँकड़ा 4 लाख को पार कर गया, जो दर्शाता है कि योजना के प्रति जागरूकता और विश्वास दोनों में असाधारण वृद्धि हुई है।
किन बच्चों के खाते सबसे ज़्यादा
आँकड़ों के अनुसार, एनपीएस वात्सल्य में सबसे बड़ी हिस्सेदारी 10 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की है, जो कुल खाताधारकों का लगभग 36.9 प्रतिशत है। इसके बाद 5 से 9 वर्ष आयु वर्ग की हिस्सेदारी 31.6 प्रतिशत है। 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग की हिस्सेदारी 21.1 प्रतिशत और 0 से 4 वर्ष के शिशुओं की हिस्सेदारी 10.4 प्रतिशत है। उल्लेखनीय यह है कि 15 वर्ष से कम आयु के बच्चे कुल खाताधारकों का लगभग 68.5 प्रतिशत हिस्सा हैं, जो संकेत देता है कि माता-पिता बच्चों की प्राथमिक शिक्षा के वर्षों से ही निवेश शुरू करना पसंद कर रहे हैं।
योजना की प्रमुख विशेषताएँ
एनपीएस वात्सल्य के तहत माता-पिता या अभिभावक नाबालिग बच्चे के नाम पर खाता खोल सकते हैं। न्यूनतम निवेश राशि केवल ₹250 है और अधिकतम निवेश की कोई सीमा नहीं है। केवल माता-पिता ही नहीं, बल्कि रिश्तेदार और मित्र भी बच्चे के खाते में राशि जमा कर सकते हैं। यह एक मार्केट-लिंक्ड निवेश योजना है, जिसमें जमा राशि को विभिन्न पेंशन फंड प्रबंधकों के माध्यम से बाज़ार से जुड़े साधनों में लगाया जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, चुनी गई योजना के आधार पर इक्विटी में निवेश की हिस्सेदारी काफी अधिक हो सकती है, जिससे दीर्घकाल में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना रहती है।
आंशिक निकासी और वयस्क होने पर विकल्प
हालाँकि यह योजना दीर्घकालिक निवेश के लिए बनाई गई है, फिर भी कुछ विशेष परिस्थितियों में आंशिक निकासी की अनुमति है। नियमों के अनुसार, खाता खुलने के तीन वर्ष बाद जमा मूल राशि का 25 प्रतिशत तक निकाला जा सकता है — शिक्षा, चिकित्सा या अन्य विशेष आवश्यकताओं के लिए। निवेश से प्राप्त रिटर्न को इस सीमा में शामिल नहीं किया जाता।
बच्चे के 18 वर्ष पूरे होने के बाद खाते को निर्धारित नियमों के तहत जारी रखा जा सकता है और 21 वर्ष की आयु तक बनाए रखा जा सकता है। इसके बाद इसे सामान्य नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) खाते में भी परिवर्तित किया जा सकता है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि एनपीएस वात्सल्य को पीपीएफ या म्यूचुअल फंड जैसे विकल्पों का प्रतिस्थापन नहीं, बल्कि पूरक साधन मानना चाहिए। जहाँ PPF सरकार-समर्थित सुरक्षित बचत योजना है और म्यूचुअल फंड अधिक लचीलापन देते हैं, वहीं एनपीएस वात्सल्य का ज़ोर दीर्घकालिक संपत्ति निर्माण और वित्तीय अनुशासन विकसित करने पर है।
पेंशन क्षेत्र में डिजिटल बदलाव भी इस योजना को सुलभ बना रहे हैं — कुछ मामलों में खाता महज़ कुछ सेकंड में खोलने की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। आगे चलकर, जो माता-पिता बच्चों के लिए दीर्घकालिक फंड तैयार करना चाहते हैं, उनके लिए यह योजना एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभर रही है।